रियलिटी प्रतियोगिता में उस समय जबरदस्त हंगामा देखने को मिला जब आतिशबाजी से जुड़े एक खास टास्क के दौरान तेज प्रताप यादव और मनीष कश्यप आपस में उलझ पड़े। प्राइज पॉट में रकम जोड़ने के मकसद से आयोजित इस चुनौती ने धीरे-धीरे अधिकारों, कंटेस्टेंट्स की मेहनत और बेसमेंट में रहने वाले वर्कर्स के प्रति रूलर्स के रवैये को लेकर एक गंभीर विवाद का रूप ले लिया। एक तरफ जहां बेसमेंट में मौजूद प्रतिभागी फायरवर्क्स तैयार करने और उन्हें अप्रूव कराने के कड़े दबाव से जूझ रहे थे, वहीं पेंटहाउस के भीतर भी नए गठबंधनों और पुरानी रंजिशों ने माहौल को बेहद तनावपूर्ण बना दिया।
गुणवत्ता जांच की सख्त शर्तों ने बढ़ाया वर्कर्स पर तनाव
नियमों के मुताबिक वर्कर्स को प्राइज पॉट की राशि में इजाफा करने के लिए फायरवर्क्स तैयार करने की जिम्मेदारी दी गई थी। इस चुनौती में एक बेहद कठिन शर्त जोड़ी गई थी, जिसके तहत अगर क्वालिटी चेक में दो फायरवर्क्स खारिज हो जाते, तो वर्कर्स को आपसी सहमति से अपने ही समूह के किसी एक कमजोर सदस्य को बाहर का रास्ता दिखाना पड़ता। शुरुआती दौर में जब शहजाद पूनावाला ने एक फायरवर्क को नामंजूर किया, तो उन्होंने यह सवाल भी उठाया कि क्या उनका फैसला अनुचित था। इस पर प्रियंका चाहर चौधरी ने उन्हें फिजूल बहस छोड़कर काम आगे बढ़ाने की सलाह दी। प्रियंका के इस बयान पर शहजाद ने पलटवार करते हुए स्पष्ट किया कि वह सिर्फ फुटेज पाने के लिए नहीं बल्कि पूरी निष्ठा से अपना दायित्व निभाने आए हैं। शुरुआत में दिखी यह हल्की तनातनी आगे चलकर एक व्यापक टकराव का आधार बन गई।
मनीष का फायरवर्क खारिज होने पर तेज प्रताप से तीखी तकरार
चुनौती के अगले चरण में शहजाद पूनावाला ने मनीष कश्यप द्वारा तैयार किए गए फायरवर्क को भी अस्वीकार कर दिया। अपने प्रयास के इस तरह खारिज होने से मनीष काफी खफा हो गए और उन्होंने टास्क के नियमों और रवैये को लेकर खुलकर विरोध दर्ज कराया। इसी बीच तेज प्रताप यादव भी इस वार्तालाप में कूद पड़े, जिसके बाद दोनों के बीच बातचीत ने देखते ही देखते तीखे विवाद का रूप ले लिया। तेज प्रताप ने मनीष पर आरोप मढ़ते हुए कहा कि वह पूरे मामले को अपने पक्ष में मोड़ने की राजनीतिक चाल चल रहे हैं। दूसरी ओर मनीष का तर्क था कि बेसमेंट के वर्कर्स दिन-रात पसीना बहा रहे हैं, मगर रूलर्स का उनके प्रति व्यवहार बिल्कुल भी न्यायसंगत नहीं है।
यह विवाद केवल टास्क तक सीमित नहीं रहा बल्कि इसमें व्यक्तिगत पहचान, अधिकार, परिश्रम और खेल के भीतर रूलर्स व वर्कर्स के बीच के सामाजिक-आर्थिक फासले जैसे गहरे पहलू भी शामिल हो गए। मनीष ने तेज प्रताप से कामगारों के पसीने की कद्र करने की गुहार लगाई, जबकि तेज प्रताप का कहना था कि मनीष खेल के मंच पर बेवजह सियासत खींच रहे हैं। दोनों अपनी-अपनी दलीलों पर अड़े रहे, जिससे शो के भीतर एक नई और तीखी राजनीतिक-व्यक्तिगत प्रतिद्वंद्विता की नींव पड़ती दिखाई दी।
लगातार रिजेक्शन के बीच दो सदस्यों पर गिरी गाज
टास्क में उस वक्त नया मोड़ आया जब क्वालिटी कंट्रोल देख रहे अधिकारियों के बीच फायरवर्क्स के मानकों को लेकर कोई आम सहमति नहीं बन पाई। इस गतिरोध को खत्म करने के लिए अल्टीमेट रूलर को वीटो पावर देते हुए अंतिम निर्णय लेने का अधिकार सौंपा गया। अगले चरण में जब एक साथ तीन फायरवर्क्स रिजेक्ट कर दिए गए, तो नियमों के तहत वर्कर्स को अपने समूह से किसी एक सदस्य की बलि देने पर मजबूर होना पड़ा। अनिश भगत ने खेल भावना दिखाते हुए खुद ही बाहर होने की पेशकश कर दी, लेकिन इसके बावजूद बेसमेंट की मुश्किलें थमी नहीं।
अगले राउंड में काजल राघवानी से रंगों के चयन में गंभीर चूक हो गई, जिसके चलते तैयार किए गए तीनों फायरवर्क्स सिरे से खारिज कर दिए गए। दो बार की नाकामी के बाद ग्रुप को दूसरा कड़ा कदम उठाना पड़ा और निहारिका तिवारी को गेम से बाहर कर दिया गया। इस फैसले से निहारिका बेहद आहत और क्षुब्ध नजर आईं, जिससे उनका आक्रोश खुलकर सामने आ गया।
