कर्नाटक की राजधानी बेंगलुरु में मतदाता सूची से नाम हटाने को लेकर सियासी टकराव तेज हो गया है। मुख्यमंत्री डी के शिवकुमार और कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद ने मंत्रियों और पार्टी नेताओं के साथ मिलकर मुख्य चुनाव अधिकारी के कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया। मुख्य चुनाव अधिकारी को मतदाता सूची से नाम हटाने के संबंध में विस्तृत साक्ष्य सौंपे गए और उन सभी व्यक्तियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की औपचारिक मांग की गई, जिन्होंने बड़ी संख्या में फॉर्म 7 जमा किए हैं। यह टकराव उस समय और गहरा गया जब अधिकारी की ओर से कानूनी राय लेने के बाद कदम उठाने की बात कही गई, जिससे असंतुष्ट होकर मुख्यमंत्री वहीं धरने पर बैठ गए। उन्होंने साफ रुख अपनाया कि जब तक संबंधित व्यक्तियों पर मामले दर्ज नहीं होंगे, तब तक यह प्रदर्शन जारी रहेगा।
थोक में फॉर्म 7 जमा करने का आरोप और जिलों के आंकड़े
मतदाता सूची से किसी भी नागरिक का नाम हटाने के लिए चुनाव आयोग की नियमावली के तहत फॉर्म 7 भरा जाता है। डी के शिवकुमार ने हर जिले के आंकड़े पेश करते हुए आरोप लगाया कि बीजेपी कार्यकर्ताओं को ऐसे नागरिकों की विस्तृत सूची सौंपी गई है जिनके नाम कटवाए जाने हैं। उन्होंने बताया कि जमीनी स्तर पर एक-एक कार्यकर्ता अपने-अपने मतदान केंद्र पर नाम हटवाने के लिए 80 से लेकर 200 तक फॉर्म 7 जमा कर रहा है। शिवकुमार के अनुसार, राज्य में एसआईआर से भी अधिक तादाद में नागरिकों के नाम मतदाता सूची से बाहर किए गए हैं और इसके बाद 45 लाख से अधिक मतदाताओं को नोटिस भेजे गए हैं। उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के साथ बड़ा खिलवाड़ करार दिया।
बी के हरिप्रसाद के सवाल और राहुल गांधी का कड़ा हमला
कर्नाटक कांग्रेस के अध्यक्ष बी के हरिप्रसाद ने इस पूरी प्रक्रिया की पारदर्शिता पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विषय पर चुनाव आयोग को पहले भी कई पत्र भेजे जा चुके हैं, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। हरिप्रसाद ने सवाल उठाया कि आखिर फॉर्म 7 इतनी भारी संख्या में बीजेपी कार्यकर्ताओं तक कैसे पहुंचा, क्या चुनाव आयोग ने इसे सीधे उपलब्ध कराया या फिर इसे ईपीआईसी नंबर के साथ अलग से छपवाया गया। इस विवाद के सामने आने के बाद राहुल गांधी ने भी तीखा रुख अपनाया। उन्होंने सवाल किया कि कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी इस गंभीर मामले में प्राथमिक जांच और एफआईआर दर्ज करने से क्यों इनकार कर रहे हैं। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि ज्ञानेश कुमार एसआईआर के माध्यम से मिलकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर कर रहे हैं और उन्हें अपने पद से इस्तीफा देकर सरकारी गवाह बन जाना चाहिए।
चुनाव आयोग द्वारा जांच के निर्देश और उच्चतम न्यायालय में याचिकाएं
मुख्यमंत्री के कड़े विरोध और लगातार प्रदर्शन के बाद स्थिति में बदलाव देखने को मिला। मुख्य निर्वाचन अधिकारी के स्तर पर थोक में फॉर्म 7 जमा कराने वाले सभी व्यक्तियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए गए। चुनाव तंत्र को अब जमा किए गए सभी फॉर्म 7 की सघन जांच करने और उन्हें प्रस्तुत करने वाले लोगों की पहचान सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। आयोग ने स्पष्ट किया कि नियमों का उल्लंघन कर अवैध तरीके से आवेदन जमा करने वालों के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज होंगे, जिसके बाद मुख्यमंत्री ने अपना धरना समाप्त करने का निर्णय लिया। उधर एसआईआर से जुड़े फैसलों को लेकर कानूनी मोर्चे पर भी चुनौतियां बढ़ गई हैं। मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ उच्चतम न्यायालय में लगातार तीन याचिकाएं दाखिल की गई हैं, जिसमें एक नई याचिका के तहत उनके पिछले 10 महीनों में जारी किए गए 14 आदेशों को रद्द करने की मांग रखी गई है।




















