ई-20 ईंधन नीति और सरकारी इथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को लेकर कई बार यह सवाल उठाया गया है कि क्या केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने इस नीति का उपयोग अपने परिवार के व्यवसायों को लाभ पहुंचाने के लिए किया है। अब इन सभी आरोपों पर स्वयं नितिन गडकरी ने चुप्पी तोड़ी है और सार्वजनिक रूप से अपनी स्थिति स्पष्ट की है। उन्होंने स्पष्ट किया कि देश के संपूर्ण इथेनॉल उत्पादन में उनके परिवार के उद्यमों की भागीदारी इतनी मामूली है कि उसका सरकारी नीतियों पर कोई भी प्रभाव पड़ना असंभव है।
गडकरी का बचाव और हितों के टकराव पर स्पष्टीकरण
नितिन गडकरी ने इस विषय पर अपनी बात रखते हुए कहा कि वे स्वयं अपनी फैक्ट्रियों का प्रबंधन नहीं देखते हैं, बल्कि उनके बेटे इन व्यवसायों को संभालते हैं। उन्होंने विस्तार से बताया कि इथेनॉल की दरें पेट्रोलियम मंत्रालय द्वारा टेंडर प्रक्रिया के तहत निर्धारित की जाती हैं और उन्हें अंतिम रूप कैबिनेट की मंजूरी के बाद मिलता है। मंत्रालय ही कोटा आवंटित करता है। गडकरी के अनुसार, उनका परिवार कुल इथेनॉल आपूर्ति में केवल 0.07 प्रतिशत का हिस्सा रखता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इतनी नगण्य हिस्सेदारी के साथ किसी भी बड़े आर्थिक लाभ की संभावना नहीं है।
बायोफ्यूल नीति और सरकारी प्रक्रिया
मई 2018 में केंद्रीय कैबिनेट, जिसमें नितिन गडकरी स्वयं भी शामिल थे, ने 'नेशनल पॉलिसी ऑन बायोफ्यूल्स-2018' को अपनी औपचारिक स्वीकृति दी थी। इस महत्वाकांक्षी नीति का मुख्य उद्देश्य वर्ष 2030 तक पेट्रोल में 20 प्रतिशत इथेनॉल मिलाने का लक्ष्य प्राप्त करना था। इस दिशा में कदम उठाते हुए विभिन्न तेल विपणन कंपनियों ने 'एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट' (EoI) जारी किए और देश के अलग-अलग राज्यों में 131 इथेनॉल संयंत्रों के प्रमोटरों के साथ दीर्घकालिक 'ऑफ-टेक एग्रीमेंट' (LTOA) निष्पादित किए।
पारिवारिक उद्यमों का विवरण
नितिन गडकरी के पुत्र सारंग और निखिल मुख्य रूप से 'मानस एग्रो' और 'सियान एग्रो इंडस्ट्रीज' का संचालन करते हैं, जो इथेनॉल, बायो-डीजल, खाद्य तेल और स्वास्थ्य उत्पादों जैसे विविध क्षेत्रों में सक्रिय हैं। 6 सितंबर 2012 को स्थापित 'मानस एग्रो' में सारंग गडकरी पूर्णकालिक निदेशक के रूप में कार्यरत हैं और यह कंपनी चीनी, बिजली उत्पादन, बायो-फर्टिलाइजर और बायोमास प्रोसेसिंग का कार्य करती है। उपलब्ध डेटा के अनुसार, वित्त वर्ष 2023-24 में इस कंपनी का परिचालन राजस्व 500 करोड़ रुपये से अधिक रहा। वहीं, निखिल गडकरी 'सियान एग्रो इंडस्ट्रीज एंड इंफ्रास्ट्रक्चर लिमिटेड' के प्रबंध निदेशक हैं। 13 सितंबर 1985 को अस्तित्व में आई यह अनलिस्टेड पब्लिक कंपनी मुख्य रूप से मसाले, तेल और स्वास्थ्य देखभाल उत्पादों का निर्माण करती है, जिसका वार्षिक राजस्व 200 से 300 करोड़ रुपये के दायरे में है।



















