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राहुल मनुस्मृति विवाद में उलझे, तो पीएम मोदी ने जयशंकर, डोभाल और मंत्रियों को ग्लोबल कूटनीति के मोर्चे पर उताराराजनीति
25 अग॰ 2026, 12:01 am (18 दिन पहले)· 1

राहुल मनुस्मृति विवाद में उलझे, तो पीएम मोदी ने जयशंकर, डोभाल और मंत्रियों को ग्लोबल कूटनीति के मोर्चे पर उतारा

कांग्रेस नेता राहुल गांधी के बयानों और मेलोनी से जुड़े विवाद के बीच, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीतिक मोर्चे पर बड़ी तैयारी करते हुए अजित डोभाल, एस जयशंकर, निर्मला सीतारमण और पीयूष गोयल को चीन, रूस, अमेरिका और जापान जैसे देशों में अहम कूटनीति के लिए भेजा है।

पीएम मोदी को घेरने की राजनीति के बीच राहुल गांधी के मंच से एक ऐसा विवाद सामने आया जिसने काफी सुर्खियां बटोरीं। इसके डैमेज कंट्रोल के लिए एक नया मंच तैयार किया गया और राहुल गांधी की नई छवि गढ़ने की पटकथा लिखी गई। हालांकि, पुरानी भूल को सुधारने के चक्कर में राहुल गांधी नए विवादों में घिर गए। मेलोनी के अपमान से जुड़े मामलों पर पर्दा डालने के लिए उन्होंने महिला सम्मान और मनुस्मृति का जिक्र छेड़ दिया, लेकिन इस मुद्दे पर भी वे घिरते नजर आए। एक तरफ जहां कांग्रेस पार्टी इस पूरे घटनाक्रम को संभालने में जुटी हुई है, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक कूटनीति का एक नया मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने चीन से लेकर रूस और अमेरिका तक अपनी ग्लोबल आउटरीच का दायरा काफी बढ़ा दिया है।

कूटनीतिक मोर्चे पर मंत्रियों और अधिकारियों की तैनाती

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने किस प्रकार अपनी कोर टीम को अलग-अलग देशों में अहम जिम्मेदारियां सौंपी हैं, यह गौर करने लायक बात है। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल इस समय चीन के दौरे पर हैं। इसके साथ ही, विदेश मंत्री एस जयशंकर रूस की यात्रा पर हैं। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के अमेरिका और कनाडा के दौरों की चर्चाएं हैं, जबकि वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल 200 कारोबारियों के एक बड़े बिजनेस डेलीगेशन के साथ जापान में मौजूद हैं। इन सब के अलावा अर्जेंटीना, चिली और ब्राजील भी प्रधानमंत्री के एजेंडे में शामिल हैं। कुल मिलाकर प्रधानमंत्री मोदी ने एनएसए डोभाल और अपने सबसे अनुभवी मंत्रियों को मैदान में उतार दिया है। आइए जानते हैं कि प्रधानमंत्री क्यों एक साथ अपनी टीम को विभिन्न देशों में भेज रहे हैं और इसके पीछे उनका क्या बड़ा प्लान काम कर रहा है।

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विदेशी मोर्चों पर एक साथ उठाए गए कदम

एक वक्त राहुल गांधी विदेश नीति को लेकर प्रधानमंत्री मोदी पर सवाल उठा रहे थे और यह कह रहे थे कि पीएम के लिए विदेश नीति सिर्फ गले मिलने तक सीमित है, लेकिन अब यह साफ है कि प्रधानमंत्री ने एक साथ कई कूटनीतिक मोर्चे खोल दिए हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजित डोभाल को चीन भेजा है, जहां वे तीन दिन के दौरे पर पहुंचे हैं। यह दौरा एक ऐसे महत्वपूर्ण समय पर हो रहा है जब अगले महीने राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली में ब्रिक्स सम्मेलन का आयोजन होना है। इस सम्मेलन में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के शामिल होने की पूरी संभावना जताई जा रही है।

यदि शी जिनपिंग भारत आते हैं, तो यह पिछले सात सालों में उनकी पहली भारत यात्रा होगी। जिनपिंग के संभावित दौरे से ठीक पहले अजित डोभाल का चीन जाना एक बहुत ही सकारात्मक कदम माना जा रहा है, क्योंकि इस यात्रा को चीनी राष्ट्रपति के आगमन की जमीन तैयार करने के रूप में देखा जा रहा है। ठीक ऐसा ही रुख पिछले साल चीन ने भी अपनाया था जब उसने पीएम मोदी को अपने यहां आमंत्रित किया था।

अजित डोभाल की चीन यात्रा का मुख्य उद्देश्य

ब्रिक्स सम्मेलन की तैयारियों के अलावा, एनएसए अजित डोभाल चीन के विदेश मंत्री के साथ सीमा विवाद जैसे गंभीर मुद्दों पर भी विस्तार से बातचीत करेंगे। अजित डोभाल वहां चीनी विदेश मंत्री के आधिकारिक निमंत्रण पर ही गए हैं। वर्ष 2003 में भारत और चीन के बीच सीमा विवाद को सुलझाने के लिए जो विशेष तंत्र बनाया गया था, उसी के तहत यह बातचीत का 25वां दौर होगा। इस बैठक के मुख्य एजेंडे में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी LAC पर शांति और स्थिरता बनाए रखना, सीमा पर तनाव को कम करना और एलएसी पर गश्त करने यानी पेट्रोलिंग अरेंजमेंट से जुड़े विषयों पर चर्चा करना शामिल है। इसके अलावा दोनों देशों के द्विपक्षीय रिश्तों को और अधिक मजबूत करने के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय मुद्दों पर भी विचार-विमर्श किया जाएगा।

