सीमा पार से प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ भारत की कड़ी चेतावनी के बाद पड़ोसी मुल्क की सेना में स्पष्ट असहजता देखी जा रही है। भारत की ओर से यह साफ किए जाने पर कि किसी भी नई आतंकी साजिश का मुंहतोड़ और पहले से अधिक आक्रामक जवाब दिया जाएगा, पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व ने परमाणु क्षमता की दुहाई देते हुए जवाबी कार्रवाई की बात कही है। एक शीर्ष सैन्य कमांडर ने दावा किया है कि यदि सीमा पार से कोई भी गलत अनुमान लगाया गया, तो उसका परिणाम कल्पना से परे होगा। दोनों देशों के बीच पिछले कुछ दिनों से बयानों का यह तल्ख दौर तेजी से गहराया है।
सैन्य अकादमी में परमाणु हथियारों का हवाला
पाकिस्तान सैन्य अकादमी में आयोजित पासिंग आउट परेड के दौरान नेशनल स्ट्रैटेजिक कमांड के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल आमेर रजा ने जवानों और कैडेट्स को संबोधित करते हुए यह टिप्पणी की। उन्होंने अपने भाषण में जोर देकर कहा कि परमाणु हथियारों से लैस इस पूरे क्षेत्र में किसी भी तरह के पारंपरिक युद्ध की कोई गुंजाइश नहीं बची है। इसके साथ ही उन्होंने दावा किया कि देश की सीमाओं की हिफाजत के लिए सशस्त्र बल हर वक्त पूरी तरह तैयार हैं। कमांडर ने सीधे तौर पर किसी खास अभियान का ऐलान तो नहीं किया, लेकिन यह दोहराया कि अगर किसी स्तर पर रक्षात्मक आकलन में चूक हुई, तो उसका ऐसा जवाब मिलेगा जिसकी सीमा पार किसी ने कल्पना भी नहीं की होगी।
दुष्प्रचार और नैरेटिव वॉरफेयर का लगाया आरोप
लेफ्टिनेंट जनरल आमेर रजा ने अपने संबोधन में सेना और आम जनता के बीच बढ़ती खाई के मुद्दे को भी छुआ। उनका कहना था कि विरोधी ताकतें दुष्प्रचार और नैरेटिव वॉरफेयर के जरिए मुल्क के नागरिकों और सेना के बीच अविश्वास का माहौल खड़ा करने की कोशिशों में जुटी हुई हैं। उन्होंने किसी का नाम सीधे लिए बिना कहा कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद से देश को परोक्ष गतिविधियों और छद्म तरीकों से अस्थिर करने की साजिशें रची जा रही हैं। सैन्य कमांडर ने ऐसी चुनौतियों से निपटने के लिए आंतरिक एकजुटता और रक्षा तंत्र की मजबूती पर विशेष जोर दिया।
रक्षा मंत्री के कड़े रुख से उपजी असहजता
पाकिस्तानी कमांडर का यह बयान भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की उस स्पष्ट चेतावनी के ठीक बाद सामने आया है, जिसमें उन्होंने सीमा पार आतंकवाद पर बेहद सख्त रुख अपनाया था। रक्षा मंत्री ने गुरुवार को स्पष्ट कहा था कि सीमा पार से यदि कोई भी नई आतंकी घटना घटती है, तो भारत का जवाब पिछली हर कार्रवाई की तुलना में कहीं अधिक व्यापक और आक्रामक होगा। इससे पहले 15 अक्टूबर को भी उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक, बालाकोट हवाई हमले और ऑपरेशन सिंदूर का उदाहरण देते हुए कहा था कि आतंकवाद के खिलाफ भारत की रणनीति बुनियादी रूप से बदल चुकी है। उन्होंने साफ किया था कि भारत शांति का पक्षधर जरूर है, परंतु इस संकल्प को किसी भी तरह से कमजोरी नहीं माना जाना चाहिए।
कूटनीतिक स्तर पर भी जताई गई आपत्ति
सैन्य कमांडर के बयान से महज एक दिन पहले पाकिस्तान के विदेश कार्यालय ने भी भारतीय रक्षा मंत्री की बातों पर औपचारिक प्रतिक्रिया दी थी। विदेश कार्यालय ने राजनाथ सिंह के बयानों को भड़काऊ और वर्चस्ववादी सोच से प्रेरित बताया था। लगातार आ रहे इन बयानों से साफ है कि भारत के बदले हुए रणनीतिक रुख और कड़े संदेशों ने सीमा पार सुरक्षा प्रतिष्ठान को गहरे दबाव में ला खड़ा किया है, जिसके चलते वे बार-बार परमाणु हथियारों की मौजूदगी का तर्क सामने रख रहे हैं।





















