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अफगानिस्तान सीमा में घुसे पाकिस्तानी लड़ाकू विमान, आधी रात को रिहायशी ठिकानों पर की बमबारीपाकिस्तान
21 सित॰ 2026, 6:45 am (38 दिन पहले)· 1

अफगानिस्तान सीमा में घुसे पाकिस्तानी लड़ाकू विमान, आधी रात को रिहायशी ठिकानों पर की बमबारी

पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा में घुसकर आधी रात के वक्त सो रहे लोगों पर हवाई हमले किए हैं। दोनों देशों के बीच सीमा पर लगातार बढ़ रहे तनाव के बीच यह ताजा सैन्य कार्रवाई सामने आई है।

पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने अफगानिस्तान की सीमा में दाखिल होकर कई रिहायशी इलाकों पर हवाई बमबारी की है। जिस समय लड़ाकू विमानों ने बम बरसाए, उस वक्त लोग अपने घरों में सो रहे थे। सीमा पार से अचानक किए गए इस हमले से इलाके में अफरा-तफरी मच गई और दोनों पड़ोसी मुल्कों के बीच पहले से जारी तनाव और गहरा गया है।

सोते हुए लोगों पर गिराए गए तबाही के गोले

सीमावर्ती इलाकों में आधी रात को अचानक हवाई सायरन और जोरदार धमाकों की आवाजें सुनाई देने लगीं। पाकिस्तानी फाइटर जेट्स ने कई ठिकानों को निशाना बनाकर मिसाइलें और भारी बम दागे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब यह हमला हुआ तब आम नागरिक अपने घरों में आराम कर रहे थे। अचानक गिरे बमों की चपेट में कई आवासीय इमारतें आ गईं, जिससे भारी नुकसान होने की आशंका जताई जा रही है।

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पहले भी सीमा पार हमले करता रहा है पाकिस्तान

अफगानिस्तान की सीमा में पाकिस्तानी वायुसेना की यह कार्रवाई कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी पाकिस्तानी लड़ाकू विमान अफगान सीमा में घुसकर कई बड़े हमलों को अंजाम दे चुके हैं। जून 2026 के आखिरी हफ्ते में भी पाकिस्तानी फाइटर जेट्स ने बमबारी कर 36 नागरिकों की जान ले ली थी, जिसे स्थानीय स्तर पर 'ब्लैक संडे' के रूप में याद किया जाता है। इसके ठीक पहले जून महीने की शुरुआत में भी हवाई हमलों के दौरान बच्चों सहित 13 लोगों की मौत हुई थी, जिस पर तालिबान प्रशासन ने कड़ी नाराजगी जाहिर की थी।

साल 2026 के शुरुआती महीनों में भी ऐसे ही भीषण हमले देखे गए थे। मार्च 2026 में काबुल और अन्य ठिकानों के पास एक नशा मुक्ति केंद्र और अस्पताल परिसर पर हुए हवाई हमले में 400 लोगों के मारे जाने और 250 से अधिक लोगों के घायल होने का दावा तालिबान ने किया था। वहीं फरवरी 2026 में पाकिस्तान ने टीटीपी और आईएस लड़ाकों को निशाना बनाकर 80 चरमपंथियों को ढेर करने की बात कही थी।

सीमा विवाद और चरमपंथी ठिकानों को लेकर बढ़ता टकराव

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच तनाव की मुख्य वजह सीमा पार से होने वाली चरमपंथी गतिविधियां और दोनों देशों को बांटने वाली डूरंड रेखा को लेकर उपजा विवाद है। पाकिस्तान लगातार आरोप लगाता रहा है कि तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान (TTP) के लड़ाके अफगान सरजमीं का इस्तेमाल कर पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और आम नागरिकों पर आत्मघाती हमले करते हैं। वहीं दूसरी तरफ, काबुल में काबिज तालिबान प्रशासन इन आरोपों को खारिज करते हुए पाकिस्तान पर अफगान संप्रभुता का उल्लंघन करने और बेगुनाह नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाता रहा है। ताजा एयरस्ट्राइक के बाद सीमाई मोर्चे पर भारी सैन्य तैनाती और जवाबी कार्रवाई की आशंका गहरा गई है।

