बेमतलब जुमला 'वास्टेगुना हुइया' कैसे बना जेन Z आंदोलन का प्रतीक, धर्मेंद्र प्रधान को देना पड़ा इस्तीफाबेलेघाटा से तृणमूल कांग्रेस नेता राजू नस्कर पुलिस कस्टडी में, रंगदारी और धमकी के आरोपों पर बड़ा एक्शनवाइट हाउस वार्ता: यूक्रेन में पैट्रियट मिसाइल उत्पादन लाइसेंस के लिए वॉशिंगटन पहुंचे जेलेंस्की, ट्रंप से करेंगे अहम बैठकमीन राशिफल 29 जुलाई 2026: खुद पर बेवजह दबाव न डालें, टाल दें बड़े आर्थिक फैसलेउत्तर प्रदेश में एक ही छत के नीचे बैठेंगे सभी जज, योगी आदित्यनाथ ने दिए एकीकृत कोर्ट परिसर के निर्देशशादियों की विदाई में आज भी छाया रहता है 1989 का क्लासिक ट्रैक, 37 सालों से कायम है पद्मिनी कोल्हापुरे और मिथुन चक्रवर्ती के इस इमोशनल गाने की जगहकॉलेज में कैसे गढ़ा जाता है नैतिक चरित्र: शोध में छात्रों ने बताया क्लासरूम के अनुभवों का सचएनआईआई और नॉटिंघम के वैज्ञानिकों की बड़ी खोज, Ark1 एंजाइम को ब्लॉक कर मलेरिया परजीवी को खत्म करने की जगी उम्मीदराशिफल 29 जुलाई 2026: वृषभ समेत 5 राशियों का चमकेगा भाग्य, जानें सभी 12 राशियों का दैनिक भविष्यफलचीन में 90 साल की महिला 20 वर्ष तक जिंदा हैंड ग्रेनेड से तोड़ती रही अखरोट, मजदूर ने देख पुलिस को दी सूचना
जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर की बांकीपुर उम्मीदवारी से सियासी हलचल, सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार से की मुलाकातराजनीति
5 जुल॰ 2026, 6:34 pm (23 दिन पहले)· 3

जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर की बांकीपुर उम्मीदवारी से सियासी हलचल, सम्राट चौधरी ने नीतीश कुमार से की मुलाकात

जन सुराज प्रमुख प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर सीट से उपचुनाव लड़ने का ऐलान किया, कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी नीतीश कुमार के घर पहुंचे, जिससे एनडीए के भीतर हलचल की अटकलें तेज हो गईं।

बिहार की सियासत में रविवार को एक साथ दो ऐसी घटनाएं हुईं, जिन्होंने राजनीतिक गलियारों में हलचल मचा दी। एक तरफ जन सुराज के मुखिया प्रशांत किशोर ने पटना की बांकीपुर विधानसभा सीट से उपचुनाव लड़ने का ऐलान कर दिया, तो दूसरी तरफ कुछ ही घंटों बाद मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सीधे जदयू प्रमुख नीतीश कुमार के आवास जा पहुंचे। दोनों घटनाओं का आपस में कोई सीधा संबंध भले ही न बताया गया हो, लेकिन समय का यह मेल बिहार की राजनीति में नए सिरे से चर्चा छेड़ गया है।

भाजपा के गढ़ में जन सुराज की सेंध की कोशिश

बांकीपुर सीट को लंबे समय से भाजपा का मजबूत किला माना जाता रहा है। यहां पार्टी का संगठनात्मक ढांचा बेहद मजबूत है और यही वजह है कि प्रशांत किशोर का खुद इस सीट से चुनाव लड़ने का फैसला सिर्फ एक विधानसभा सीट जीतने की कोशिश भर नहीं समझा जा रहा। इसे शहरी मध्यम वर्ग, युवा मतदाताओं और परंपरागत दलों से नाखुश वोटरों को अपनी तरफ खींचने की बड़ी रणनीति के तौर पर देखा जा रहा है। जन सुराज पिछले काफी समय से खुद को बिहार में तीसरे विकल्प के रूप में पेश करने में जुटा है और बांकीपुर उपचुनाव उसकी अब तक की सबसे बड़ी राजनीतिक अग्निपरीक्षा बनता दिख रहा है।

ये भी पढ़ें

सम्राट चौधरी की नीतीश से मुलाकात, संयोग या रणनीति?

