बिहार में राजनीतिक घमासान, प्रशांत किशोर पर सम्राट चौधरी को गोली मारने की धमकी देने का बीजेपी ने लगाया आरोपउत्तर प्रदेश की संभल सीट पर सपा का दबदबा, जानिए 2027 के चुनाव में क्या रहेगा समीकरणउत्तराखंड की लोक परंपरा में रचा-बसा हुड़का, जानिए क्यों माना जाता है यह भगवान शिव का प्रिय वाद्यत्योहारी सीजन में नहीं बढ़ेगी चीनी की कीमत, सरकार ने सप्लाई बढ़ाने के लिए उठाया बड़ा कदमबिना आधार कार्ड के भी मिलेगा सरकारी योजनाओं का लाभ, सामाजिक न्याय मंत्रालय ने जारी किए नए नियमवेस्ट बैंक में जैतून की कटाई के दौरान हमला, फलस्तीनियों और अमेरिकी पत्रकार घायलराजस्थान में त्योहार से पहले खाद्य सुरक्षा विभाग की बड़ी कार्रवाई, भारी मात्रा में मिलावटी पनीर और मिठाइयां नष्टजमुई के खैरा बाजार में फेस्टिव सीजन की धूम, महिलाओं के लिए साड़ियों और सलवार सूट का बेहतरीन कलेक्शनअमित शाह ने पंजाब सरकार से मांगी ड्रग्स मामलों की रिपोर्ट, गुरदासपुर हमले और मानसा हत्या पर उठे गंभीर सवालक्रिस्टल लेक रिव्यू (2026): जेसन वूरहीस की बैकस्टोरी में लिंडा कार्डेलीनी की शानदार अदाकारी
वोटर लिस्ट विवाद पर बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर पहुंचे डीके शिवकुमार, कानूनी कार्रवाई के भरोसे पर खत्म हुआ धरनाराजनीति
1 अक्तू॰ 2026, 11:33 pm (15 दिन पहले)· 4

वोटर लिस्ट विवाद पर बेंगलुरु में मुख्य चुनाव अधिकारी के दफ्तर पहुंचे डीके शिवकुमार, कानूनी कार्रवाई के भरोसे पर खत्म हुआ धरना

कर्नाटक में फॉर्म 7 के जरिए बड़े पैमाने पर मतदाताओं के नाम काटने का आरोप लगाते हुए डीके शिवकुमार ने धरना दिया, जिसके बाद चुनाव आयोग ने थोक में आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ जांच और कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी किए।

कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद ने मंत्रियों और पार्टी नेताओं के साथ मिलकर मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। मुख्य चुनाव अधिकारी को मतदाता सूची से नाम हटाने के संबंध में विस्तृत साक्ष्य सौंपे गए और उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की औपचारिक मांग की गई, जिन्होंने बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए हैं। यह टकराव उस समय और गहरा गया जब अधिकारी की ओर से कानूनी राय लेने के बाद कदम उठाने की बात कही गई, जिससे असंतुष्ट होकर मुख्यमंत्री वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ रुख अपनाया कि जब तक संबंधित व्यक्तियों पर मामले दर्ज नहीं होंगे, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा।

थोक में फॉर्म 7 जमा करने का आरोप और जिलों के आंकड़े

मतदाता सूची से किसी भी नागरिक का नाम हटाने के लिए चुनाव आयोग की नियमावली के तहत फॉर्म 7 भरा जाता है। डी के शिवकुमार ने हर जिले के आंकड़े पेश करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को ऐसे नागरिकों की विस्तृत सूची सौंपी गई है जिनके नाम कटवाए जाने हैं। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर एक-एक कार्यकर्ता अपने-अपने मतदान केंद्र पर नाम हटवाने के लिए 80 से लेकर 200 तक फॉर्म 7 जमा कर रहा है। शिवकुमार के अनुसार, राज्य में एसआईआर से भी अधिक तादाद में नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं और इसके बाद 45 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ बड़ा खिलवाड़ करार दिया।

