अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक पोस्ट के जरिए मोदी सरकार पर सोनम वांगचुक को जबरन हिरासत में लेने का आरोप लगाते हुए तीखा हमला बोला है। उन्होंने लिखा कि सरकार का यह रवैया अहंकार से भरा है और इस तरह की सख्ती की बजाय बातचीत का रास्ता अपनाया जाना चाहिए था। उनके मुताबिक सरकार ने इस मामले को जिस तरह संभाला, वह खुद सोनम वांगचुक से ज्यादा सरकार की सोच के बारे में बताता है।
पोस्ट में क्या कहा अरविंद केजरीवाल ने
अपने पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने लिखा कि इतना अहंकार ठीक नहीं है। उनका कहना था कि सोनम वांगचुक को जबरन उठाने की बजाय मोदी सरकार को उनसे सीधे बातचीत करनी चाहिए थी। केजरीवाल के मुताबिक इस तरह की कार्रवाई से समस्या का हल निकलने की बजाय टकराव ही बढ़ता है, और जब दूसरा पक्ष किसी वाजिब मुद्दे पर बात कर रहा हो तो ताकत का इस्तेमाल बातचीत की जगह नहीं ले सकता।
सोनम वांगचुक के साथ जबरदस्ती मोदी सरकार की हार है।
इस एक वाक्य के जरिए उन्होंने साफ कर दिया कि वे इस कार्रवाई को सरकार की कमजोरी और नाकामी के तौर पर देख रहे हैं, न कि ताकत के प्रदर्शन के तौर पर। उनका यह बयान सीधे तौर पर सरकार की नीयत और तरीके, दोनों पर सवाल खड़ा करता है, और यह भी बताता है कि इतनी जल्दी सख्ती का सहारा लेना सरकार के अपने तर्कों पर भरोसे की कमी को दिखाता है।
कॉकरोच आंदोलन और शिक्षा व्यवस्था पर सवाल
पोस्ट में अरविंद केजरीवाल ने कॉकरोच आंदोलन का जिक्र करते हुए मोदी सरकार से कहा कि इस आंदोलन को कुचलने की कोशिश करने के बजाय देश की शिक्षा और परीक्षा व्यवस्था को सुधारने पर ध्यान देना चाहिए। उनका इशारा उस असंतोष की ओर था जो छात्रों और युवाओं में परीक्षा प्रणाली को लेकर बना हुआ है, और अब तक इस नाराजगी को जिस तरह संभाला गया उस पर भी। केजरीवाल का कहना था कि अगर सरकार वाकई समस्या सुलझाना चाहती है, तो उसे आंदोलन को दबाने की बजाय उसकी जड़ में जाकर व्यवस्थागत खामियों को दूर करना चाहिए। उन्होंने इसे सीधे तौर पर सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल के तौर पर पेश किया, यह कहते हुए कि सख्ती दिखाने से पहले सरकार को यह सोचना चाहिए था कि आखिर छात्र और कार्यकर्ता सड़कों पर क्यों उतर रहे हैं। उनके मुताबिक असली समाधान व्यवस्था में सुधार में छिपा है, दमन में नहीं, और आंदोलन को कानून व्यवस्था की समस्या मानकर पेश करना, न कि नीतिगत समस्या मानकर, उनकी नजर में शुरू से ही गलत रवैया था।
जनता की प्रतिक्रिया
अरविंद केजरीवाल के इस पोस्ट पर सोशल मीडिया पर मिली-जुली प्रतिक्रियाएं देखने को मिलीं। एक तबके ने उनकी बात का समर्थन करते हुए मोदी सरकार की कार्रवाई को सत्ता के दुरुपयोग जैसा बताया और शिक्षा व परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को सही ठहराया। वहीं दूसरे तबके ने केजरीवाल के आरोपों को खारिज करते हुए सरकार के कदम का बचाव किया और इसे केजरीवाल की राजनीति से जोड़कर देखा। कुछ यूजर्स ने इस पूरे मामले पर सवाल भी उठाए कि आखिर सरकार और आंदोलनकारियों के बीच बातचीत की कोई गुंजाइश क्यों नहीं बन पाई, और इसे सरकार तथा बदलाव की मांग कर रहे युवाओं के बीच बढ़ती दूरी के संकेत के तौर पर भी देखा गया। कुल मिलाकर, यह पोस्ट सोशल मीडिया पर बहस का विषय बना रहा और लोगों ने इसे लेकर समर्थन, आलोचना और सवाल तीनों तरह की प्रतिक्रियाएं दीं, जिससे यह भी जाहिर हुआ कि पोस्ट सामने आने के कुछ ही घंटों में यह मुद्दा कितना विवादास्पद बन चुका था।

























