मंत्रिमंडल से हटने के बाद धर्मेंद्र प्रधान का पहला बयान सामने आया है, जिसमें उन्होंने खुद को जमीन पर संघर्ष करने वाला इंसान बताया है। संसद भवन के गलियारे में कांग्रेस नेता जयराम रमेश के साथ हुई अपनी एक पुरानी बातचीत को याद करते हुए उन्होंने कहा कि वह किसी वातानुकूलित कमरे में बैठकर राजनीति करने वाले एक्टिविस्ट नहीं हैं, बल्कि सीधे तौर पर सड़क पर लड़ने वाले स्ट्रीट फाइटर हैं। दोनों नेताओं की यह मुलाकात संसद परिसर में ही हुई थी, जहां पुराने दिनों के संस्मरण साझा किए गए।
बातचीत के दौरान धर्मेंद्र प्रधान ने जिक्र किया कि कैसे एक समय पर जयराम रमेश ने अटल बिहारी वाजपेयी जी की कार्यप्रणाली और गवर्नेंस की खुलकर प्रशंसा की थी। उस वक्त उनके मन में आए सम्मान के चलते वह खुद जयराम रमेश को ढूंढते हुए अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के दफ्तर तक पहुंच गए थे। इसके बाद के वर्षों में जब जयराम रमेश केंद्रीय वाणिज्य मंत्री बने और वह खुद संसद सदस्य के रूप में चुने गए, तब वह अपने संसदीय क्षेत्र की स्थानीय मिर्च से जुड़ी समस्या को लेकर उनके कार्यालय में मिलने गए थे। इसी प्रसंग के बीच कांग्रेस नेता ने माहौल को हल्का करते हुए कहा कि ऐसा होता रहता है, जिस पर पलटवार करते हुए यह तीखा और स्पष्ट बयान सामने आया।
अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने दो टूक शब्दों में जवाब दिया कि कुछ भी इत्तेफाक से नहीं होता क्योंकि वह एक स्ट्रीट फाइटर हैं और किसी बंद कमरे में बैठकर बयानबाजी करने वाले एक्टिविस्ट नहीं हैं। उनकी इस टिप्पणी ने राजनीतिक गलियारों में खासी चर्चा बटोरी है और उनके तेवर साफ कर दिए हैं कि वह राजनीतिक मैदान में डटकर मुकाबला करने में विश्वास रखते हैं।
पेपर लीक रोकने के लिए सख्त प्रावधानों वाला नया विधेयक पेश
दूसरी तरफ परीक्षाओं में गड़बड़ी और नकल के मामलों पर लगाम कसने के लिए सरकार ने एक बड़ा कदम उठाया है। इसके तहत लोकसभा में सार्वजनिक परीक्षा अनुचित साधनों की रोकथाम संशोधन विधेयक 2026 को आधिकारिक रूप से पेश किया गया। इस नए विधेयक को सरकार की ओर से केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा सदन के पटल पर रखा गया, जिसका मुख्य उद्देश्य देश भर में आयोजित होने वाली परीक्षाओं की पारदर्शिता को सुरक्षित करना है।
इस संबंध में अगर 2024 में बनाए गए पुराने कानून और इस नए संशोधन विधेयक के बीच के अंतर को समझा जाए तो इसमें कई कड़े बदलाव किए गए हैं। नए एंटी पेपर लीक कानून में दोषियों की श्रेणी के आधार पर अलग-अलग और स्पष्ट प्रावधान तय किए गए हैं। यदि कोई व्यक्ति अकेले इस तरह के अपराध में संलिप्त पाया जाता है तो उसके लिए कानून में अलग सजा का नियम है, वहीं यदि कोई संगठित गिरोह इस कृत्य में शामिल होता है तो उसके खिलाफ बिल्कुल अलग और सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
विशेषज्ञों के अनुसार इस कानून का दायरा केवल संगठित अपराध सिंडिकेट के साधारण सदस्यों तक ही सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि इसमें सेवा प्रदाता फर्मों यानी उन सभी एजेंसियों को भी के दायरे में लाया गया है जो बॉयोमैट्रिक डेटा प्रबंधन या प्रश्न पत्रों के परिवहन के काम में जुटी होती हैं। यदि ऐसी किसी एजेंसी का कोई डायरेक्टर, सीनियर मैंनेजमेंट का प्रबंधक या अन्य कोई कर्मचारी इस तरह के अपराध में लिप्त मिलता है, तो पहले की तुलना में सजा को काफी बढ़ा दिया गया है। पहले ऐसे मामलों में अधिकतम पांच साल तक की सजा का प्रावधान था, जिसे अब बढ़ाकर सीधे दस साल कर दिया गया है। इसके साथ ही वित्तीय दंड यानी जुर्माने की राशि को भी एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये तक कर दिया गया है ताकि इस तरह के अपराधों पर पूरी तरह से रोक लगाई जा सके।
संसद पहुंचने पर एनडीए सांसदों ने किया स्वागत
शिक्षा मंत्री के पद से अपना इस्तीफा सौंपने के बाद जब धर्मेंद्र प्रधान सोमवार को पहली बार संसद भवन पहुंचे, तो वहां मौजूद एनडीए के तमाम सांसदों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। इस दौरान उनके चेहरे पर एक हल्की सी मुस्कान साफ तौर पर दिखाई दे रही थी। इस माहौल के बीच वहां मौजूद एक अन्य सांसद ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि भारतीय संसदीय इतिहास में यह एक दुर्लभ मौका है जब किसी वरिष्ठ मंत्री ने बिना किसी तरह के गंभीर आरोप या दाग के अपने पद से खुद इस्तीफा दे दिया हो।



















