राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) प्रश्नपत्र लीक प्रकरण के बाद शुरू हुआ राजनीतिक और छात्र आंदोलन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के पद छोड़ने के साथ ही समाप्त हो गया है। इस पूरे घटनाक्रम में पर्दे के पीछे चल रही वार्ताओं का ब्योरा सामने आया है। केंद्र सरकार ने आंदोलनकारी कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के साथ गतिरोध सुलझाने के लिए एक बीच का रास्ता पेश किया था। इसके तहत धर्मेंद्र प्रधान से शिक्षा मंत्रालय का प्रभार वापस लेकर उन्हें मंत्रिमंडल में किसी अन्य विभाग की जिम्मेदारी देने का सुझाव दिया गया था, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र संगठन इस पर सहमत नहीं हुए और शिक्षा मंत्री के सीधे इस्तीफे पर अड़े रहे।
मंत्रालय बदलने का सरकारी प्रस्ताव और सीजेपी का सख्त रुख
आंदोलन को खत्म कराने के मकसद से केंद्र सरकार की ओर से दो वरिष्ठ मंत्रियों, जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह ने सीजेपी प्रतिनिधियों के साथ बैठक की थी। इस बातचीत के दौरान सरकारी प्रतिनिधियों ने विचार रखा कि नए शिक्षा मंत्री की नियुक्ति और अन्य सहायक मांगों को पूरा किए जाने की स्थिति में छात्र अपना प्रदर्शन समाप्त कर सकते हैं। वार्ता में यह तर्क भी दिया गया कि केंद्रीय मंत्रिमंडल में विभागों का फेरबदल करना प्रधानमंत्री का संवैधानिक अधिकार है, और सरकार शिक्षा विभाग का प्रभार किसी अन्य मंत्री को सौंप सकती है। हालांकि, सीजेपी के प्रतिनिधियों ने इस प्रस्ताव को सिरे से खारिज कर दिया। आंदोलनकारियों का स्पष्ट कहना था कि धर्मेंद्र प्रधान को मंत्री पद से इस्तीफा देना ही होगा।
सहमति बनी दो मुख्य मांगों और मुआवजे की प्रक्रिया पर
गतिरोध सुलझाने की इस प्रक्रिया के दौरान सरकार ने सीजेपी की दो प्रमुख मांगों को पहले ही स्वीकार कर लिया था। इनमें 20 मार्च को आयोजित 'संसद चलो' मार्च के दौरान प्रदर्शनकारी छात्रों पर दर्ज प्राथमिकियों (एफआईआर) को वापस लेना शामिल था। सामान्य प्रक्रिया के तहत गंभीर सार्वजनिक संपत्ति के नुकसान वाले मामलों को छोड़कर अन्य एफआईआर वापस लेने पर सहमति बन गई थी। इसके अलावा, नीट परीक्षा के प्रश्नपत्र लीक होने और परीक्षा रद्द किए जाने से दुखी होकर आत्महत्या करने वाले अभ्यर्थियों के परिवारों को उचित सहायता प्रदान करने की दिशा में भी कदम उठाए गए। सीजेपी ने ऐसे प्रत्येक पीड़ित परिवार के लिए 1-1 करोड़ रुपये के मुआवजे की मांग रखी थी, जिस पर सरकार ने प्रक्रिया शुरू कर दी थी।
कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में तीसरे दौर की बातचीत और आंदोलन की समाप्ति
वार्ता के शुरुआती दौर में हुए विलंब के कारण गतिरोध लंबा खींचता गया, जिससे सरकार पर जन दबाव बढ़ता चला गया। अंततः 25 जुलाई की दोपहर धर्मेंद्र प्रधान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर अपने पद से हटने की घोषणा कर दी। अपने संदेश में उन्होंने लिखा कि बीते 10 दिनों के घटनाक्रम से वे बेहद दुखी हैं और यह मुद्दा उनके लिए व्यक्तिगत प्रतिष्ठा का विषय नहीं है। इसके बाद दिल्ली के कॉन्स्टीट्यूशन क्लब में सरकार और सीजेपी के बीच तीसरे दौर की आधिकारिक बैठक हुई। इस बैठक में सरकार की ओर से जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मौजूद रहे, जबकि सीजेपी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व सौरव दास और आशुतोष रांका ने किया। बैठक के बाद आशुतोष रांका ने जानकारी दी कि 36 दिनों के लंबे आंदोलन के बाद सरकार द्वारा सभी मांगे स्वीकार कर ली गई हैं, इसलिए सभी प्रदर्शनकारी शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन स्थल खाली कर अपने घर लौट जाएं।



