ये भी पढ़ें

बी के हरिप्रसाद के सवाल और राहुल गांधी का कड़ा हमला

कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर चुनाव आयोग को पहले भी कई पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हरिप्रसाद ने सवाल उठाया कि आखिर फॉर्म 7 इतनी भारी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचा, क्या चुनाव आयोग ने इसे सीधे उपलब्ध कराया या फिर इसे ईपीआईसी नंबर के साथ अलग से छपवाया गया। इस विवाद के सामने आने के बाद राहुल गांधी ने भी तीखा रुख अपनाया। उन्होंने सवाल किया कि कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी इस गंभीर मामले में प्राथमिक जांच और एफआईआर दर्ज करने से क्यों इनकार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार एसआईआर के माध्यम से मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।

चुनाव आयोग द्वारा जांच के निर्देश और उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं

मुख्यमंत्री के कड़े विरोध और लगातार प्रदर्शन के बाद स्थिति में बदलाव देखने को मिला। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर थोक में फॉर्म 7 जमा कराने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए। चुनाव तंत्र को अब जमा किए गए सभी फॉर्म 7 की सघन जांच करने और उन्हें प्रस्तुत करने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होंगे, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने अपना धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। उधर एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर कानूनी मोर्चे पर भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में लगातार तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिसमें एक नई याचिका के तहत उनके पिछले 10 महीनों में जारी किए गए 14 आदेशों को रद्द करने की मांग रखी गई है।

सवाल-जवाब

डीके शिवकुमार ने बेंगलुरु में धरना क्यों दिया?
डीके शिवकुमार ने बीजेपी कार्यकर्ताओं द्वारा थोक में फॉर्म 7 जमा कर वोटर लिस्ट से नाम कटवाने का आरोप लगाया और इसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग को लेकर धरना दिया।
चुनाव आयोग में फॉर्म 7 किस काम आता है?
फॉर्म 7 का उपयोग चुनाव आयोग के नियमों के तहत मतदाता सूची से किसी व्यक्ति का नाम हटाने या आपत्ति दर्ज कराने के लिए किया जाता है।
प्रत्येक बूथ पर कितने फॉर्म 7 जमा करने का आरोप लगाया गया है?
आरोपों के मुताबिक प्रति बूथ 80 से लेकर 200 फॉर्म 7 वोटर लिस्ट से नाम कटवाने के लिए जमा कराए जा रहे थे।
कर्नाटक में कितने मतदाताओं को नोटिस भेजे गए थे?
डीके शिवकुमार के अनुसार कर्नाटक में 45 लाख से ज्यादा मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं।
मुख्यमंत्री ने अपना धरना किस आश्वासन के बाद समाप्त किया?
चुनाव आयोग द्वारा थोक में फॉर्म 7 जमा कराने वालों की पहचान करने और कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी करने के बाद धरना समाप्त किया गया।
सुप्रीम कोर्ट में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्या मांग की गई है?
सुप्रीम कोर्ट में दाखिल नई याचिका में मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के पिछले 10 महीने के 14 आदेश रद्द करने की मांग की गई है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Sneha Kulkarni@sneha-kulkarni·14 दिन पहले

कल जब मैं बेंगलुरु में उस इलाके से गुजर रही थी, तो सचमुच सड़कों पर भारी भीड़ देखकर लगा कि कुछ बहुत बड़ा राजनीतिक बवंडर चल रहा है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·14 दिन पहले

वोटर लिस्ट से नाम कटवाने का खेल गजब है। एक ही आदमी धड़ाधड़ फॉर्म भर रहा है तो जांच तो बनती ही है। डीके शिवकुमार का बैठ जाना सही रहा, वरना पुलिस-प्रशासन हाथ पर हाथ धरे बैठा रहता।

Dr. Aditya Sharma@aditya-sharma·14 दिन पहले

करण जी, खगोलीय गणनाओं में एक भी अंक की भूल से पूरा पंचांग गलत हो जाता है, वैसे ही मतदाता सूची में हेरफेर से लोकतंत्र की पूरी चाल ही बिगड़ जाती है।

Ravikash Gupta@ravikash·14 दिन पहले

वोटर लिस्ट से नाम काटना लोकतंत्र पर सीधा हमला है। चुनाव आयोग को इस पर तुरंत और सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।

Rohan Verma@rohan-verma·14 दिन पहले

रविकेश जी, आपकी बात सही है। जब मैं पिछले चुनाव में अपने बूथ पर गया था, तो मेरा ही नाम गायब मिला था।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp