कांग्रेस ने साफ कर दिया है कि संसद के आने वाले मानसून सत्र में सबसे पहला मुद्दा अयोध्या के राम मंदिर के लिए मिले दान से जुड़ा विवाद ही होगा। पार्टी का आरोप है कि भारतीय जनता पार्टी ने भक्तों के भरोसे के साथ विश्वासघात किया है।
जयराम रमेश का सीधा हमला
मानसून सत्र से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के बाद कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि राम मंदिर ट्रस्ट ने भक्तों की आस्था के साथ धोखा किया है। उन्होंने सरकार को घेरने के लिए 'प्रधानमंत्री चुप्पी तोड़ो' का नारा दिया और कहा कि जब तक प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस मामले पर खुद कुछ नहीं बोलते, विवाद थमने वाला नहीं है।
दान में गड़बड़ी के आरोपों की जड़
यह विवाद पिछले कुछ हफ्तों से चल रहा है। कांग्रेस का आरोप है कि राम मंदिर के निर्माण के लिए भक्तों ने जो दान दिया था, उसके इस्तेमाल में गड़बड़ी हुई और भाजपा से जुड़े लोगों ने इस पैसे का दुरुपयोग किया। अखिलेश यादव ने भी भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा, 'भाजपा ने जनता के भरोसे के साथ विश्वासघात किया है और भगवान राम उन्हें माफ नहीं करेंगे।' उन्होंने यह भी कहा कि इस विवाद के बाद भाजपा को न दान मिलेगा और न वोट, और वे केदारेश्वर धाम का निर्माण पूरा होने के बाद ही राम मंदिर के दर्शन के लिए जाएंगे। दूसरी ओर उत्तर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा, वह बच नहीं पाएगा। हिमाचल प्रदेश में कांग्रेस इकाई ने भी राम मंदिर दान में कथित गबन के आरोपों को लेकर दो महीने का अभियान शुरू करने का ऐलान किया है।
राम मंदिर ट्रस्ट का जवाब
आरोपों के बीच राम मंदिर ट्रस्ट के सदस्य दिनेंद्र दास महाराज ने सफाई दी। उन्होंने कहा, 'अनुष्ठान समय पर हुए हैं और भक्तों की संख्या में कोई कमी नहीं आई है।'
सर्वदलीय बैठक में और क्या हुआ
यह पूरा घटनाक्रम मानसून सत्र शुरू होने से पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक के दौरान सामने आया। सरकार की तरफ से किरेन रिजिजू ने बैठक से पहले कहा कि सरकार विपक्ष की बात सुनने के लिए तैयार है, लेकिन उसे भी विपक्ष से वैसा ही सहयोग चाहिए। इसी बैठक में विपक्षी दलों ने सरकार द्वारा एनसीपीआई को बुलाए जाने पर वॉकआउट किया और इसे लोकतांत्रिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया। जयराम रमेश ने इसे तृणमूल कांग्रेस के करीब 20 तथाकथित बागी सांसदों के लिए ठिकाना बताया। बैठक में श्रीकांत शिंदे ने यह भी कहा कि उद्धव गुट (यूबीटी) के 6 सांसदों के शिवसेना में विलय से जुड़े तकनीकी पहलुओं पर लोकसभा अध्यक्ष फैसला लेंगे।




















