हिमंत बिस्वा सरमा ने डिब्रूगढ़ और तिनसुकिया में जनजातीय भूमि अधिकारों की समीक्षा की, कई विकास योजनाओं की शुरुआतम्यांमार सीमा तक दौड़ेगी ट्रेन: मिजोरम में 230 किलोमीटर लंबे रेल कॉरिडोर पर सीएम लालदुहोमा ने की समीक्षा बैठकहरिद्वार में गरजे बाबा रामदेव: देवी-देवताओं पर अभद्र टिप्पणियों का दिया करारा जवाब, 104वें अधिवेशन में तथ्यात्मक पोल खोलने का ऐलानराजस्थान के खैरथल-तिजारा में साइबर ठगी की जांच के दौरान बड़ा हादसा, पुलिस की मौजूदगी में युवक ने लगाया फंदाउत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव 2026: भाजपा ने बनाई बढ़त, सपा ने दी कड़ी टक्कर; सीएम योगी आदित्यनाथ ने दी बधाईपश्चिम बंगाल के दुर्गापुर में बच्ची से प्रताड़ना के आरोप में 74 साल का बुजुर्ग गिरफ्तारहरिद्वार के घाटों पर गंगनहर बंदी से जल संकट, अंग्रेजों के साथ बने 1916 के समझौते का नहीं हो रहा पालनपारे की सतह पर सोना बनाने का दावा, राजस्थान के वैज्ञानिक लाल बहादुर के प्रयोग की शुरू हुई वैज्ञानिक जांचएनसीपी में आंतरिक कलह: जीशान सिद्दीकी और उमेश पाटिल की नियुक्तियों पर उठे गंभीर सवालमध्य प्रदेश में शहरी विकास का नया खाका: 2047 तक 20 लाख नौकरियों और 15 नई टाउनशिप का लक्ष्य, अर्बन ग्रोथ कॉन्क्लेव में कई बड़े समझौते
फारूक मोहम्मद हसनी की क्वेटा में गोली मारकर हत्या, बलोच लिबरेशन आर्मी ने ली हमले की जिम्मेदारीपाकिस्तान
12 अग॰ 2026, 11:02 pm (77 दिन पहले)· 2

फारूक मोहम्मद हसनी की क्वेटा में गोली मारकर हत्या, बलोच लिबरेशन आर्मी ने ली हमले की जिम्मेदारी

बलूचिस्तान के क्वेटा में 10 अगस्त की शाम पाकिस्तानी सेना के कथित मुखबिर फारूक मोहम्मद हसनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई, जिसकी जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी ने ली है।

बलूचिस्तान के क्वेटा शहर स्थित सरियाब मिल क्षेत्र में 10 अगस्त की शाम लगभग 7 बजे अज्ञात हमलावरों ने फारूक मोहम्मद हसनी नामक व्यक्ति की गोली मारकर हत्या कर दी। इस लक्षित हत्या की जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है। संगठन ने दावा किया है कि फारूक हसनी पाकिस्तानी सेना तथा उसकी खुफिया एजेंसियों के लिए गुप्त सूचनाएं जुटाने का काम कर रहा था और क्षेत्र में सक्रिय एक सैन्य समर्थित डेथ स्क्वाड का मुख्य सदस्य था।

ऑपरेशन गोबत के तहत निगरानी और लक्षित हमला

बलोच लिबरेशन आर्मी ने इस घातक हमले को अपने विशेष रणनीतिक अभियान 'ऑपरेशन गोबत' का हिस्सा करार दिया है। संगठन की खुफिया इकाई काफी समय से फारूक हसनी की गतिविधियों, संपर्कों और आवाजाही पर कड़ी नजर रख रही थी। जब हसनी मंगुचर क्षेत्र से यात्रा कर क्वेटा पहुंचा, तब पहले से घात लगाए लड़ाकों ने सटीक समय पर कार्रवाई करते हुए उसे मार गिराया। बीएलए के प्रवक्ता आजाद बलोच के अनुसार, हसनी वर्ष 2015-2016 से ही मंगुचर, गेश्क, कलात, जोहान और नगाहो जैसे संवेदनशील इलाकों में बलोच स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ सैन्य अभियानों में सक्रिय भूमिका निभा रहा था।

