श्रीनगर में हुए नालंदा संवाद कार्यक्रम में कश्मीर के पर्यटन को लेकर एक अहम चर्चा हुई, जिसमें शशि थरूर ने हिस्सा लिया। उन्होंने खुद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करके इस कार्यक्रम में शामिल होने की जानकारी दी और बताया कि उन्हें इसमें एक खास विषय पर अपनी बात रखने का मौका मिला।
क्या है यह संवाद और किसने कराया आयोजित
खबरों के मुताबिक यह आयोजन कश्मीर चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री यानी KCCI की तरफ से कराया गया। इसका मकसद यह दिखाना था कि कश्मीर में पर्यटन सिर्फ घूमने फिरने का जरिया नहीं, बल्कि शांति कायम करने, रोजगार पैदा करने और टिकाऊ विकास की दिशा में एक पुल का काम कर सकता है। इसी मंच पर थरूर को "पर्यटन एक सेतु: कश्मीर में शांति और सुशासन की पुनर्कल्पना" विषय पर बोलने के लिए बुलाया गया था, जिसके लिए उन्होंने अपनी खुशी भी जाहिर की।
शशि थरूर ने क्या कहा
अपने संबोधन में शशि थरूर ने कश्मीर की असाधारण प्राकृतिक खूबसूरती और यहां की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को पर्यटन की सबसे बड़ी ताकत बताया। उनका कहना था कि ये दोनों चीजें मिलकर कश्मीर को एक ऐसी जगह बनाती हैं, जहां पर्यटन के जरिए शांति और बेहतर शासन, दोनों को मजबूती दी जा सकती है। यानी सिर्फ आर्थिक फायदे के लिए नहीं, बल्कि इलाके में स्थिरता लाने के नजरिए से भी पर्यटन को एक असरदार हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया जा सकता है।
पर्यटन, रोजगार और टिकाऊ विकास की कड़ी
इस पूरे संवाद का जोर इस बात पर था कि कश्मीर में पर्यटन को बढ़ावा देने से सीधे तौर पर रोजगार के मौके बढ़ेंगे और इलाके में लंबे समय तक टिकने वाला विकास हो सकेगा। शांति, रोजगार और सतत विकास, इन तीनों को एक दूसरे से जोड़कर देखा गया, यानी अगर कश्मीर में सैलानियों का भरोसा बढ़ता है तो इसका सीधा असर स्थानीय अर्थव्यवस्था और वहां के हालात दोनों पर पड़ सकता है।



























