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बच्चों की हर मांग पूरी करना पड़ सकता है भारी, ये चार नुकसान जान लें हर माता-पितापेरेंटिंग
21 जून 2026, 9:47 pm (45 दिन पहले)· 7

बच्चों की हर मांग पूरी करना पड़ सकता है भारी, ये चार नुकसान जान लें हर माता-पिता

पेरेंटिंग विशेषज्ञों के अनुसार बच्चे की हर जिद मानते रहने से उसके स्वभाव और भविष्य पर गंभीर नकारात्मक असर पड़ सकता है। प्यार के साथ अनुशासन और सीमाएं तय करना ही असली अच्छी पेरेंटिंग की पहचान है।

माता-पिता का दिल हमेशा यही चाहता है कि बच्चा खुश रहे, उसे कोई तकलीफ न हो। इसी सोच के चलते जब बच्चा नया खिलौना मांगे, मोबाइल फोन की जिद करे, पसंदीदा कपड़े चाहिए हों या बाहर खाने की फरमाइश आए, तो अधिकतर माता-पिता बिना सोचे तुरंत हां कह देते हैं। उन्हें लगता है कि यही प्यार है।

लेकिन पेरेंटिंग विशेषज्ञ इससे अलग राय रखते हैं। उनका मानना है कि बच्चे की हर इच्छा पूरी करते रहना उसके व्यक्तित्व और भविष्य के लिए हमेशा अच्छा नहीं होता। अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो इन चार बड़े नुकसानों के बारे में जरूर जान लीजिए।

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इंतजार करना नहीं सीख पाता बच्चा

जब बच्चे को हर चीज तुरंत और बिना किसी इंतजार के मिल जाती है, तो वह रुकना नहीं सीख पाता। उसके मन में यह धारणा पक्की हो जाती है कि जो मांगो, वह अभी और इसी वक्त मिलनी चाहिए। लेकिन जीवन में अक्सर हालात हमारी इच्छाओं के हिसाब से नहीं चलते। ऐसे में जो बच्चे धैर्य रखना नहीं सीखते, वे बड़े होकर छोटी-छोटी परेशानियों पर भी गुस्सैल और बेचैन हो सकते हैं। जीवन में आगे बढ़ने के लिए इंतजार करने की आदत बेहद जरूरी है।

मेहनत और जिम्मेदारी की अहमियत नहीं समझते ऐसे बच्चे

बिना किसी प्रयास के जब हर चीज आसानी से हाथ में आ जाए, तो बच्चे को यह एहसास नहीं होता कि किसी लक्ष्य को पाने के लिए कोशिश और जिम्मेदारी उठानी पड़ती है। ऐसे बच्चे अपने काम को गंभीरता से नहीं लेते और छोटी-छोटी जिम्मेदारियों से भी पीछे हटने की कोशिश करते हैं। धीरे-धीरे उनमें आत्मनिर्भर बनने की क्षमता कमजोर पड़ने लगती है, जो आगे चलकर उनके लिए मुश्किलें खड़ी कर सकती है।

दूसरों की भावनाएं समझना हो जाता है मुश्किल

जब बच्चे की हर जिद पूरी होती रहे, तो वह यह मानने लगता है कि उसकी इच्छाएं और जरूरतें ही सबसे ऊपर हैं। इसका सीधा नतीजा यह होता है कि वह दूसरों की भावनाओं और जरूरतों को समझना नहीं सीख पाता। ऐसे बच्चों में अक्सर जिद्दीपन और स्वार्थी रवैया देखने को मिलता है। वे हर परिस्थिति में अपनी सुविधा खोजते हैं और दूसरों के साथ समझौता करने में कठिनाई महसूस करते हैं।

मिली हुई चीजों की कद्र नहीं रहती

जो चीज बिना मेहनत के मिल जाए, उसकी असली कीमत शायद ही समझ में आए। जब बच्चे को हर मांग पर नई-नई चीजें मिलती रहती हैं, तो वह उनका महत्व नहीं समझ पाता। इससे उसमें संतोष की भावना धीरे-धीरे कम होती जाती है और वह हमेशा कुछ न कुछ नया पाने की चाहत में लगा रहता है, जो कभी खत्म नहीं होती।

तो फिर कैसी होनी चाहिए सही पेरेंटिंग?

विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चे को खुश रखने का मतलब हर बात पर हां कह देना नहीं है। बच्चे को सही और गलत की समझ देना, कभी-कभी इंतजार करवाना, मेहनत करने की आदत डालना और जिम्मेदारियां उठाना सिखाना, यही उसके बेहतर भविष्य की असली बुनियाद है। प्यार के साथ अनुशासन और स्पष्ट सीमाएं तय करना ही अच्छी पेरेंटिंग की असली पहचान है।

सवाल-जवाब

क्या बच्चों की हर जिद पूरी करना सही है?
नहीं, पेरेंटिंग विशेषज्ञों के अनुसार हर जिद मानते रहने से बच्चे के स्वभाव और भविष्य पर नकारात्मक असर पड़ सकता है।
बच्चे की हर मांग पूरी करने से कौन-कौन से नुकसान होते हैं?
इससे बच्चे में धैर्य की कमी, मेहनत की कद्र न करना, दूसरों की भावनाएं न समझना और मिली चीजों की अहमियत न जानना जैसी समस्याएं आ सकती हैं।
बच्चे में धैर्य रखने की आदत कैसे विकसित होती है?
जब बच्चे को कभी-कभी इंतजार करवाया जाए और हर मांग तुरंत पूरी न की जाए, तो वह धीरे-धीरे धैर्य रखना सीखता है।
अच्छी पेरेंटिंग कैसे की जाए?
विशेषज्ञों के अनुसार प्यार के साथ-साथ अनुशासन और सीमाएं तय करना, बच्चे को मेहनत और जिम्मेदारी का महत्व सिखाना ही असली अच्छी पेरेंटिंग है।
बच्चों में स्वार्थी व्यवहार क्यों आता है?
जब बच्चे की हर जिद पूरी होती रहती है तो वह यह मान लेता है कि उसकी इच्छाएं ही सबसे जरूरी हैं, जिससे वह दूसरों की भावनाओं को समझना नहीं सीख पाता।
क्या बच्चे को कभी 'ना' कहना उसके लिए नुकसानदेह है?
नहीं, बल्कि कभी-कभी 'ना' कहना बच्चे के दीर्घकालिक विकास के लिए फायदेमंद है क्योंकि इससे वह इंतजार करना और जिम्मेदारी उठाना सीखता है।
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