बच्चों की थाली में मछली शामिल करने की सोच रहे कई मां-बाप के मन में सबसे पहला डर यही रहता है कि कहीं खाते वक्त गला कांटे से ना छिल जाए. प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन डी जैसे पोषक तत्वों से भरपूर मछली बच्चों की ग्रोथ के लिए बेहद फायदेमंद मानी जाती है, लेकिन कांटों का डर अक्सर पैरेंट्स को इससे दूर रखता है. चिकन और मटन बच्चे आराम से खा लेते हैं, मगर मछली परोसते समय हाथ थोड़ा रुक जाता है. राहत की बात यह है कि कुछ खास वैरायटी की मछलियां ऐसी होती हैं, जिनमें कांटे बेहद कम होते हैं या आसानी से निकाले जा सकते हैं, जिससे बच्चों को खिलाना सुरक्षित और आसान हो जाता है.
कौन सी मछलियां हैं बच्चों के लिए सुरक्षित
यहां एक बात साफ समझ लेनी चाहिए कि किसी भी मछली को शत-प्रतिशत कांटा-रहित नहीं कहा जा सकता. दरअसल इन मछलियों को अक्सर बोनलेस फिलेट के तौर पर बेचा जाता है या इनमें मौजूद कांटे इतने कम और ढीले होते हैं कि आसानी से हटाए जा सकते हैं. इसलिए बच्चों को परोसने से ठीक पहले हर बार बारीकी से जांच लेना जरूरी है, फिर चाहे मछली धोते वक्त हो, पकाते वक्त हो या आखिर में प्लेट में परोसते वक्त. दुनिया की कोई भी मछली ऐसी नहीं जिसमें कांटे बिल्कुल भी न हों, बस मात्रा और आकार का फर्क होता है.
सैल्मन को ओमेगा-3 फैटी एसिड का बेहतरीन स्रोत माना जाता है और बाजार में इसका बोनलेस फिलेट बड़ी आसानी से मिल जाता है, जिससे इसे छोटे बच्चों को खिलाना काफी सुविधाजनक हो जाता है. यह दिमाग के विकास, आंखों की सेहत और शरीर की ग्रोथ में सहायक मानी जाती है.
बासा मछली का स्वाद हल्का और मांस मुलायम होता है. यह भी अक्सर बोनलेस फिलेट के रूप में ही बाजार में उपलब्ध रहती है, इसलिए छोटे बच्चों के लिए इसे परोसना आसान रहता है. बस इसे हमेशा किसी भरोसेमंद दुकान या ब्रांड से ही खरीदना चाहिए.
तिलापिया भी कम कांटों वाली मछलियों में गिनी जाती है और इसका फिलेट बच्चों को बिना ज्यादा मशक्कत के परोसा जा सकता है. इसमें प्रोटीन की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो मांसपेशियों और शरीर के विकास में मदद करती है.
कॉड मछली का मांस सफेद और नरम होता है, जिसका स्वाद बच्चों को जल्दी पसंद आ जाता है. इसका बोनलेस फिलेट भी आसानी से मिल जाता है और इसमें प्रोटीन के साथ-साथ विटामिन B12 और सेलेनियम जैसे पोषक तत्व भी मौजूद रहते हैं.
सोल फिश का मांस बेहद नरम होता है और इसके फिलेट में कांटे न के बराबर होते हैं. हल्के स्वाद की वजह से यह छोटे बच्चों को खिलाने के लिए एक अच्छा विकल्प बन सकती है.
दिमाग तेज करने में कैसे मदद करती है मछली
मछली में पाया जाने वाला ओमेगा-3 फैटी एसिड यानी DHA और EPA बच्चों के दिमाग और आंखों के विकास में अहम भूमिका निभाता है. इसके अलावा मछली हाई क्वालिटी प्रोटीन, विटामिन डी, आयोडीन और कई दूसरे जरूरी पोषक तत्वों का भी बढ़िया स्रोत मानी जाती है. सही मात्रा में मछली खाने से बच्चों की हड्डियां मजबूत होती हैं, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और संपूर्ण शारीरिक विकास को सहारा मिलता है. साथ ही पर्याप्त पोषण मिलने पर सीखने और चीजों को याद रखने की क्षमता भी बेहतर होती जाती है.
बच्चों को मछली खिलाते वक्त इन बातों का रखें ध्यान
- मछली परोसने से पहले हर बार ध्यान से देख लें कि उसमें कोई छोटा कांटा तो नहीं बचा, क्योंकि बोनलेस फिलेट में भी कभी-कभी पतले पिन बोन रह जाते हैं.
- मछली को हमेशा अच्छी तरह पकाकर ही बच्चों को दें.
- पहली बार मछली खिलाते समय बेहद कम मात्रा से शुरुआत करें और एलर्जी के किसी भी लक्षण पर नजर बनाए रखें.
- हमेशा ताजी और भरोसेमंद जगह से खरीदी गई मछली ही बच्चों को खिलाएं.
- बहुत छोटे बच्चों को मछली के बड़े टुकड़े देने से बचें, बल्कि छोटे-छोटे हिस्सों में खिलाएं ताकि निगलने में दिक्कत न हो.
- अगर बच्चे को पहले से किसी चीज से एलर्जी है या कोई खास स्वास्थ्य समस्या है, तो मछली खिलाने से पहले बाल रोग विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें.





















