भारतीय राजनीति के पुरोधा और देश के पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी रविवार, 8 नवंबर को अपने जीवन के 100वें वर्ष में कदम रख चुके हैं। इस अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक भावुक लेख लिखकर उनके राजनीतिक सफर और राष्ट्र निर्माण में निभाई गई उनकी महत्वपूर्ण भूमिका को याद किया है। प्रधानमंत्री ने अपने आलेख में उस दौर का जिक्र किया जब देश का विभाजन हुआ था और आडवाणी ने तमाम मुश्किलों के बावजूद अपने जीवन की नई शुरुआत की थी।
जनसंघ से लेकर भारतीय जनता पार्टी तक का सफर
प्रधानमंत्री ने अपने लेख में उस लंबी वैचारिक यात्रा का विस्तार से वर्णन किया है जिसमें जनसंघ को मजबूत करने और भारतीय जनता पार्टी की स्थापना करने में लालकृष्ण आडवाणी की केंद्रीय भूमिका रही। आपातकाल के काले दौर में लोकतंत्र की रक्षा के लिए किए गए कड़े संघर्ष को भी विशेष रूप से रेखांकित किया गया है। पीएम मोदी ने बताया कि किस प्रकार आडवाणी ने देश के कोने-कोने में जाकर संगठन को सींचा और वैचारिक स्पष्टता के साथ राजनीति की नई दिशा तय की।
सोमनाथ से अयोध्या तक की ऐतिहासिक रथयात्रा
आडवाणी के राजनीतिक जीवन के सबसे बड़े अध्यायों में से एक सोमनाथ से अयोध्या तक की रथयात्रा रही है। प्रधानमंत्री ने इस यात्रा का जिक्र करते हुए कहा कि इसकी रूपरेखा तैयार करने से लेकर इसके आयोजन तक में उन्हें भी कंधे से कंधा मिलाकर काम करने का अवसर मिला था। यह यात्रा भारतीय राजनीतिक और सांस्कृतिक इतिहास का एक बड़ा मोड़ साबित हुई थी, जिसने देश की दिशा और दशा दोनों को प्रभावित किया।
अटल बिहारी वाजपेयी के साथ अटूट रिश्ता
लेख में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी की राजनीतिक जोड़ी को भारतीय लोकतंत्र का एक स्वर्णिम अध्याय बताया गया है। दशकों तक चली इस राजनीतिक साझेदारी को आपसी विश्वास, वैचारिक प्रतिबद्धता और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण की एक अनूठी मिसाल के रूप में याद किया गया है। पीएम मोदी ने लिखा कि इन दोनों नेताओं ने मिलकर देश की राजनीति को एक नई परिपक्वता दी और सिद्धांतों से कभी समझौता नहीं किया।
गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के रूप में सेवा
देश की आंतरिक सुरक्षा और शासन व्यवस्था में आडवाणी के योगदान का भी विशेष उल्लेख किया गया है। गृह मंत्री और उप प्रधानमंत्री के तौर पर उनके कार्यकाल के दौरान आतंकवाद के खिलाफ अपनाए गए कड़े रुख और सुरक्षा तंत्र को मजबूत करने के लिए उठाए गए कदमों की सराहना की गई है। राष्ट्र के प्रति उनकी इसी लंबी और निष्ठावान सेवा को देखते हुए वर्ष 2024 में उन्हें देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मान भारत रत्न से अलंकृत किया गया था।
एक व्यक्तिगत और भावनात्मक जुड़ाव
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने निजी अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि वे खुद को अत्यंत भाग्यशाली मानते हैं जिन्हें लगातार आडवाणी का सान्निध्य, स्नेह और मार्गदर्शन प्राप्त होता रहा। उनके साथ बिताए गए अनगिनत पल आज भी यादों में ताजा हैं। लेख के अंत में प्रधानमंत्री ने ईश्वर से उनके उत्तम स्वास्थ्य और लंबी आयु की कामना करते हुए कहा कि उनका पूरा जीवन आने वाली पीढ़ियों के लिए हमेशा प्रेरणा का स्रोत बना रहेगा।



