इसी बीच सम्राट चौधरी का सीधे नीतीश कुमार के घर पहुंचना राजनीतिक हलकों में जिज्ञासा का विषय बन गया। सरकारी तौर पर इसे प्रोटोकॉल के तहत की गई मुलाकात या प्रशासनिक बैठक कहा जा सकता है, लेकिन राजनीति के जानकार इसे इतनी आसानी से खारिज करने को तैयार नहीं हैं। उनका मानना है कि इस मुलाकात में उपचुनाव को लेकर एनडीए की रणनीति, बांकीपुर के लिए उम्मीदवार का चुनाव और प्रशांत किशोर की मौजूदगी से पड़ने वाले संभावित असर पर बातचीत हुई हो सकती है।

रणनीतिकार से नेता बनने की परीक्षा

प्रशांत किशोर की पहचान अब तक एक कुशल चुनावी रणनीतिकार की रही है। उन्होंने वर्षों तक अलग अलग राजनीतिक दलों के लिए जीत की रणनीतियां बनाईं, लेकिन कभी खुद चुनावी मैदान में नहीं उतरे। बांकीपुर से उम्मीदवारी के साथ वे पहली बार परदे के पीछे से निकलकर सीधे मतदाताओं के सामने जा रहे हैं। ऐसे में यह देखना दिलचस्प रहेगा कि एक सफल रणनीतिकार के तौर पर बनाई गई उनकी छवि, एक नेता के तौर पर वोट में कितनी तब्दील हो पाती है।

भाजपा और जदयू के सामने क्या है असली चुनौती

भाजपा और जदयू के लिए यह उपचुनाव सिर्फ एक सीट बचाने भर की लड़ाई नहीं रहने वाला। दोनों दलों के सामने यह साबित करने की चुनौती भी होगी कि एनडीए का शहरी और सामाजिक वोट बैंक अब भी उनके साथ पूरी मजबूती से खड़ा है। अगर प्रशांत किशोर इस मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने में कामयाब होते हैं, तो इसका असर सिर्फ बांकीपुर तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि आने वाले समय में बिहार की पूरी राजनीति की दिशा तय कर सकता है। यही वजह है कि यह उपचुनाव अब एक सामान्य उपचुनाव न रहकर बिहार की सियासत के अगले अध्याय की झलक बनता जा रहा है।

नितिन नवीन के राज्यसभा जाने से खाली हुई सीट

प्रशांत किशोर बीते कई सप्ताह से बांकीपुर विधानसभा क्षेत्र में लगातार सक्रिय बने हुए हैं। वे जनसभाएं कर रहे हैं, नुक्कड़ बैठकें आयोजित कर रहे हैं और स्थानीय लोगों से सीधा संवाद बना रहे हैं। यही वजह है कि उनकी उम्मीदवारी को अचानक लिया गया फैसला नहीं, बल्कि पहले से तय की गई रणनीति का हिस्सा माना जा रहा था। बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद खाली हुई है। लगातार इस सीट से विधायक रहे नितिन नवीन के संसद के ऊपरी सदन में जाने के बाद निर्वाचन आयोग ने यहां उपचुनाव कराने का ऐलान किया।

30 जुलाई को वोटिंग, तस्वीर जल्द होगी साफ

निर्वाचन आयोग के जारी कार्यक्रम के मुताबिक बांकीपुर विधानसभा सीट पर 30 जुलाई को मतदान होगा। जन सुराज की तरफ से प्रशांत किशोर के मैदान में उतरने के बाद इस मुकाबले के और दिलचस्प होने की उम्मीद जताई जा रही है। अब सबकी निगाहें भाजपा और बाकी विपक्षी दलों की तरफ से उतारे जाने वाले उम्मीदवारों पर टिकी हैं। इन उम्मीदवारों के नामों का ऐलान होते ही बांकीपुर के चुनावी मुकाबले की पूरी तस्वीर साफ हो जाएगी।

सवाल-जवाब

प्रशांत किशोर बांकीपुर से चुनाव क्यों लड़ रहे हैं?
वे जन सुराज को बिहार में तीसरे विकल्प के तौर पर स्थापित करना चाहते हैं और बांकीपुर सीट से खुद उम्मीदवार बनकर इसकी परीक्षा देना चाहते हैं।
बांकीपुर विधानसभा सीट खाली क्यों हुई?
भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा सदस्य निर्वाचित होने के बाद यह सीट रिक्त हुई।
बांकीपुर उपचुनाव में मतदान कब होगा?
निर्वाचन आयोग के कार्यक्रम के मुताबिक यहां 30 जुलाई को वोटिंग होगी।
सम्राट चौधरी नीतीश कुमार से क्यों मिले?
आधिकारिक तौर पर इसे शिष्टाचार भेंट बताया गया, लेकिन माना जा रहा है कि इसमें उपचुनाव की रणनीति और उम्मीदवार चयन पर भी बात हुई हो सकती है।
बांकीपुर सीट किस पार्टी का गढ़ मानी जाती रही है?
यह सीट लंबे समय से भाजपा का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है क्योंकि यहां पार्टी की संगठनात्मक पकड़ काफी मजबूत रही है।
प्रशांत किशोर पहले किस भूमिका में रहे हैं?
वे वर्षों तक विभिन्न राजनीतिक दलों के लिए चुनावी रणनीतिकार रहे हैं, और यह पहला मौका है जब वे खुद चुनाव मैदान में उतर रहे हैं।
बांकीपुर उपचुनाव में उम्मीदवारों की पूरी तस्वीर कब साफ होगी?
भाजपा और अन्य विपक्षी दलों की तरफ से उम्मीदवारों के नाम घोषित होने के बाद ही चुनावी मुकाबले की पूरी तस्वीर स्पष्ट होगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 0

अभी तक कोई टिप्पणी नहीं — पहली टिप्पणी आपकी हो!

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR