नई दिल्ली के अति-सुरक्षित इलाके में चल रहे कांग्रेस के धरने को खत्म कराने की सरकारी कोशिश नाकाम हो गई है। मेडिकल प्रवेश परीक्षा विवाद पर चर्चा की मांग को लेकर शुरू हुआ यह गतिरोध अब नए राजनीतिक मोड़ पर पहुंच गया है।
सड़क पर उतरे आला अधिकारी
राष्ट्रीय राजधानी में अकबर रोड के समीप विरोध प्रदर्शन के कारण पैदा हुई स्थिति को संभालने के लिए केंद्र ने एक असामान्य कदम उठाया। आम लोगों की परेशानी को देखते हुए केंद्रीय गृह सचिव गोविंद मोहन के साथ प्रधानमंत्री कार्यालय के राज्य मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह सीधे मौके पर पहुंच गए। वहां इन दोनों वरिष्ठ अधिकारियों ने कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे के साथ-साथ राहुल गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से सीधा संवाद किया। प्रशासन का मुख्य लक्ष्य इस वीआईपी क्षेत्र में यातायात को सुचारू करना और बिना किसी टकराव के धरने को जल्द से जल्द समाप्त कराना था।
संसद में चर्चा की शर्त पर बनी सहमति
घटनास्थल पर हुई इस महत्वपूर्ण बातचीत के दौरान मंत्री ने विपक्षी नेताओं से अपना प्रदर्शन रोकने की जोरदार अपील की। उन्होंने साफ तौर पर समझाया कि यह जगह राजनीतिक धरनों के लिए कानूनी रूप से तय नहीं है। उन्होंने इस बात पर भी जोर दिया कि इस बेहद संवेदनशील क्षेत्र में भारी भीड़ जुटने से आम राहगीरों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। इस अपील के जवाब में राहुल गांधी ने एक स्पष्ट शर्त सामने रखी। उन्होंने वादा किया कि अगर केंद्र सरकार नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ियों और छात्रों के विरोध पर संसद के भीतर विस्तार से बात करने को राजी हो जाए, तो वे उसी समय अपना आंदोलन खत्म कर देंगे।
इस प्रस्ताव के तुरंत बाद डॉ. जितेंद्र सिंह ने सरकार के शीर्ष अधिकारियों से संपर्क किया। वहां से अनुमति मिलने के बाद मंत्री ने कांग्रेस नेताओं को पक्का भरोसा दिया कि सरकार पूरे नीट विवाद पर सदन के अंदर एक व्यापक चर्चा कराने के लिए पूरी तरह तैयार है।
नई मांग और बातचीत का टूटना
चर्चा की मांग मान लिए जाने के बावजूद यह धरना खत्म नहीं हो सका। केंद्रीय मंत्री के बयान के मुताबिक, विपक्षी नेता अपनी ही तय की गई शर्त पर कायम नहीं रहे। उन्होंने अचानक एक नई मांग पेश कर दी कि अब केंद्रीय शिक्षा मंत्री को अपने पद से तुरंत इस्तीफा देना होगा। जब उन्हें याद दिलाया गया कि वे अपने पुराने वादे से पीछे हट रहे हैं, तो उन्होंने कथित तौर पर इसे अपनी मर्जी का मामला बताकर आपत्ति को खारिज कर दिया।
इस दौरान प्रशासनिक स्तर पर भी गतिरोध सुलझाने की कोशिशें लगातार जारी रहीं। गृह सचिव ने बार-बार सुरक्षा व्यवस्था के कड़े नियमों और भारी ट्रैफिक जाम का हवाला देकर नेताओं को मनाने का प्रयास किया। इसके बावजूद प्रदर्शनकारियों ने अपना सख्त रवैया नहीं छोड़ा और वे उसी जगह पर जमे रहे।
सोशल मीडिया पर तीखी आलोचना
सड़क पर हुई इस विफल वार्ता के बाद विवाद इंटरनेट पर भी पहुंच गया। राज्य मंत्री ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स का इस्तेमाल करते हुए पूरी घटना का विस्तृत ब्यौरा देश के सामने रखा। उन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया। मंत्री ने विपक्षी नेता के व्यवहार की सख्त आलोचना करते हुए इसे पूरी तरह से गैर-जिम्मेदाराना कदम बताया।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने यह भी कहा कि अपनी ही रखी गई शर्तों से इस तरह मुकर जाना किसी भी संसदीय और लोकतांत्रिक व्यवस्था की गरिमा के खिलाफ है। उन्होंने एक बार फिर दोहराया कि सत्ता पक्ष नीट के मुद्दे पर हर तरह के सवालों का जवाब देने को तैयार है। अंत में उन्होंने एक बड़ी प्रक्रियात्मक खामी की ओर इशारा करते हुए बताया कि विपक्षी दल ने संसद की कार्यवाही के नियमों के तहत इस चर्चा के लिए अब तक कोई औपचारिक नोटिस तक जमा नहीं किया है।


