निहारिका और गौतम गुलाटी के बीच जबरदस्त वाद-विवाद
खेल से बेदखल होते ही निहारिका तिवारी का गुस्सा फूट पड़ा और वह सीधे तौर पर गौतम गुलाटी से भिड़ गईं। दोनों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का तीखा दौर शुरू हुआ। स्थिति को बिगड़ता देख कायरा अनु ने बीच-बचाव कर शांति कायम करने की कोशिश की, लेकिन जब विवाद थमता नजर नहीं आया तो उन्होंने खुद को इस बहस से पूरी तरह अलग कर लिया। इस वाकये ने यह साफ कर दिया कि टास्क की भारी अनिश्चितता और तनाव अब कंटेस्टेंट्स के आपसी समीकरणों को बुरी तरह बिखेर रहा है। बेसमेंट में मुकाबला सिर्फ पटाखे बनाने का नहीं था, बल्कि हर रिजेक्शन के साथ अपनी जगह गंवाने का वास्तविक खतरा सिर पर मंडरा रहा था, जिससे छोटी-छोटी असहमतियां भी भारी हंगामे में तब्दील हो रही थीं।
36 में से केवल 20 फायरवर्क्स हुए पास, रूलर्स ने जुटाए 10 लाख रुपये
मुकाबले के अंतिम पलों में बेसमेंट के सदस्यों को थोड़ी कामयाबी जरूर हासिल हुई। चौथे राउंड में तीन फायरवर्क्स को हरी झंडी मिली, जबकि पांचवें राउंड में बनाए गए सभी पटाखों को क्वालिटी चेक में सफलता मिल गई। हालांकि तब तक समूह को भारी नुकसान हो चुका था। पूरी चुनौती के दौरान वर्कर्स ने कुल 36 फायरवर्क्स का निर्माण किया था, लेकिन इनमें से सिर्फ 20 ही मानकों पर खरे उतर सके।
इस परिणाम के चलते रूलर्स के प्राइज पॉट में 10 लाख रुपये की अतिरिक्त रकम जुड़ गई। रूलर्स ने पहली प्राइज पॉट चुनौती अपने नाम कर ली, जबकि बेसमेंट के वर्कर्स के हाथ से गेम का पहला तख्ता पलट करने का सुनहरा अवसर फिसल गया। इस जीत के साथ रूलर्स की कुल इनामी राशि बढ़कर 38 लाख रुपये हो गई, जबकि लगातार झटके झेलने के बाद वर्कर्स के खाते में महज 3.25 लाख रुपये ही शेष बचे हैं। अब बेसमेंट के प्रतिभागियों के सामने आगामी चुनौतियों में इस विशाल अंतर को पाटने की कठिन चुनौती होगी।
टास्क समाप्ति के बाद भोजन को लेकर बढ़ा स्वाभिमान का टकराव
टास्क खत्म होने के बाद भी परिसर का तनाव शांत नहीं हुआ। रूलर्स ने बेसमेंट के प्रतिभागियों की कड़ी मेहनत का हवाला देते हुए उन्हें अपना खाना साझा करने का प्रस्ताव दिया। हालांकि स्वाभिमान को चोट पहुंचने की बात कहते हुए बेसमेंट के कंटेस्टेंट्स ने इस पेशकश को सीधे तौर पर ठुकरा दिया। उनका मानना था कि उनके पसीने को उचित सम्मान देने के बजाय उन पर अहसान जताया जा रहा है, इसलिए उन्होंने अपना बचा हुआ राशन खुद तक ही सीमित रखने का फैसला किया।
इसके तुरंत बाद काजल राघवानी ने टास्क में गौतम गुलाटी के योगदान पर तीखे सवाल खड़े किए, जिसके जवाब में गौतम ने जिम्मेदारी का रुख शहजाद की ओर मोड़ दिया। दूसरी तरफ मनीष कश्यप ने कायरा अनु के प्रयासों की पैरवी करते हुए सारा गुरपाल और काजल से उनके काम को सम्मान देने का आग्रह किया। इसी दौरान निहारिका और अनिश ने भी गौतम पर आरोप लगाते हुए कहा कि वह महिला कंटेस्टेंट्स की कार्यक्षमता और हुनर को कम आंकते हैं।
पेंटहाउस के भीतर बदलते समीकरण और नई व्यक्तिगत दूरियां
उधर पेंटहाउस की विलासिता के बीच भी रिश्तों के समीकरण तेजी से करवट ले रहे हैं। स्वरा भास्कर ने शहजाद पूनावाला द्वारा अपने फैसलों पर दृढ़ता से टिके रहने की खुले दिल से प्रशंसा की। वहीं तेज प्रताप और मनीष कश्यप की इस तीखी भिड़ंत ने पूरे शो के पावर डायनेमिक्स को हिलाकर रख दिया है। दूसरी ओर शहजाद ने प्रियंका चाहर चौधरी के मिजाज को लेकर अपनी दो टूक राय व्यक्त की और उन्हें स्वभाव से टेंपरामेंटल और नार्सिसिस्टिक करार दिया। इस तरह आतिशबाजी टास्क ने सिर्फ इनामी रकम का गणित ही नहीं बदला, बल्कि वर्कर्स और रूलर्स के बीच वैचारिक खाई और व्यक्तिगत दुश्मनी को भी बेहद गहरा कर दिया है।



















