जॉर्जिया के स्थानीय चुनावी रण में इस बार एक नया सियासी समीकरण देखने को मिल रहा है। भारतीय अप्रवासी माता-पिता की अमेरिका में जन्मी 40 वर्षीय संतान सुचिता पटेल फोरसिथ काउंटी कमिश्नर पद की दौड़ में शामिल हुई हैं। डेमोक्रेटिक पार्टी से ताल्लुक रखने वाली सुचिता इस काउंटी में किसी भी निर्वाचित पद की दौड़ में उतरने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी नागरिक बन गई हैं। मतदान की तारीख 3 नवंबर से ठीक दो दिन पहले रविवार को उन्होंने मतदाताओं से सीधा संपर्क साधने के लिए घर-घर जाकर प्रचार अभियान चलाया। उनके सामने रिपब्लिकन पार्टी के मौजूदा कमिश्नर टॉड लेवेंट हैं, जो पिछले 16 वर्षों से लगातार निर्विरोध जीतते आ रहे हैं। इस लंबे एकाधिकार को चुनौती देने के फैसले के पीछे प्रतिद्वंद्वी के डराने-धमकाने वाले रवैये का मुकाबला करने और बच्चों के भविष्य को बेहतर बनाने की मंशा शामिल है।
फोरसिथ काउंटी का ऐतिहासिक परिवेश और जनसांख्यिकी बदलाव
अटलांटा शहर के मध्य हिस्से से लगभग एक घंटे की दूरी पर बसी फोरसिथ काउंटी का अपना एक जटिल अतीत रहा है। साल 1912 के दौरान श्वेत नागरिकों और कू क्लक्स क्लान से जुड़े समूहों ने इस इलाके से अधिकांश अश्वेत आबादी को जबरन खदेड़ दिया था। नस्लीय हिंसा के उस दौर के बाद से यह क्षेत्र लंबे समय तक श्वेत बहुल बना रहा। वर्तमान में 2.8 लाख की कुल आबादी वाले इस काउंटी में करीब 61 प्रतिशत आबादी श्वेत समुदाय की है। ऐतिहासिक रूप से जॉर्जिया राज्य को रिपब्लिकन पार्टी का मजबूत गढ़ यानी गहरा लाल इलाका माना जाता रहा है।
बीते दो दशकों में फोरसिथ काउंटी की जनसांख्यिकी में बड़ा बदलाव आया है। वर्ष 2000 में यहाँ भारतीय मूल के मात्र 200 के करीब लोग निवास करते थे, लेकिन अब यह संख्या तेजी से बढ़कर लगभग 48,000 तक पहुँच चुकी है। आज यह समुदाय समूची काउंटी की कुल जनसंख्या का तकरीबन 16 प्रतिशत हिस्सा बनता है। जनसांख्यिकी में इतनी भारी बढ़ोतरी के बावजूद सुचिता पटेल के लिए यह मुकाबला आसान नहीं माना जा रहा, क्योंकि वह एक अल्पसंख्यक उम्मीदवार के तौर पर मैदान में हैं।
पेशेवर पृष्ठभूमि और स्थानीय प्राथमिकताओं पर जोर
पेशागत रूप से एकाउंटेंट के तौर पर काम करने वाली सुचिता पटेल का मानना है कि काउंटी प्रशासन का काम वैचारिक राजनीति से ज्यादा व्यावहारिक जनसेवा से जुड़ा होता है। स्थानीय आयुक्तों की मुख्य जिम्मेदारी सड़कों की मरम्मत कराने, खेल परिसरों का आधुनिकीकरण करने और बुनियादी ढांचे को दुरुस्त रखने की होती है। उनके मुताबिक, ऐसी जनसुविधाओं पर काम करने के लिए दलीय निष्ठा आड़े नहीं आती, क्योंकि नागरिक समस्याओं की जरूरतें सभी वर्गों के लिए एक समान होती हैं।
राजनीतिक गलियारों में कोई पूर्व अनुभव न होने के बावजूद चुनावी राजनीति में उतरने का फैसला उन्होंने एक विशेष आग्रह के बाद लिया। एक समय जब व्यवस्था में बदलाव लाना नामुमकिन सा लगता था, तब कुछ लोगों ने उनसे संपर्क कर एक सीमित क्षेत्र में इस चुनावी प्रयास को संभव बताया। इस संपर्क के दौरान मौजूदा प्रतिद्वंद्वी के आक्रामक व्यवहार को लेकर आगाह भी किया गया था और ऐसे व्यक्ति की तलाश थी जो मानसिक तौर पर बेहद मजबूत हो। पटेल का कहना है कि टॉड लेवेंट का सामना करने से अन्य संभावित दावेदार इसलिए कतराते रहे क्योंकि वे माहौल से भयभीत महसूस करते थे।
रोजमर्रा की आर्थिक दिक्कतें और चुनावी विमर्श
मध्यावधि चुनाव के इस दौर में सुचिता पटेल का मुख्य ध्यान आम नागरिकों की आर्थिक चिंताओं पर केंद्रित है। लातीनी प्रवासियों की बहुलता वाले एक निर्धन इलाके में प्रचार के दौरान उन्होंने रोजमर्रा के बुनियादी मुद्दों को प्राथमिकता देने की बात कही।
“अगर लोग अपनी किराने का बिल नहीं चुका पा रहे हैं, तो कोई भी व्यक्ति सर्वनाम या आव्रजन की परवाह नहीं करता।”
उनका मानना है कि देश भर में आज एक प्रतिशत संपन्न वर्ग और शेष सामान्य नागरिकों के बीच गहरा विभाजन खड़ा हो गया है। किराने की खरीदारी का बिल, पेट्रोल के बढ़ते दाम और स्वास्थ्य सेवाओं पर होने वाले भारी खर्च ने आम मतदाताओं को परेशान कर रखा है। वादों के पूरा न होने से उपजे जनाक्रोश के बीच राष्ट्रीय स्तर पर राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को लेकर भी तीखा ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है।
पारिवारिक सरोकार और राष्ट्रीय मध्यावधि संदर्भ
घर-परिवार और आने वाली पीढ़ी की खुशहाली ही इस चुनाव प्रचार की मूल प्रेरणा है। जब सात साल की बेटी ने इस मुकाबले की कठिनाई को लेकर सवाल किया, तो सुचिता ने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष समाज को बच्चों के रहने योग्य एक खूबसूरत जगह बनाने के लिए किया जा रहा है।
यह स्थानीय चुनाव अमेरिका के उस व्यापक मध्यावधि चुनाव का हिस्सा है जो वॉशिंगटन की संसद का नियंत्रण तय करने जा रहा है। इस चुनाव के तहत प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों तथा 100 सदस्यीय सीनेट की 37 सीटों पर फैसला होना है। साथ ही कई राज्यों में गवर्नर, स्कूल बोर्ड के प्रमुखों और काउंटी कमिश्नरों के पदों पर भी मतदान हो रहा है। ओपिनियन पोल के अनुमानों में प्रतिनिधि सभा और सीनेट में रिपब्लिकन पार्टी को नुकसान होने की संभावनाएं जताई गई हैं, जिसके नतीजे आगे चलकर राष्ट्रीय नीतियों की दिशा तय करेंगे।
























