दक्षिण वजीरिस्तान के सीमावर्ती अंगूर अड्डा क्षेत्र में सुरक्षा हालात एक बार फिर बिगड़ गए हैं, जहां अफगान तालिबान की चौकियों से की गई गोलाबारी के जवाब में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने जोरदार सैन्य कार्रवाई की है. इलाके के डिप्टी कमिश्नर ने रविवार को घटनाक्रम की जानकारी देते हुए स्पष्ट किया कि सीमा पार से पाकिस्तानी चौकियों को निशाना बनाकर लगातार फायरिंग की गई थी, जिसके बाद सुरक्षा बलों ने मोर्चा संभालते हुए जवाबी कार्रवाई की. इस ताजा टकराव के बीच अफगानिस्तान के भीतर सक्रिय विद्रोही संगठन अफगानिस्तान यूनाइटेड फ्रंट ने भी एक हफ्ते के भीतर तालिबान ठिकानों पर दर्जनों हमलों का दावा कर आंतरिक सुरक्षा संकट को और गहरा कर दिया है. वहीं दूसरी तरफ, तालिबान के मुख्य प्रवक्ता ने गतिरोध पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है कि काबुल शांतिपूर्ण संवाद के पक्ष में है लेकिन इस्लामाबाद की मौजूदा नीतियों के चलते सीमा पर तनाव कम नहीं हो पा रहा है.
अंगूर अड्डा में सैन्य चौकियों और रक्षा ठिकानों पर जवाबी कार्रवाई
सीमा पर भड़की इस ताजा झड़प का ब्योरा साझा करते हुए दक्षिण वजीरिस्तान के डिप्टी कमिश्नर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर बताया कि अफगान सीमा चौकियों से पाकिस्तानी सुरक्षा चौकियों पर बिना किसी उकसावे के निरंतर फायरिंग की गई थी. इस हमले के तुरंत बाद पाकिस्तानी बलों ने आक्रामक जवाबी कार्रवाई शुरू की, जिसमें अफगानिस्तान के कई सीमावर्ती बंकरों, तोपखाने और मोर्टार पोजिशनों सहित अहम रक्षा ठिकानों को भारी हथियारों से निशाना बनाया गया. स्थानीय प्रशासन के अनुसार, इस गोलाबारी में पाकिस्तानी सीमा क्षेत्र के भीतर किसी भी सुरक्षाकर्मी या नागरिक के हताहत होने की खबर नहीं है. इस पूरे सैन्य घटनाक्रम को लेकर अफगानिस्तान की तालिबान सरकार की ओर से अभी तक कोई विस्तृत या औपचारिक आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है, जिससे दोनों पक्षों को पहुंचे वास्तविक नुकसान और सीमा पार की जमीनी स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है.
नागरिक बस्तियों और बाजार पर पहले भी हुआ था हमला
अंगूर अड्डा सेक्टर में हुआ यह ताजा सैन्य टकराव 27 अक्टूबर की रात हुई गंभीर गोलाबारी की कड़ी के रूप में देखा जा रहा है. सुरक्षा अधिकारियों के मुताबिक, उस रात अफगान सीमा की दिशा से रिहायशी बस्तियों और व्यस्त अंगूर अड्डा बाजार को सीधा निशाना बनाया गया था. उस हमले में दागा गया एक मोर्टार शेल नागरिक आवास पर गिरा था, जिसके चलते एक स्थानीय नागरिक की जान चली गई थी और पांच अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हो गए थे. गोलाबारी के कारण मुख्य बाजार की कई दुकानें क्षतिग्रस्त हो गई थीं और नागरिक संपत्ति को भारी नुकसान हुआ था. इस घटना के बाद पाकिस्तानी सेना ने बड़े पैमाने पर जवाबी ऑपरेशन चलाया था, जिसमें पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने आधिकारिक रूप से दावा किया था कि कार्रवाई के दौरान अफगान तालिबान की सात प्रमुख सीमा चौकियों को पूरी तरह नष्ट कर दिया गया था.
अफगानिस्तान यूनाइटेड फ्रंट के 16 हमलों से तालिबान को झटका
सीमाई तनाव के बीच अफगानिस्तान के आंतरिक इलाकों में भी तालिबान की मुश्किलें लगातार बढ़ रही हैं. तालिबान विरोधी सशस्त्र गुट अफगानिस्तान यूनाइटेड फ्रंट ने दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने 22 अक्टूबर से 29 अक्टूबर के बीच देश के आठ अलग-अलग प्रांतों में कुल 16 सुनियोजित सैन्य हमले किए हैं. पूर्व सैन्य कमांडर सामी सादात के नेतृत्व में संचालित इस संगठन का कहना है कि इन रणनीतिक अभियानों में तालिबान के 18 लड़ाके मारे गए हैं, जबकि नौ अन्य गंभीर रूप से घायल हुए हैं. संगठन द्वारा जारी बयानों के अनुसार, ये हमले कंधार, कपिसा, हेलमंद, घोर, जाबुल, बदख्शां, गजनी और परवान प्रांतों में फैले तालिबान ठिकानों पर किए गए.
संगठन के अनुसार, हमलों की यह श्रृंखला 22 अक्टूबर को शुरू हुई थी, जब हेलमंद के प्रांतीय केंद्र लश्कर गाह और कपिसा के हेसा अव्वल कोहिस्तान इलाके में घात लगाकर हमले किए गए. इसके अगले दिन यानी 23 अक्टूबर को कंधार के दमन जिले में तालिबान के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को निशाना बनाया गया. संगठन ने 26 अक्टूबर को एक बड़ा अभियान चलाते हुए छह प्रांतों में एक साथ सात रणनीतिक हमले करने का दावा किया, जिनमें घोर, जाबुल, गजनी, परवान, बदख्शां और कंधार शामिल थे. इन सभी स्थानों पर तालिबान के कई सदस्यों के हताहत होने की बात कही गई. इसके बाद 29 अक्टूबर को कंधार के अरघिस्तान और स्पिन बोल्डक जिलों में दो और सैन्य कार्रवाई की गईं. हालांकि, अफगानिस्तान के सुदूर क्षेत्रों में जारी इन संघर्षों और हताहतों की कुल संख्या की किसी स्वतंत्र निकाय द्वारा पुष्टि नहीं की जा सकी है.
राजनयिक गतिरोध और मध्यस्थता के प्रयासों पर तालिबान का बयान
बढ़ते सीमाई और आंतरिक सैन्य तनाव के बीच तालिबान के मुख्य प्रवक्ता जबीहुल्लाह मुजाहिद ने शनिवार, 31 अक्टूबर को पाकिस्तान के साथ संबंधों को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट की. हुर्रियत रेडियो से बातचीत के दौरान उन्होंने कहा कि काबुल प्रशासन ने हमेशा दोनों देशों के बीच उपजे विवादों को कूटनीतिक बातचीत के जरिए सुलझाने की ईमानदार कोशिशें की हैं, लेकिन इस्लामाबाद के अड़ियल रवैये के कारण अब तक कोई ठोस सफलता नहीं मिल सकी है. मुजाहिद ने यह खुलासा भी किया कि दोनों पड़ोसी देशों के बीच संवाद स्थापित कराने के लिए कई तीसरे देश मध्यस्थता की भूमिका निभा रहे हैं और उनके जरिए संदेशों का आदान-प्रदान जारी है. हालांकि, प्रवक्ता ने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे देशों के नामों का खुलासा करने या राजनयिक बातचीत के सटीक मसौदे का ब्योरा देने से परहेज किया.



















