फरीदाबाद में फर्जी जॉब ऑफर के ज़रिए 89750 रुपये की साइबर ठगी, गाजियाबाद के 3 आरोपी गिरफ्तारइलाहाबाद हाई कोर्ट दो पैन कार्ड मामले में आजम खान और अब्दुल्ला आजम पर आदेश सुरक्षित करने के बाद निर्णय देगाझुंझुनू में तेज रफ्तार थार ने बरपाया कहर, तीन राहगीरों को कुचलने के बाद चालक फरारकोडरमा में बैग का कारोबार कैसे शुरू करें, जानिए निवेश से लेकर संभावित मुनाफे का पूरा गणितरॉबिनहुड के साथ रिपल की नई साझेदारी के बीच 1.33 डॉलर पर थमी एक्सआरपी की बढ़तसेबू में रक्षा सहयोग मजबूत करने पर भारत और फिलीपींस के बीच बनी सहमतिनागौर में मूंछों वाले नाचते बालाजी से लेकर एक आंख वाली प्रतिमा तक, जानिए इन प्रसिद्ध धामों का इतिहासराजौरी में सुरक्षा बलों को मिली बड़ी कामयाबी, भारी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामदब्रिटिश पाउंड में लगातार चौथे दिन फिसलन, 1.3300 के स्तर पर टिका स्टर्लिंगसर्दियों में दुधारू मवेशियों के घटते दूध से बचाएंगे ये जरूरी उपाय, जाने बचाव और खानपान की सही तकनीक
हथियारों के लिए किन-किन देशों की झोली फैलाता है पाकिस्तान? चीन से लेकर तुर्की और यूरोप तक पूरी फेहरिस्तपाकिस्तान
13 जून 2026, 4:36 am (138 दिन पहले)· 1

हथियारों के लिए किन-किन देशों की झोली फैलाता है पाकिस्तान? चीन से लेकर तुर्की और यूरोप तक पूरी फेहरिस्त

पाकिस्तान अपनी सैन्य ताकत के लिए चीन पर सबसे ज्यादा निर्भर है, जो उसके कुल हथियार आयात का 81 प्रतिशत हिस्सा अकेले पूरा करता है। तुर्की, नीदरलैंड्स और कई यूरोपीय देश भी उसे रक्षा साजोसामान देते रहे हैं।

आतंकवाद को पनाह देने के मामले में पाकिस्तान का नाम दुनिया में बार-बार आता रहा है। उसकी सरपरस्ती में पनपे आतंकी संगठनों ने भारत ही नहीं, बल्कि कई देशों में खूनी वारदातों को अंजाम दिया है। भारत के लिए इसका सबसे ताजा जख्म पहलगाम का आतंकी हमला है। यही नहीं, अमेरिका के वर्ल्ड ट्रेड टॉवर पर हमले की साजिश रचने वाला कुख्यात आतंकी ओसामा बिन लादेन अपने आखिरी दिनों में पाकिस्तान की ही धरती पर छिपा मिला था — यह अपने आप में इस बात का खुला सबूत है कि इस मुल्क की जमीन आतंक की खेती के लिए इस्तेमाल होती रही है। हैरानी की बात यह है कि इन सबके बावजूद दुनिया के कई देश पाकिस्तान को हथियारों से लैस करते आए हैं।

हथियारों का सबसे बड़ा सौदागर — चीन

पाकिस्तान को हथियार बेचने वालों में सबसे ऊपर नाम चीन का है। ताजा मिसाल हंगोर क्लास की पनडुब्बी है, जो चीन में बनकर पाकिस्तानी नौसेना में शामिल होने के लिए आज ही कराची पहुंची है। बताया जा रहा है कि दोनों देशों के बीच इन पनडुब्बियों को लेकर करीब 5 अरब डॉलर का करार हुआ है, जिसके तहत चीन कुल 8 हंगोर क्लास पनडुब्बियां पाकिस्तान को सौंपेगा। इनमें से पहली चार चीन में तैयार हो रही हैं और बाकी चार कराची शिपयार्ड में बनेंगी। खास बात यह है कि ये पनडुब्बियां ‘एयर-इंडिपेंडेंट प्रोपल्शन’ (AIP) तकनीक से लैस हैं, जिसकी वजह से ये पानी के भीतर लंबे समय तक छिपी रह सकती हैं।

ये भी पढ़ें

स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टीट्यूट (SIPRI) की रिपोर्ट बताती है कि पाकिस्तान अपने कुल हथियार आयात का 81 प्रतिशत हिस्सा अकेले चीन से मंगाता है। पांच साल पहले यह आंकड़ा 74 प्रतिशत था, यानी समय के साथ पाकिस्तान पर चीनी हथियारों की पकड़ और मजबूत होती गई है। यही नहीं, इसी रिपोर्ट के मुताबिक पाकिस्तान अब दुनिया का पांचवां सबसे बड़ा हथियार खरीदार देश बन चुका है और वैश्विक हथियार आयात में उसकी हिस्सेदारी करीब 4.6 प्रतिशत है।

