चुनावी नतीजों और मतगणना के ताजा रुझानों के सामने आने के बाद भारतीय जनता पार्टी की राष्ट्रीय महासचिव स्मृति ईरानी ने औपचारिक वक्तव्य जारी करते हुए जनता के फैसले का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि मतदान के परिणामों ने साफ कर दिया है कि देश की लोकतांत्रिक व्यवस्था ने अनुचित दबाव और भीड़तंत्र की राजनीति को करारा जवाब दिया है। पार्टी के पक्ष में आए जनसमर्थन के लिए उन्होंने संबंधित राज्यों के मतदाताओं के प्रति आभार प्रकट किया।
विभिन्न राज्यों के चुनावी नतीजों और रुझानों का ब्योरा
स्मृति ईरानी ने कहा कि राज्यसभा चुनावों में पार्टी के प्रत्याशियों की सफलता से संगठन में भारी उत्साह है। इसके साथ ही उन्होंने पुडुचेरी में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के प्रतिनिधि की विजय पर कार्यकर्ताओं को बधाई दी। पश्चिम बंगाल और असम से सामने आ रहे चुनावी परिणामों को ऐतिहासिक बताते हुए उन्होंने कहा कि जनता ने सुशासन के संकल्प पर मुहर लगाई है।
पश्चिम बंगाल की स्थिति का उल्लेख करते हुए उन्होंने बताया कि पार्टी नंदीग्राम में निर्णायक बढ़त बनाए हुए है और रेजीनगर क्षेत्र में भी आगे चल रही है, जहाँ लगभग 71 प्रतिशत मतदाता अल्पसंख्यक वर्ग से आते हैं। वहीं असम के नगांव में अब तक संपन्न हुई मतगणना के रुझान भी पार्टी की जीत की स्पष्ट दिशा दिखा रहे हैं। इन सभी चुनावी क्षेत्रों से आ रहे संकेत जनसमर्थन की मजबूती को रेखांकित करते हैं।
संवैधानिक संस्थाओं और भारतीय राज्य पर बयान का मुद्दा
विपक्षी नेतृत्व पर प्रहार करते हुए स्मृति ईरानी ने कांग्रेस अध्यक्ष के एक पूर्व बयान की याद दिलाई। उन्होंने कहा कि 15 जनवरी 2025 को कांग्रेस अध्यक्ष ने टिप्पणी की थी कि उनका संघर्ष भाजपा से नहीं बल्कि भारतीय राज्य (इंडियन स्टेट) से है। इस पर आपत्ति दर्ज कराते हुए उन्होंने रेखांकित किया कि देश के संवैधानिक संस्थान ही लोकतांत्रिक ढांचे की नींव हैं और उसकी रक्षा करते हैं।
उन्होंने कहा कि भारत के राजनीतिक इतिहास में इससे पहले किसी भी प्रमुख नेता ने इस अंदाज में देश और उसकी जनता पर हमले जैसा बयान नहीं दिया था। ऐसे विचार अत्यंत गंभीर चिंता का विषय हैं और इस पर व्यापक सार्वजनिक विमर्श होना चाहिए।
जेएनयू विवाद और नेतृत्व की चुप्पी पर सवाल
अपने संबोधन के अंतिम हिस्से में उन्होंने जेएनयू से जुड़े कांग्रेस के एक सांसद का प्रसंग उठाया। उन्होंने कहा कि संबंधित सांसद पर छात्राओं ने अंक देने के संदर्भ में गंभीर आरोप लगाए थे, जिनकी पुष्टि आंतरिक समिति की जांच में भी हुई थी। इसके बावजूद कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व और राहुल गांधी ने इस पूरे मामले पर पूर्ण रूप से चुप्पी साधे रखी।
स्मृति ईरानी ने आगे आरोप लगाया कि आरोपी सांसद के खिलाफ पार्टी के निवर्तमान अध्यक्ष ने कोई अनुशासनात्मक कदम नहीं उठाया। उन्होंने यह भी सवाल किया कि महिला पुलिसकर्मियों के साथ हालिया दुर्व्यवहार की घटनाओं के बाद क्या किसी उचित कार्रवाई की उम्मीद की जा सकती है। उन्होंने निष्कर्ष देते हुए कहा कि नारे गढ़ना बहुत आसान होता है, लेकिन मर्यादा और जवाबदेही साबित करना अलग बात है।



















