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बंगाल में सियासी भूचाल: TMC के 20 सांसद NCPI में शामिल, पर नई पार्टी में ही शांतनु देव बनाम श्वेली कुंडू की जंग छिड़ीराजनीति
17 जून 2026, 6:32 pm (41 दिन पहले)· 2

बंगाल में सियासी भूचाल: TMC के 20 सांसद NCPI में शामिल, पर नई पार्टी में ही शांतनु देव बनाम श्वेली कुंडू की जंग छिड़ी

तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों के नेशनललिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) में जाने से बंगाल की राजनीति गरमा गई है, लेकिन उसी पार्टी में संस्थापक सदस्य होने के दावे को लेकर शांतनु देव और प्रमुख श्वेली कुंडू आमने-सामने आ गए हैं।

पश्चिम बंगाल की राजनीति इस वक्त ऐसे मोड़ पर है जहां हर घंटे नए समीकरण बन और बिगड़ रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के पूरे 20 सांसदों का एक झटके में पार्टी छोड़कर ‘नेशनललिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया’ (NCPI) में चले जाना अपने आप में एक बड़ी घटना है, जिसे राज्य की भावी राजनीति की दिशा बदलने वाला कदम माना जा रहा है। मगर हैरानी की बात यह है कि जश्न मनाने का मौका जिस नई पार्टी को मिलना चाहिए था, वहीं अंदरूनी कलह की चिंगारी भड़क उठी है।

श्वेली कुंडू का बयान, नया अध्यक्ष तय

बुधवार को NCPI की संस्थापक और प्रमुख श्वेली कुंडू ने प्रेस वार्ता में दो बड़ी बातें कहीं। पहली, पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है और एक से दो दिन के भीतर सारा खुलासा कर दिया जाएगा। उनके शब्दों में, “हम एक व्यवस्थित दिशा में आगे बढ़ रहे हैं और नए नेतृत्व के साथ पार्टी नई ऊर्जा के साथ काम करेगी।” कुंडू का दावा है कि बदलाव सुनियोजित तरीके से हो रहा है और जल्द ही तस्वीर साफ हो जाएगी।

शांतनु देव के दावे पर तीखी प्रतिक्रिया

दूसरी, और कहीं ज्यादा विस्फोटक बात तब सामने आई जब उनसे शांतनु देव के दावों पर सवाल पूछा गया। श्वेली कुंडू ने बेहद कड़े लहजे में कहा, “शांतनु देव न तो पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं और न ही उनके पास ऐसा कोई प्रमाण है जो इसे साबित कर सके। जो लोग बिना किसी आधार के दावा कर रहे हैं, उन्हें जनता के सामने सच रखना चाहिए।” इस एक बयान ने यह जता दिया कि NCPI के भीतर वर्चस्व और विरासत को लेकर बड़ी रस्साकशी चल रही है। यानी जिस पार्टी में टीएमसी के बागी सांसद नई शुरुआत की उम्मीद में पहुंचे, वहां पहले से ही कुर्सी की जंग छिड़ी हुई है।

आखिर 20 सांसदों ने NCPI ही क्यों चुनी?

सबसे बड़ा सवाल यही है कि तृणमूल के इन 20 सांसदों ने ठिकाने के तौर पर NCPI को ही क्यों चुना। राजनीतिक जानकारों की मानें तो पार्टी के भीतर लंबे समय से चली आ रही आंतरिक खींचतान और नेतृत्व से नाराजगी ने इन सांसदों को ऐसा मंच तलाशने पर मजबूर किया, जहां वे खुलकर अपनी बात रख सकें। लेकिन विडंबना यह है कि जिस नई जमीन को उन्होंने स्थिरता समझा, वही अब अपने ही विवादों के कारण सुर्खियों में है।

बागियों की राह कितनी मुश्किल?

आलोचक मानते हैं कि इन बागी सांसदों के लिए आगे का रास्ता आसान नहीं रहने वाला। ऐसी पार्टी में कदम रखना, जहां खुद संस्थापक सदस्यों के बीच अध्यक्ष पद और पार्टी की विरासत पर ठनी हो, इन नेताओं के लिए राजनीतिक रूप से जोखिम भरा साबित हो सकता है। विपक्ष ने भी मौका लपक लिया है और सवाल दाग रहा है कि यह सिर्फ सत्ता का खेल है या सचमुच विचारधारा का मिलन है।

अगले 48 घंटे निर्णायक

अब हर किसी की निगाह अगले 48 घंटों पर टिकी है। श्वेली कुंडू ने जिस नए अध्यक्ष के चुने जाने का ऐलान किया है, वह आखिर कौन होगा? क्या नया अध्यक्ष आते ही शांतनु देव और श्वेली कुंडू के बीच का यह टकराव शांत हो जाएगा, या पार्टी में टूट का नया दौर शुरू होगा? तृणमूल से आए ये 20 सांसद किस रणनीति पर आगे बढ़ेंगे, यह सवाल फिलहाल बंगाल की सबसे बड़ी राजनीतिक पहेली बन चुका है।

तीसरे विकल्प की अग्निपरीक्षा

पश्चिम बंगाल में दल-बदल कोई नई बात नहीं, पर इस बार का नजारा अलग है। तृणमूल जैसे मजबूत संगठन से एक साथ 20 सांसदों का जाना पार्टी की बुनियाद हिला सकता है। दूसरी ओर, NCPI के लिए यह घड़ी किसी अग्निपरीक्षा से कम नहीं। अगर वह इन 20 दिग्गजों को एकजुट रखने और अपने भीतर के झगड़े सुलझाने में कामयाब रही, तो राज्य में एक मजबूत तीसरे विकल्प के रूप में उभर सकती है। फिलहाल कोलकाता की सड़कों से लेकर टीवी डिबेट तक हर जगह यही चर्चा है कि क्या NCPI आने वाले दिनों में तृणमूल के लिए सबसे बड़ी चुनौती बनेगी, या यह पूरा घटनाक्रम महज एक राजनीतिक ड्रामा बनकर रह जाएगा। श्वेली कुंडू की अगली घोषणा का सबको इंतजार है, क्योंकि उसके बाद ही तय होगा कि बंगाल की राजनीति का अगला अध्याय कौन लिखेगा। इतना तय है कि आने वाला वक्त राज्य के लिए उतार-चढ़ाव से भरा रहेगा।

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सवाल-जवाब

टीएमसी के कितने सांसदों ने पार्टी छोड़ी और वे किस पार्टी में गए?
तृणमूल कांग्रेस के 20 सांसदों ने एक साथ पार्टी छोड़कर नेशनललिस्ट सिटिजन्स पार्टी ऑफ इंडिया (NCPI) का दामन थामा है।
श्वेली कुंडू कौन हैं और उन्होंने क्या कहा?
श्वेली कुंडू NCPI की संस्थापक और प्रमुख हैं। उन्होंने बुधवार को कहा कि पार्टी का नया अध्यक्ष चुन लिया गया है और एक-दो दिन में सारा खुलासा कर दिया जाएगा।
शांतनु देव को लेकर विवाद क्या है?
श्वेली कुंडू ने कहा कि शांतनु देव न तो पार्टी के संस्थापक सदस्य हैं और न ही उनके पास इसे साबित करने का कोई प्रमाण है, जिससे पार्टी के भीतर वर्चस्व की जंग सामने आ गई है।
आगे क्या होने वाला है?
सबकी नजर अगले 48 घंटों पर है, जब नए अध्यक्ष का नाम सामने आएगा और तय होगा कि पार्टी का विवाद थमता है या टूट का दौर शुरू होता है।
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