अंकिता भंडारी हत्याकांड में न्याय की गुहार लगाते हुए मृतका के माता-पिता ने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली स्थित इंडिया गेट पर अपना विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। वारदात के चार वर्ष पूरे होने के बावजूद मामले से जुड़े अज्ञात प्रभावशाली व्यक्ति पर कार्रवाई न होने और दुष्यंत गौतम की हालिया नियुक्ति को लेकर परिजनों में गहरा रोष है। इस बीच कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी ने धरना स्थल पर पहुंचकर शोकाकुल परिवार से सीधी बातचीत की और उन्हें हरसंभव कानूनी व सामाजिक सहयोग का भरोसा दिलाया।
इंडिया गेट पर परिजनों का प्रदर्शन और मुख्य आपत्तियां
उत्तराखंड के चर्चित हत्याकांड की शिकार बनी अंकिता के माता-पिता का कहना है कि इतने लंबे अंतराल के बाद भी असली साजिशकर्ताओं तक कानून के हाथ नहीं पहुंच सके हैं। परिवार का मुख्य विरोध मामले में लगातार सामने आ रहे अज्ञात रसूखदार चेहरे को कानूनी संरक्षण दिए जाने को लेकर है। परिजनों ने हाल ही में दुष्यंत गौतम को दिए गए संवैधानिक पद पर गहरी आपत्ति दर्ज कराई है और इसे जांच की दिशा भटकाने वाला कदम बताया है। इंसाफ की मांग को लेकर दिल्ली पहुंचे परिजनों ने साफ किया कि जब तक निष्पक्ष जांच पूरी नहीं होती, उनका संघर्ष जारी रहेगा।
राहुल गांधी का सत्तापक्ष पर तीखा हमला
धरना स्थल पर मुलाकात के उपरांत राहुल गांधी ने X पर लिखा कि पूरे चार साल बीत जाने के बाद भी पीड़ित पक्ष को इंसाफ नहीं मिल पाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक प्रभावशाली आरोपी को सजा देने के बजाय संवैधानिक पद से नवाजा गया है। राहुल गांधी ने सत्ताधारी दल की कार्यप्रणाली की आलोचना करते हुए कहा कि अपराधियों को सरकारी संरक्षण देना अत्यंत चिंताजनक है और इस रुख से पीड़ित परिवारों का व्यवस्था पर से भरोसा टूटता है।
सड़क से संसद तक जनाक्रोश की गूंज
अंकिता भंडारी प्रकरण में समय बीतने के साथ ही आम जनता का रोष भी बढ़ता जा रहा है। हाल ही में लोगों ने सड़कों पर उतरकर विशाल मानव श्रृंखला बनाई थी और मृतका को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए उच्च स्तरीय जांच की मांग दोहराई थी। सामाजिक कार्यकर्ताओं और विपक्षी दलों का आरोप है कि जांच एजेंसियां रसूखदारों को बचाने के दबाव में काम कर रही हैं, जिससे न्याय मिलने में अकारण देरी हो रही है।
जनता की प्रतिक्रिया
सोशल मीडिया और जनमानस में इस पूरे घटनाक्रम को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है। बड़ी संख्या में नागरिकों ने पीड़ित परिवार के प्रति सहानुभूति व्यक्त करते हुए मामले की पारदर्शी जांच की मांग की है, जबकि कई लोगों ने राजनीतिक दलों द्वारा इस संवेदनशील मुद्दे पर की जा रही बयानबाजी पर सवाल भी खड़े किए हैं।


