आसमान में भी चीनी पकड़

बीते कुछ वर्षों में पाकिस्तानी वायुसेना का सबसे बड़ा कायाकल्प चीन की बदौलत हुआ है। पाकिस्तान ने चीन से J-10C फाइटर जेट खरीदे हैं, जिन्हें आधुनिक रडार और लंबी दूरी की मिसाइलों से लैस माना जाता है। इसके अलावा चीन में बना JF-17 थंडर ब्लॉक-3 भी उसके बेड़े का हिस्सा है। भविष्य की रणनीति के तहत पाकिस्तान ने चीन के J-35 (FC-31) स्टील्थ फाइटर जेट को अपनी फौज में शामिल करने का सौदा पक्का कर लिया है। खुद पाकिस्तानी एयरफोर्स चीफ ने इस डील पर मुहर लगाई थी, जिसके बाद पाकिस्तान इस पांचवीं पीढ़ी के चीनी स्टील्थ विमान का पहला खरीदार बन गया है। चीन का दावा है कि यह विमान रडार की पकड़ से बचकर निकल जाने में सक्षम है।

ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस का जखीरा

चीन-पाकिस्तान की यह यारी सिर्फ लड़ाकू विमानों तक सीमित नहीं है। अपनी नापाक करतूतों के लिए पाकिस्तान ने चीन से विंग लूंग-2, सीएच-4 और सीएच-5 जैसे ड्रोन भी हासिल किए हैं, जिनका इस्तेमाल वह भारत में हथियारों की तस्करी और सीमावर्ती इलाकों की जासूसी में करता रहा है। मिसाइल और एयर डिफेंस के मामले में भी चीन उसका सबसे बड़ा साझेदार है। PL-15 जैसी एयर-टू-एयर मिसाइलें पाकिस्तान को चीन से ही मिली हैं, जबकि HQ-9P और HQ-16 जैसी एयर डिफेंस प्रणालियां भी उसकी सुरक्षा का हिस्सा हैं। हालांकि ये सिस्टम कितने खोखले हैं, इसकी पोल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पूरी दुनिया के सामने खुल चुकी है।

थल और जल — हर मोर्चे पर चीनी साजोसामान

पाकिस्तान की थल सेना भी तेजी से चीनी हथियारों से सजती जा रही है। इसकी सबसे बड़ी मिसाल VT-4 या अल-हैदर टैंक हैं, जो पाकिस्तान के पुराने टैंकों की जगह ले रहे हैं। इनके अलावा SH-15 ट्रक माउंटेड हॉवित्जर तोप और फतह-1 तथा फतह-2 रॉकेट सिस्टम भी चीन के सहयोग से उसे मिले हैं। हाल ही में चीन ने Z-10ME अटैक हेलीकॉप्टर भी पाकिस्तानी सेना को सौंपे हैं, जिन्हें पुराने अमेरिकी कोबरा हेलीकॉप्टरों के विकल्प के तौर पर देखा जा रहा है। समुद्र में भी चीन की मौजूदगी गहरी है — दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा रक्षा करार हंगोर क्लास पनडुब्बियों का ही है, जो चीन की युआन क्लास डिजाइन पर आधारित हैं। इसके अलावा टुगरिल क्लास फ्रिगेट्स भी पाकिस्तानी नौसेना में शामिल हैं, जो साइलो, टॉरपीडो और एयर डिफेंस सिस्टम से लैस युद्धपोत हैं।

चीन अकेला नहीं — तुर्की से यूरोप तक

चीन के अलावा पाकिस्तान के हथियार साझेदारों में तुर्की का नाम भी प्रमुखता से लिया जाता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक तुर्की ने उसे न सिर्फ ड्रोन दिए हैं, बल्कि युद्धपोत निर्माण और पनडुब्बियों के आधुनिकीकरण में भी मदद कर रहा है। यूरोप की बात करें तो नीदरलैंड्स ने पाकिस्तान को समुद्री निगरानी और गश्ती पोत मुहैया कराए हैं। फ्रांस ने एक दौर में उसे मिराज लड़ाकू विमान और पनडुब्बियां दी थीं, हालांकि अब उसके साथ कोई नया रक्षा समझौता नहीं हुआ है। वहीं ब्रिटेन, इटली, जर्मनी और स्वीडन आज भी पाकिस्तान को कुछ तकनीकी उपकरण, हेलीकॉप्टर, रडार और रक्षा प्रणालियां देते आ रहे हैं।

संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp