इस्लामाबाद में बैठे हुक्मरानों को आखिरकार कड़वी सच्चाई स्वीकार करनी पड़ी है। पाकिस्तान की शहबाज शरीफ सरकार में योजना और विकास मंत्री अहसान इकबाल ने यह मान लिया है कि दक्षिण एशिया में भारत सबसे प्रभावशाली और ताकतवर राष्ट्र है। उनकी यह लाचारी तब सामने आई जब उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि भौगोलिक तौर पर ऊपरी हिस्से में स्थित होने के कारण भारत जरूरत पड़ने पर नदियों के प्रवाह को नियंत्रित कर सकता है, जिससे पाकिस्तान की कृषि और अर्थव्यवस्था सीधे तौर पर घुटनों पर आ सकती है।
भारत के रुख से सहमा इस्लामाबाद
जब से भारत ने सिंधु जल समझौते को लेकर अपने कड़े तेवर दिखाए हैं, तब से पाकिस्तान के तमाम रणनीतिकार और नेता दबाव में आ गए हैं। अतीत में जब यह समझौता हुआ था, तब पश्चिमी नदियों का बड़ा हिस्सा पड़ोसी देश की तरफ मोड़ दिया गया था, जिससे उसे दशकों तक बिना किसी रुकावट के पानी मिलता रहा। लेकिन पहलगाम में आतंकी हमले की घटना के बाद भारत ने इस पूरी व्यवस्था पर पुनर्विचार करने का फैसला किया और इसे रद्द कर दिया। भारतीय पक्ष की तरफ से नोटिस मिलने के बाद से ही पाकिस्तानी हुक्मरानों के होश उड़े हुए हैं।
बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रहा है भारत
भारतीय अधिकारी अब झेलम और किशनगंगा जैसी जलविद्युत परियोजनाओं पर तेजी से काम कर रहे हैं। देश अपने हिस्से के संसाधनों का पूरा उपयोग करने के लिए मजबूत बुनियादी ढांचे का निर्माण कर रहा है। जैसे-जैसे इन परियोजनाओं पर काम आगे बढ़ेगा, अतिरिक्त पानी के बहाव पर स्वाभाविक रूप से रोक लगेगी। पाकिस्तान इस बात से डरा हुआ है कि यदि इन जल स्त्रोतों का रुख बदला गया, तो उसके अपने इलाकों तक पानी पहुंचना मुश्किल हो जाएगा।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर मंडराता गहरा संकट
पड़ोसी देश की आर्थिक रीढ़ पूरी तरह से उसकी कृषि व्यवस्था पर टिकी है, जो सिंधु नदी तंत्र के भरोसे चलती है। यदि पानी की आपूर्ति बाधित होती है, तो इसके गंभीर परिणाम देखने को मिलेंगे। देश के पंजाब और सिंध प्रांतों में सूखे जैसे हालात पैदा हो सकते हैं, जिससे बड़े पैमाने पर भुखमरी और अनाज का संकट खड़ा हो सकता है। इसके अलावा, कई हाइड्रोइलेक्ट्रिक पावर प्लांट पानी की कमी के कारण बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे, जिससे पूरा देश बिजली संकट से जूझने लगेगा। पहले से ही आर्थिक बदहाली से जूझ रहे राष्ट्र के लिए कृषि और उद्योगों का ठप होना किसी बड़े विध्वंस से कम नहीं होगा।
क्षेत्रीय स्थिरता में भारत की केंद्रीय भूमिका
पाकिस्तानी मंत्री के इन बयानों से साफ जाहिर होता है कि कूटनीतिक मोर्चे पर भारत की पकड़ कितनी मजबूत हो चुकी है। यह केवल एक राजनीतिक बयान नहीं है, बल्कि उस लाचारी की दास्तान है जो भारत के रणनीतिक फैसलों के बाद पैदा हुई है। इकबाल ने इस बात को भी स्वीकार किया कि इस पूरे इलाके में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने के लिए भारत की उपस्थिति अनिवार्य है, और उसके बिना इस क्षेत्र की भू-राजनीति में कोई बड़ा बदलाव संभव नहीं है। नदियों के इस प्राकृतिक चक्र और भारत की कूटनीतिक रणनीतियों ने पड़ोसी देश को उसकी वास्तविक स्थिति का अहसास करा दिया है।





















