अक्सर घरों में जब माता-पिता बच्चों को मेहमानों के सामने अभिवादन करने के लिए कहते हैं, तो कई बार बच्चे इस बात से कतराते हैं। जब घर में कोई नया व्यक्ति आता है, तो बड़ों की यह अपेक्षा होती है कि बच्चे उन्हें हाथ जोड़कर नमस्कार या प्रणाम करें। लेकिन कई बार स्थिति इसके विपरीत होती है और बच्चा या तो अपनी जिद पर अड़ जाता है या मुंह फेरकर चुपचाप अपने कमरे में चला जाता है। ऐसे पलों में अभिभावकों को रिश्तेदारों के सामने काफी शर्मिंदगी महसूस होने लगती है और वे खुद को असहज स्थिति में पाते हैं।
यदि आपका बेटा या बेटी भी मेहमानों को देखकर नमस्ते नहीं करता है और उनकी उपेक्षा कर देता है, तो इस बात पर घबराने या बच्चे पर तुरंत चिल्लाने की कोई आवश्यकता नहीं है। बाल विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि यह एक बेहद सामान्य व्यवहार है। इसके पीछे बच्चे का शर्मीला स्वभाव, आंतरिक झिझक या फिर सोशल एंग्जायटी जैसी वजहें हो सकती हैं। ऐसी परिस्थितियों से निपटने और बच्चों को बिना किसी दबाव के अच्छे संस्कार सिखाने के लिए कुछ खास रणनीतियां अपनाई जा सकती हैं।
सार्वजनिक रूप से दबाव बनाने से बचें
जब कोई बच्चा किसी मेहमान के सामने हाथ जोड़ने या नमस्ते करने से इनकार करे, तो सबके सामने उसे बिल्कुल न डांटें और न ही उस पर किसी प्रकार का दबाव डालें। यदि आप बल प्रयोग करेंगे, तो बच्चे के मन में सामाजिक आयोजनों और रिश्तेदारों के प्रति डर या चिड़चिड़ापन और अधिक बढ़ जाएगा। यदि वह उस खास पल में अभिवादन नहीं करना चाहता है, तो स्थिति को संभालते हुए खुद मुस्कुराकर बात को आगे बढ़ाएं।
अभिवादन के दूसरे विकल्प मुहैया कराएं
हर बच्चा बोलकर या हाथ जोड़कर अभिवादन करने में सहज महसूस करे, यह जरूरी नहीं है। ऐसे में आप बच्चे को दूसरे छोटे विकल्प दे सकते हैं, जैसे कि यदि वह नमस्ते नहीं कहना चाहता तो क्या वह आंटी को देखकर मुस्कुरा सकता है, हाय-फाइव कर सकता है या हाथ हिलाकर बाय कर सकता है। इस तरह के विकल्पों से बच्चों को अपनी सहजता के अनुसार बात रखने की आजादी मिलती है और वे किसी भी प्रकार के मानसिक दबाव से दूर रहते हैं।
खुद बेहतर उदाहरण बनकर दिखाएं
बच्चे हमेशा वही बातें सीखते हैं जो वे अपने आसपास होते देखते हैं। जब भी घर पर कोई मेहमान आए या आप परिवार के साथ बाहर जाएं, तो बच्चे की मौजूदगी में खुद लोगों का गर्मजोशी से स्वागत करें। जब आपका बेटा या बेटी आपको लगातार ऐसा करते हुए देखेंगे, तो वे बिना किसी जोर-जबरदस्ती के इस अच्छी आदत को अपने दैनिक जीवन में स्वतः ही अपना लेंगे।
मेहमानों के जाने के बाद करें संवाद
जब रिश्तेदार अपने घर वापस चले जाएं, तो एक शांत और अनुकूल माहौल में अपने बच्चे से इस विषय पर इत्मीनान से चर्चा करें। उससे बहुत प्यार से पूछें कि आखिर उसे किसी से मिलने या बात करने में किस तरह की परेशानी महसूस होती है। यह भी जानने का प्रयास करें कि क्या वह शर्मीलापन महसूस कर रहा था या किसी बात की वजह से असहज था। बच्चे की भावनाओं को समझें और उसे यह बात प्यार से समझाएं कि बड़ों का अभिवादन करना अपनों के प्रति स्नेह और आदर दिखाने का एक माध्यम है।
बच्चे को पहले से मानसिक रूप से तैयार करें
किसी भी रिश्तेदार के घर जाने से पहले या अपने घर पर मेहमानों के आने से पहले बच्चे को इस बारे में पहले ही थोड़ा संकेत दे दें। उसे बताएं कि आज हमारे घर पर मेहमान आने वाले हैं और आप उनसे मिलकर कैसा महसूस करेंगे। जब बच्चे को इस बात की जानकारी पहले से होती है कि कौन आ रहा है, तो उसकी हिचकिचाहट और संकोच काफी हद तक कम हो जाता है।
माता-पिता को इस बात का हमेशा ध्यान रखना चाहिए कि बच्चे का रिश्तेदारों को नजरअंदाज करना हमेशा कोई बदतमीजी नहीं होती है। कई बार यह उसकी पर्सनल स्पेस की आवश्यकता या किसी अनजान चेहरे को देखकर उपजी झिझक होती है। थोड़ा सा धैर्य रखकर, सही मार्गदर्शन प्रदान करके और प्यार के सहारे आप अपने बच्चे के मन के इस संकोच को बहुत आसानी से दूर कर सकते हैं।



















