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बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की क्या है रणनीति और तेजस्वी यादव के सामने क्या हैं विकल्प?राजनीति
28 जून 2026, 3:22 pm (46 दिन पहले)· 3

बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर की क्या है रणनीति और तेजस्वी यादव के सामने क्या हैं विकल्प?

पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाले उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में चर्चा तेज है। प्रशांत किशोर इस सीट पर अपनी पार्टी जन सुराज की दावेदारी मजबूत करने के लिए आरजेडी से कथित तौर पर तालमेल बिठाने की कोशिश कर रहे हैं।

बिहार की राजधानी पटना में स्थित बांकीपुर विधानसभा सीट पर होने वाला आगामी उपचुनाव राज्य की राजनीति का मुख्य केंद्र बन गया है। इस सीट को लेकर सवाल उठ रहे हैं कि क्या जन सुराज के सूत्रधार प्रशांत किशोर खुद चुनावी मैदान में उतरेंगे? क्या वे भारतीय जनता पार्टी और सम्राट चौधरी की चुनौती का सामना करने के लिए तेजस्वी यादव की अगुवाई वाली आरजेडी से गुप्त सहमति बनाने की कोशिश कर रहे हैं? पटना के राजनीतिक कार्यालयों और सार्वजनिक स्थानों पर इन दिनों बांकीपुर सीट पर संभावित नए राजनीतिक समीकरणों को लेकर खूब चर्चाएं हो रही हैं।

बांकीपुर का चुनावी रण और बीजेपी का वर्चस्व

बांकीपुर सीट लंबे समय से भारतीय जनता पार्टी का सुरक्षित गढ़ मानी जाती रही है। बीजेपी के दिग्गज नेता नीतिन नवीन के राज्यसभा सदस्य बनने के बाद यह सीट रिक्त हुई है, जिसके कारण अब यहां उपचुनाव की स्थिति बनी है। पिछले चार दशकों से इस सीट पर नीतिन नवीन और उनके पिता नवीन किशोर प्रसाद सिन्हा का दबदबा रहा है। नवंबर 2025 में हुए बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान भी इस पारंपरिक सीट पर बीजेपी का प्रभाव बरकरार रहा था। उस चुनाव में नीतिन नवीन ने 98,299 वोट हासिल किए थे और 51,936 वोटों के बड़े अंतर से जीत दर्ज की थी। उस मुकाबले में आरजेडी की रेखा कुमारी दूसरे स्थान पर थीं, जबकि जन सुराज की उम्मीदवार वंदना कुमारी तीसरे पायदान पर रही थीं। शहरी क्षेत्र होने के कारण वहां बीजेपी का आधार बेहद मजबूत है, जिसे भेदना किसी भी अन्य दल के लिए बड़ी चुनौती है।

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प्रशांत किशोर की क्या है योजना?

नवंबर 2025 के विधानसभा चुनाव के दौरान भी राघोपुर सीट से प्रशांत किशोर के चुनाव लड़ने की चर्चाएं जोरों पर थीं। यद्यपि उस चुनाव में जन सुराज को कोई सीट नहीं मिल सकी थी, लेकिन अब उपचुनाव को लेकर प्रशांत किशोर ने संकेत दिए हैं कि उनकी पार्टी इस बार बांकीपुर में अपनी पूरी ताकत झोंक देगी। राजनीतिक पंडितों का मानना है कि इस बार प्रशांत किशोर खुद बांकीपुर से उम्मीदवार हो सकते हैं ताकि वे विधानसभा में अपनी जगह बना सकें और सक्रिय राजनीति में अपनी नई पहचान स्थापित कर सकें। प्रशांत किशोर के अनुसार, यह उपचुनाव सम्राट चौधरी के नेतृत्व वाली सरकार के कामकाज और उनके द्वारा किए गए वादों पर जनता की राय जानने का एक अवसर होगा।

तेजस्वी यादव और जन सुराज का कथित तालमेल

पटना के राजनीतिक गलियारों में यह कयास लगाए जा रहे हैं कि क्या प्रशांत किशोर बीजेपी के विरोधी वोटों के विभाजन को रोकने के लिए तेजस्वी यादव से किसी प्रकार का सहयोग चाहते हैं। चर्चा यह है कि प्रशांत किशोर संभवतः चाहते हैं कि आरजेडी इस सीट पर कोई मजबूत प्रत्याशी न उतारे या उन्हें एक प्रकार का वॉकओवर दे दे। हालांकि, इस पर बड़ा सवाल यह है कि क्या तेजस्वी यादव इस फार्मूले को स्वीकार करेंगे।

राजनीतिक समीकरणों की जटिलता

विश्लेषकों की राय में बांकीपुर एक कायस्थ बहुल सीट है और यहां की अगड़ी जातियों तथा व्यापारिक वर्ग का एकमुश्त वोट हमेशा से बीजेपी को जाता रहा है। यदि तेजस्वी यादव इस सीट पर प्रशांत किशोर की सहायता करते हैं, तो यह आरजेडी के लिए राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित हो सकता है। प्रशांत किशोर लगातार आरजेडी के पारंपरिक 'माय' यानी मुस्लिम-यादव वोट बैंक में सेंधमारी के प्रयास करते रहे हैं। ऐसी स्थिति में तेजस्वी यादव के लिए सार्वजनिक रूप से कोई समझौता करना अत्यंत कठिन प्रतीत होता है। अंततः, यदि प्रशांत किशोर स्वयं मैदान में उतरते हैं, तो यह मुकाबला एक साधारण उपचुनाव के बजाय सीधे तौर पर 'ब्रांड प्रशांत किशोर' बनाम 'एनडीए सरकार' के बीच एक हाई-वोल्टेज लड़ाई में बदल जाएगा। अब सबकी निगाहें चुनाव आयोग पर टिकी हैं कि वह उपचुनाव की तारीखों का ऐलान कब करता है, लेकिन बांकीपुर की सियासी तपिश अभी से सातवें आसमान पर है।

सवाल-जवाब

बांकीपुर उपचुनाव क्यों हो रहा है?
बीजेपी के कद्दावर नेता नीतिन नवीन के राज्यसभा जाने के कारण यह सीट रिक्त हुई है, जिसके चलते उपचुनाव जरूरी हो गया है।
नवंबर 2025 के चुनाव में बांकीपुर का परिणाम क्या था?
बीजेपी के नीतिन नवीन ने 98,299 वोट पाकर 51,936 वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी।
प्रशांत किशोर के लिए बांकीपुर क्यों महत्वपूर्ण है?
माना जा रहा है कि खुद चुनाव लड़कर वे विधानसभा में प्रवेश करना चाहते हैं और अपनी राजनीतिक साख को मजबूत करना चाहते हैं।
क्या तेजस्वी यादव और प्रशांत किशोर का गठबंधन संभव है?
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह आरजेडी के लिए नुकसानदेह हो सकता है, इसलिए सार्वजनिक समझौता होना बहुत कठिन है।
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