ये भी पढ़ें

डेथ स्क्वाड संचालन और सरकारी सहायता के आरोप

प्रवक्ता आजाद बलोच ने बयान में आरोप लगाया कि हसनी ने पाकिस्तानी सैन्य बलों और खुफिया तंत्र के साथ मिलकर आम बलोच आबादी पर छापों और धरपकड़ अभियानों में सीधा सहयोग दिया था। बीएलए का दावा है कि हसनी बलोच कार्यकर्ताओं के जबरन अपहरण और हत्या की घटनाओं में शामिल रहा था। इन अभियानों में सहायता प्रदान करने के बदले में उसे सेना और खुफिया एजेंसियों द्वारा हथियार, वाहन तथा अन्य जरूरी लॉजिस्टिक मदद दी जाती थी। संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि बलोच स्वतंत्रता आंदोलन के विरुद्ध काम करने वाले सभी मुखबिर और डेथ स्क्वाड सदस्य उनके निशाने पर रहेंगे तथा आजादी का सशस्त्र संघर्ष लगातार जारी रहेगा।

बलूचिस्तान में मानवाधिकार संकट और दमनकारी नीतियां

फारूक हसनी की हत्या बलूचिस्तान में पिछले कई दशकों से जारी हिंसा, राजनीतिक दमन और गंभीर मानवाधिकार संकट को उजागर करती है। अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, पाकिस्तानी सुरक्षा बलों और खुफिया एजेंसियों द्वारा बलोच समाज के राजनीतिक कार्यकर्ताओं, छात्रों, पत्रकारों और आम नागरिकों का 'जबरन गायब किया जाना' एक आम प्रक्रिया बन चुकी है। राज्य तंत्र पर लोगों को गैर-कानूनी हिरासत में रखकर अमानवीय प्रताड़ना देने और फर्जी मुठभेड़ों में मार गिराने के गंभीर आरोप लगातार लगते रहे हैं।

इसके अलावा, बलूचिस्तान के प्रचुर प्राकृतिक संसाधनों और खनिज संपदा के दोहन के साथ-साथ स्थानीय आबादी को उनके बुनियादी राजनीतिक अधिकारों से वंचित रखे जाने के कारण क्षेत्र में गहरा असंतोष है। इसी राज्य-प्रायोजित अत्याचारों, मानवाधिकार हनन और प्राकृतिक संसाधनों की लूट के जवाब में बलोच लिबरेशन आर्मी जैसे सशस्त्र उग्रवादी संगठन उभरे हैं, जो बलूचिस्तान की पूर्ण स्वतंत्रता की मांग को लेकर पाकिस्तान सरकार के खिलाफ लड़ाई लड़ रहे हैं।

सवाल-जवाब

क्वेटा में 10 अगस्त को किसकी हत्या हुई?
क्वेटा के सरियाब मिल इलाके में फारूक मोहम्मद हसनी की गोली मारकर हत्या कर दी गई।
इस हत्या की जिम्मेदारी किस संगठन ने ली है?
इस हत्या की जिम्मेदारी बलोच लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने ली है।
फारूक हसनी पर क्या आरोप लगाए गए थे?
बीएलए का आरोप था कि हसनी पाकिस्तानी सेना और खुफिया एजेंसियों के लिए मुखबिर का काम करता था और डेथ स्क्वाड में शामिल था।
'ऑपरेशन गोबत' क्या है?
'ऑपरेशन गोबत' बलोच लिबरेशन आर्मी का एक अभियान है, जिसके तहत उनकी खुफिया इकाई ने हसनी की निगरानी कर क्वेटा में उसे मार गिराया।
फारूक हसनी किन इलाकों में सक्रिय था?
हसनी 2015-2016 से मंगुचर, गेश्क, कलात, जोहान और नगाहो जैसे इलाकों में बलोच सेनानियों के खिलाफ अभियानों में कथित तौर पर सक्रिय था।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp