सोमवार को दक्षिण एशिया के दो प्रमुख देशों में बुनियादी जरूरतों और आजीविका के संकट को लेकर व्यापक जनआक्रोश देखने को मिला। पाकिस्तान के सबसे बड़े शहर कराची में रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित करने वाली गंभीर बिजली कटौती और प्राकृतिक गैस की भारी कमी के खिलाफ नागरिक सड़कों पर उतर आए। इसी दौरान बांग्लादेश की राजधानी ढाका और उसके प्रमुख औद्योगिक क्लस्टरों में कपड़ा उद्योग के हजारों श्रमिकों ने न्यूनतम मासिक वेतन में बढ़ोतरी की मांग को लेकर मुख्य राजमार्गों की घेराबंदी कर दी। दोनों ही स्थानों पर आम नागरिकों और कामगारों का यह असंतोष व्यवस्थागत लाचारियों के खिलाफ सीधे प्रतिरोध के रूप में सामने आया है।
कराची में 16 घंटे तक बिजली कटौती और गैस किल्लत पर भारी आक्रोश
पाकिस्तान के बंदरगाह शहर कराची में गहराते ऊर्जा संकट के चलते सत्ताधारी पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी ने नागरिक असंतोष को लेकर एक बड़ा विरोध मार्च निकाला। यह प्रदर्शन रैली ल्यारी गेट से शुरू होकर कराची प्रेस क्लब के बाहर जाकर संपन्न हुई। इस मार्च में भारी तादाद में पार्टी कार्यकर्ताओं, नेताओं, स्थानीय निवासियों और महिलाओं ने हिस्सा लिया। प्रदर्शन में ल्यारी, सदर, बर्न्स रोड, गार्डन तथा इनके आसपास के विभिन्न मोहल्लों के लोग शामिल हुए, जो हफ्तों से चल रही बुनियादी सेवाओं की बदहाली से जूझ रहे हैं।
सड़कों पर उतरे नागरिकों ने बिजली प्रदाता कंपनी के-इलेक्ट्रिक और गैस आपूर्ति करने वाली कंपनी सूई सदर्न गैस कंपनी के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शनकारियों ने साफ शब्दों में चेतावनी दी कि रिहायशी और व्यावसायिक क्षेत्रों में बिजली और गैस की आपूर्ति को बिना किसी रुकावट के तुरंत नियमित किया जाए।
इस रैली का नेतृत्व पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी के साउथ डिस्ट्रिक्ट अध्यक्ष जावेद नागोरी ने किया, जिसमें सांसद सरदार नबील गाबोल भी मुख्य रूप से शामिल हुए। जावेद नागोरी ने सार्वजनिक रूप से आरोप लगाया कि ल्यारी के कई इलाकों में प्रतिदिन 16 घंटे तक की भीषण बिजली कटौती की जा रही है, जिससे लोगों का सामान्य जीवन पूरी तरह पटरी से उतर गया है। वहीं सांसद सरदार नबील गाबोल ने के-इलेक्ट्रिक की कार्यशैली पर सवाल उठाते हुए कहा कि कंपनी के शीर्ष अधिकारियों के साथ राष्ट्रीय और प्रांतीय विधानसभा स्तर पर कई दौर की बैठकें हो चुकी हैं, लेकिन इसके बावजूद धरातल पर सेवाओं में कोई सुधार देखने को नहीं मिला।
ढाका और औद्योगिक पट्टियों में 30,000 टका न्यूनतम वेतन की मांग
दूसरी तरफ, बांग्लादेश में कपड़ा क्षेत्र के श्रमिकों का आर्थिक असंतोष बड़े पैमाने पर सड़कों पर फूट पड़ा। ढाका और उससे सटे औद्योगिक उपनगरों में हजारों कपड़ा कामगारों ने अपने न्यूनतम मासिक वेतन को बढ़ाकर 30,000 टका (लगभग ₹22,916) करने के लिए बड़े पैमाने पर चक्का जाम शुरू कर दिया। बढ़ती महंगाई के दौर में मौजूदा पारिश्रमिक पर गुजारा करने में असमर्थ श्रमिकों ने प्रमुख राजमार्गों की घेराबंदी कर दी, जिससे औद्योगिक आपूर्ति और नागरिक आवागमन पूरी तरह ठप हो गया।
सुबह के समय लगभग 1,000 श्रमिक ढाका-टंगाइल राजमार्ग के पल्ली विद्युत क्षेत्र में जमा हुए और सड़क के दोनों ओर की आवाजाही को पूरी तरह अवरुद्ध कर दिया। गाजीपुर औद्योगिक पुलिस के अधीक्षक मोहम्मद अमजद हुसैन ने इस स्थिति की पुष्टि करते हुए स्पष्ट किया कि इस नाकेबंदी के चलते दोनों दिशाओं में वाहनों का चलना पूरी तरह ठप हो गया। राजमार्गों को खाली कराने के लिए तैनात सुरक्षा बलों और पुलिस ने श्रमिकों को तितर-बितर करने के मकसद से आंसू गैस के गोले छोड़े और वाटर कैनन से पानी की बौछारें कीं।
कारखाने छोड़कर सड़कों पर उतरे मजदूर, ब्लैक लिस्टिंग खत्म करने की मांग
विरोध की यह आग केवल एक इलाके तक सीमित नहीं रही। ढाका के निकट स्थित आशुलिया क्षेत्र में भी कई गारमेंट कारखानों के मजदूर काम का बहिष्कार कर सड़कों पर निकल आए। इन कामगारों ने नबीनगर-चंद्रा राजमार्ग को पूरी तरह जाम करने का प्रयास किया। यहां भी कानून व्यवस्था बनाए रखने के नाम पर पुलिस ने प्रदर्शनकारियों पर आंसू गैस और पानी की तेज बौछारों का सहारा लिया।
प्रदर्शनकारी श्रमिकों का कहना है कि उनकी मांगें सिर्फ वेतन संशोधन तक सीमित नहीं हैं। वे कारखानों द्वारा श्रमिकों की की जाने वाली अनैतिक ब्लैक लिस्टिंग की प्रथा को तुरंत समाप्त करने और कार्यस्थल पर काम के बेहतर माहौल जैसी अन्य मांगों पर भी तत्काल ठोस कार्रवाई चाहते हैं। कामगारों का सीधा तर्क है कि आवश्यक वस्तुओं के आसमान छूते दामों के बीच वर्तमान पगार में परिवार पालना पूरी तरह नामुमकिन हो चुका है।
हिंसा, आगजनी और सुरक्षा बलों द्वारा धरपकड़
यह औद्योगिक अशांति सोमवार से पहले ही सुलग रही थी। रविवार के दिन भी गाजीपुर क्षेत्र में वेतन वृद्धि की मांग को लेकर ढाका-टंगाइल राजमार्ग पर हुए प्रदर्शनों ने उग्र रूप ले लिया था। कोनाबाड़ी इलाके में स्थिति इतनी बिगड़ गई थी कि वहां मौजूद एक पुलिस बॉक्स में आग लगा दी गई। कई घंटों तक पुलिस बल और प्रदर्शनकारी श्रमिकों के बीच हिंसक टकराव और झड़पें चलती रहीं।
हिंसा, सार्वजनिक संपत्ति में तोड़फोड़ और आगजनी की घटनाओं के बाद पुलिस ने बड़े पैमाने पर धरपकड़ अभियान शुरू किया। सुरक्षा बलों ने कार्रवाई करते हुए मीरपुर से 29 लोगों को और गाजीपुर औद्योगिक क्षेत्र से 20 लोगों को गिरफ्तार किया है।
मानवाधिकार संस्था ने की पुलिसिया कार्रवाई की निंदा
श्रमिकों पर पुलिस की इस सख्त कार्रवाई पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी प्रतिक्रिया सामने आई है। फ्रांस में स्थित मानवाधिकार संस्था ‘जस्टिस मेकर्स बांग्लादेश इन फ्रांस’ ने कामगारों, विशेषकर महिलाओं और छात्रों के खिलाफ इस्तेमाल किए गए बल और सामूहिक गिरफ्तारियों की कड़ी निंदा की है। संस्था ने हिरासत में लिए गए सभी मजदूरों और श्रमिक नेताओं की शारीरिक सुरक्षा सुनिश्चित करने तथा पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच कराने की मांग रखी है।
संगठन के संस्थापक अध्यक्ष शाहानुर इस्लाम ने इस संबंध में बयान जारी कर कहा कि अत्यधिक महंगाई के दबाव में मजदूर केवल अपने जीवन यापन के लिए वाजिब वेतन की मांग कर रहे हैं, ऐसे में प्रशासन द्वारा संवाद स्थापित करने के बजाय दमनकारी बल प्रयोग और धरपकड़ का रास्ता चुनना बेहद चिंताजनक है।



















