कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने वर्ष 2029 के लोकसभा चुनावों के लिए अपनी रणनीतिक तैयारियों को अभी से धरातल पर उतारना शुरू कर दिया है। इस व्यापक बदलाव के पीछे पार्टी के संगठनात्मक ढांचे को बुनियादी स्तर से मजबूत करने और उसमें जवाबदेही की एक नई संस्कृति स्थापित करने का बड़ा विज़न काम कर रहा है। नई दिल्ली में राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और AICC के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल के बीच गहन बैठकों का दौर चला है। इन उच्च स्तरीय चर्चाओं का मुख्य फोकस पूरे सांगठनिक सिस्टम को दुरुस्त करना है, ताकि आगामी आम चुनावों में पार्टी एक सशक्त और व्यवहार्य राष्ट्रीय विकल्प के रूप में देश के सामने आ सके।
सचिवों की नियुक्ति और राज्यों में कड़ा स्क्रीनिंग पैमाना
इस बड़े सांगठनिक सुधार का पहला चरण ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (AICC) में नए सचिवों की नियुक्ति से जुड़ा हुआ है। पार्टी के ये सचिव सीधे तौर पर राज्यों के जमीनी कामकाज और केंद्रीय आलाकमान के बीच संपर्क सूत्र का काम करते हैं। इसी महत्व को देखते हुए लगभग 65 से अधिक खाली पड़े सचिव पदों के लिए उम्मीदवारों की बेहद बारीकी और कड़े पैमानों पर स्क्रीनिंग की जा रही है। पार्टी नेतृत्व का मुख्य ध्यान उन राज्यों पर केंद्रित है, जहां कांग्रेस का सांगठनिक ढांचा लंबे समय से कमजोर या सुस्त रहा है। ये नवनियुक्त सचिव दैनिक प्रगति रिपोर्ट प्रदान करने और यह सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार होंगे कि स्थानीय शिकायतों को बिना किसी प्रशासनिक देरी के सीधे आलाकमान तक पहुंचाया जाए।
विशेष रूप से उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश, ओडिशा और महाराष्ट्र जैसे राजनीतिक रूप से बड़े और महत्वपूर्ण राज्यों को इस योजना में प्राथमिकता सूची में सबसे ऊपर रखा गया है। नेतृत्व का मानना है कि वर्ष 2029 की चुनावी जंग में मजबूत दावेदारी पेश करने के लिए इन बड़े राज्यों में पार्टी का प्रदर्शन सुधारना बेहद जरूरी है। इसके लिए उम्मीदवारों की जमीन पर काम करने की व्यावहारिक क्षमता और Gen Z यानी नए जमाने के युवा वोटर्स के साथ सीधे जुड़ने की उनकी योग्यता को परखा जा रहा है, ताकि संगठन को युवा और ऊर्जावान बनाया जा सके।
रणनीतिक कमान संभालेंगी प्रियंका गांधी वाड्रा
इन सांगठनिक बदलावों के साथ-साथ इस मंथन प्रक्रिया से प्रियंका गांधी वाड्रा के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और स्पष्ट भूमिका भी सामने आई है। कांग्रेस के भीतर पिछले काफी समय से उन्हें सक्रिय सांगठनिक जिम्मेदारी सौंपने की मांग उठती रही है। इसी को ध्यान में रखते हुए अब वर्ष 2029 के आम चुनावों के लिए एक विशेष 'इलेक्शन मैनेजमेंट स्ट्रैटेजी ग्रुप' (चुनाव प्रबंधन रणनीति समूह) बनाने का खाका तैयार किया गया है। जानकारी के अनुसार, प्रियंका गांधी वाड्रा इस प्रस्तावित ग्रुप का नेतृत्व करेंगी।
इस नए रणनीतिक समूह में मुकुल वासनिक और अशोक गहलोत जैसे पार्टी के पुराने और अनुभवी रणनीतिकारों के साथ-साथ नए और युवा चेहरों को भी शामिल किया जाएगा। जहां राहुल गांधी पार्टी के मुख्य सार्वजनिक चेहरे के रूप में देश के सामने रहेंगे, वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा पर्दे के पीछे रहकर पार्टी की छवि को सुधारने, नए नैरेटिव यानी विमर्श को गढ़ने और बनाई गई रणनीतियों को धरातल पर सुचारू रूप से लागू करवाने का काम संभालेंगी।
राहुल गांधी का जनसंपर्क और 'छात्रों की गूंज' अभियान
इस नए दोहरे नेतृत्व मॉडल के तहत, राहुल गांधी का पूरा ध्यान सीधे जनता के बीच सक्रिय रहकर उनका विश्वास जीतने पर होगा। वे देश भर में छात्रों, युवाओं और शैक्षणिक समुदायों से सीधा संपर्क साधने के लिए 'छात्रों की गूंज' जैसे बड़े अभियानों का नेतृत्व करेंगे। इस प्रकार, जहां प्रियंका गांधी सांगठनिक नियंत्रण और चुनावी योजना का संचालन करेंगी, वहीं राहुल गांधी जमीन पर कांग्रेस की जन-उपस्थिति को मजबूत करेंगे।
सहयोगियों पर निर्भरता कम करने और आत्मनिर्भर बनने का लक्ष्य
यह दूरगामी चुनावी रणनीति कांग्रेस की राजनीतिक सोच में आ रहे एक बड़े बदलाव को रेखांकित करती है। राहुल गांधी का स्पष्ट मानना है कि पार्टी को केवल क्षेत्रीय गठबंधन सहयोगियों की बैसाखी के सहारे नहीं रहना चाहिए। भाजपा (BJP) जैसी बड़ी सांगठनिक ताकत का मुकाबला करने के लिए कांग्रेस को अपने दम पर संगठन का विस्तार करना होगा। पिछले चुनावों के अनुभवों से सीख लेते हुए, जहां स्पष्ट नैरेटिव और सांगठनिक तालमेल की कमी के कारण पार्टी को नुकसान उठाना पड़ा था, इस नए दोहरे नेतृत्व मॉडल को लागू किया जा रहा है। इसका अंतिम उद्देश्य एक ऐसा आत्मनिर्भर और सशक्त संगठन खड़ा करना है जो BJP की चुनावी मशीनरी का डटकर मुकाबला कर सके।


