सवाल-जवाब

पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर ताजा हमला कब और कैसे किया?
पाकिस्तानी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने आधी रात के वक्त अफगानिस्तान के सीमावर्ती इलाकों में प्रवेश कर सोते हुए लोगों के रिहायशी ठिकानों पर बमबारी की।
क्या इससे पहले भी 2026 में पाकिस्तान ने अफगानिस्तान पर एयरस्ट्राइक की थी?
हाँ, इससे पहले फरवरी, मार्च और जून 2026 में भी पाकिस्तान ने अफगान सीमा में हवाई हमले किए थे, जिनमें भारी संख्या में लोग हताहत हुए थे।
पाकिस्तान इन हवाई हमलों के पीछे क्या वजह बताता है?
पाकिस्तान का दावा रहा है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए टीटीपी और आईएस जैसे आतंकी समूहों के ठिकानों को निशाना बनाकर आत्मघाती हमलों का जवाब देता है।
तालिबान प्रशासन का इन हमलों को लेकर क्या रुख है?
तालिबान प्रशासन ने पाकिस्तान पर अपनी संप्रभुता का उल्लंघन करने और आम नागरिकों के घरों तथा अस्पतालों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Li Wei@li-wei·37 दिन पहले

यह सैन्य कार्रवाई दर्शाती है कि डूरंड रेखा पर सुरक्षा संकट अब क्षेत्रीय स्थिरता के लिए बड़ा खतरा बन गया है। पाकिस्तान द्वारा टीटीपी के सफाए के दावे और काबुल द्वारा संप्रभुता के उल्लंघन के आरोपों के बीच, यह बढ़ता टकराव दक्षिण एशिया में नए भू-राजनीतिक समीकरण और व्यापक संघर्ष को जन्म दे सकता है, जिससे क्षेत्रीय व्यापार और सुरक्षा दोनों पर दूरगामी प्रभाव पड़ेंगे।

Sophie Laurent@sophie-laurent·37 दिन पहले

पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच बढ़ता यह सैन्य टकराव दक्षिण एशिया की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनता जा रहा है। डूरंड रेखा पर लगातार हवाई हमले और बढ़ती सैन्य तैनाती इस बात का संकेत देती है कि दोनों देशों के बीच कूटनीतिक रास्ते लगभग बंद हो चुके हैं। यदि यह स्थिति नियंत्रित नहीं की गई, तो यह क्षेत्रीय स्थिरता को बिगाड़ सकता है और यूरोपीय संघ जैसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर कूटनीतिक दबाव को और तेज कर सकता है, जिससे मानवीय संकट और गहराएगा।

Carlos Mendoza@carlos-mendoza·37 दिन पहले

कार्लोस मेंडोज़ा के दृष्टिकोण से, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के बीच यह सैन्य टकराव केवल एक क्षेत्रीय सीमा विवाद नहीं है, बल्कि यह दक्षिण एशिया में अमेरिकी रणनीतिक प्राथमिकताओं और आतंकवाद विरोधी अभियानों को भी सीधे प्रभावित कर रहा है। जैसे-जैसे वॉशिंगटन में इस बढ़ते तनाव पर विचार होगा, अमेरिकी नीति निर्माताओं के लिए यह आकलन करना कठिन हो जाएगा कि पाकिस्तान की संप्रभुता संबंधी चिंताओं और अफगानिस्तान में गहरे मानवीय संकट के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए, जिससे आने वाले दिनों में कूटनीतिक हल तलाशना और भी जटिल हो जाएगा।

Omar AL Mansoori@omar-mansoori·37 दिन पहले

डूरंड रेखा पर बढ़ते संघर्ष और टीटीपी के मुद्दों के बीच यह ताजा एयरस्ट्राइक इस्लामाबाद और काबुल के बीच द्विपक्षीय संबंधों को पूरी तरह बिगाड़ सकती है। नागरिकों के हताहत होने से क्षेत्रीय अस्थिरता और गहरी होगी, और आने वाले दिनों में कूटनीतिक संवाद के सारे रास्ते बंद होकर सीमा पर खुली सैन्य झड़पें शुरू होने की आशंका बढ़ गई है।

Ravikash Gupta@ravikash·37 दिन पहले

डूरंड रेखा पर सैन्य तनाव गहराने से दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में बड़े आर्थिक और व्यापारिक जोखिम पैदा हो रहे हैं। क्षेत्रीय सुरक्षा की इस अनिश्चितता का असर सीमावर्ती व्यापार, सप्लाई चेन और निवेशकों के भरोसे पर पड़ना तय है, जिससे वित्तीय बाजारों में भी सतर्कता और घबराहट बढ़ सकती है।

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