भारतीय नौसेना की समुद्री क्षमताओं और परिचालन क्षमता को बढ़ाने की दिशा में एक अहम कदम उठाते हुए विशाखापट्टनम में पहले स्वदेशी फ्लीट सपोर्ट शिप (FSS-1) 'आईएनएस सूर्य' का जलावतरण किया गया। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने विशाखापट्टनम स्थित हिंदुस्तान शिपयार्ड लिमिटेड (HSL) में आयोजित औपचारिक समारोह के दौरान इस विशाल युद्धपोत को लॉन्च किया। लगभग 43,500 टन वजनी यह विशाल पोत भारतीय नौसेना के जहाजों को गहरे समुद्र में ईंधन, गोला-बारूद, रसद और तकनीकी सहायता प्रदान करने के लिए तैयार किया गया है, जिससे नौसैनिक बेड़े की पानी में टिके रहने की क्षमता में भारी इजाफा होगा।
विशाखापट्टनम में कई अहम परियोजनाओं की शुरुआत
इस बड़े रक्षा कार्यक्रम के दौरान पहले फ्लीट सपोर्ट शिप के जलावतरण के साथ-साथ श्रृंखला के पांचवें पोत (FSS-5) की कील लेइंग यानी निर्माण कार्य की औपचारिक शुरुआत भी की गई। इसके अतिरिक्त यार्ड में बुनियादी ढांचे को गति देने के लिए एक नए स्लिपवे का उद्घाटन हुआ। विशाखापट्टनम में कुल तीन महत्वपूर्ण परियोजनाओं की शुरुआत हुई, जबकि रक्षा मंत्री के इस दौरे में हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड में 2,000वें एयरो-इंजन की डिलीवरी का कार्यक्रम भी शामिल रहा। इन सभी परियोजनाओं का उद्देश्य देश के रक्षा विनिर्माण ढांचे को मजबूत और आत्मनिर्भर बनाना है।
समुद्री उद्योग का बड़ा केंद्र बनेगा विशाखापट्टनम
रक्षा मंत्री ने इस अवसर पर विशाखापट्टनम को एक प्रमुख समुद्री औद्योगिक हब के रूप में विकसित करने पर विशेष बल दिया। उन्होंने सोशल मीडिया मंच X पर अपनी बात साझा करते हुए लिखा, "FSS-1 का लॉन्च उपलब्धि का प्रतीक है, FSS-5 का कील लेइंग हमारे संकल्प का प्रतीक है और नया स्लिपवे हमारी बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।" उन्होंने रेखांकित किया कि हिंदुस्तान शिपयार्ड तेजी से आधुनिक जहाज निर्माण के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में उभर रहा है।
19,000 करोड़ रुपये की परियोजना से नौसेना को मजबूती
फ्लीट सपोर्ट जहाजों का निर्माण लगभग 19,000 करोड़ रुपये की वृहद राष्ट्रीय परियोजना के तहत किया जा रहा है। ये आपूर्ति जहाज भारतीय नौसेना के युद्धपोतों को बंदरगाह पर लौटे बिना लंबे समय तक खुले महासागर में गश्त करने और अभियान चलाने में सक्षम बनाएंगे। विशालकाय आकार और आधुनिक लॉजिस्टिक्स प्रणालियों से लैस 'सूर्य' जैसे जहाज हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक पहुंच और समुद्री सुरक्षा को नया विस्तार देंगे।



