रूस में एस जयशंकर और राष्ट्रपति पुतिन की मुलाकात

एक तरफ जहां एनएसए डोभाल चीन के दौरे पर हैं, वहीं दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने विदेश मंत्री एस जयशंकर को रूस भेजा हुआ है। विदेश मंत्री ने रूस में राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की है। विदेश मंत्री ने रूसी राष्ट्रपति से व्यक्तिगत रूप से मिलकर प्रधानमंत्री मोदी का संदेश उन्हें सौंपा और अगले महीने भारत में होने जा रहे ब्रिक्स सम्मेलन के लिए आधिकारिक निमंत्रण दिया। इस अहम मुलाकात के दौरान राष्ट्रपति पुतिन ने भी प्रधानमंत्री मोदी के लिए अपना एक विशेष संदेश भेजा है।

राष्ट्रपति पुतिन ने कहा कि वह किर्गिस्तान में होने वाली एससीओ यानी शंघाई सहयोग संगठन की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री मोदी से मिलने के लिए पूरी तरह उत्सुक हैं। पुतिन ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों देश व्यापार समेत लगभग हर क्षेत्र में आपसी तालमेल के साथ मिलकर काम कर रहे हैं। पुतिन ने यह भी कहा कि वर्ष 2025 में आई हल्की गिरावट के बाद इस साल दोनों देशों के बीच व्यापार का ग्राफ फिर से ऊपर जा रहा है। इसके लिए उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की व्यक्तिगत रुचि को बेहद अहम करार दिया।

जापान के साथ व्यापार और निवेश को बढ़ावा

एक तरफ भारत चीन के साथ अपने सीमा विवाद को सुलझाने की दिशा में आगे बढ़ रहा है और रूस के साथ अपने व्यापार को लगातार बढ़ा रहा है, तो दूसरी तरफ प्रधानमंत्री मोदी ने वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल को जापान भेजा है। इस जापानी यात्रा का प्रमुख उद्देश्य भारत में जापानी निवेश को आकर्षित करना और बढ़ाना है। इससे साफ जाहिर है कि प्रधानमंत्री की कूटनीति का मुख्य केंद्र बिंदु भारत की आर्थिक ताकत को कई गुना बढ़ाना है। इसी मकसद को पूरा करने के लिए पीयूष गोयल एक बहुत बड़ा बिजनेस डेलीगेशन लेकर जापान पहुंचे हैं।

इस 200 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल में सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी, स्टील, हेल्थकेयर और स्टार्टअप जैसे आधुनिक सेक्टरों से जुड़े प्रमुख लोग शामिल हैं। जापान के साथ व्यापार और निवेश को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए व्यापक बातचीत की जा रही है। भारत के लिए जापान प्रत्यक्ष विदेशी निवेश यानी एफडीआई का पांचवां सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। जापान ने आने वाले अगले 10 वर्षों के लिए भारत में 60 हजार करोड़ रुपये के निवेश का एक बड़ा लक्ष्य तय किया है। इस लक्ष्य को समय पर हासिल करने के लिए ही प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी पूरी टीम को काम पर लगा दिया है। देश की अर्थव्यवस्था को और अधिक मजबूती प्रदान करने के लिए ही इस व्यापक ग्लोबल आउटरीच प्रोग्राम की शुरुआत की गई है, जिससे भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं, व्यापार और विदेशी निवेश को तेजी से बढ़ाया जा सके।

कनाडा और दक्षिण अमेरिकी देशों के साथ कूटनीतिक और व्यापारिक कदम

व्यापार और निवेश के अवसरों को और अधिक बढ़ाने के लिए कनाडा के साथ भी उच्च स्तरीय बातचीत होने वाली है। वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण आगामी 26 और 27 अगस्त को कनाडा का दौरा करने वाली हैं। इसके तुरंत बाद वह जी-20 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में हिस्सा लेने के लिए अमेरिका रवाना होंगी। इसके अलावा, वाणिज्य सचिव को अर्जेंटीना, चिली और ब्राजील के आधिकारिक दौरे पर भेजा जाएगा। चिली के साथ भारत का मुक्त व्यापार समझौता पूरा होने के बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंच चुका है। इस समझौते के लागू होने से भारत को चिली के क्रिटिकल मिनरल्स यानी अहम खनिजों के विशाल बाजार तक सीधी पहुंच मिल जाएगी।

इसके साथ ही भारत दक्षिण अमेरिकी व्यापार ब्लॉक मरकोसुर के साथ भी एक महत्वपूर्ण व्यापार समझौता करने की तैयारी में है। इस दक्षिण अमेरिकी ट्रेड ब्लॉक में अर्जेंटीना, ब्राजील, पराग्वे और बोलीविया जैसे देश शामिल हैं। अर्जेंटीना और ब्राजील काफी बड़े देश हैं और इनका बाजार भी बहुत बड़ा है, और ये देश कहीं न कहीं चीन पर अपनी निर्भरता को कम करने के विकल्प तलाश रहे हैं।

निष्कर्ष

इस प्रकार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक स्तर पर एक साथ कई मोर्चों को खोलते हुए अपनी मजबूत और दूरदर्शी कूटनीति का परिचय दिया है।

सवाल-जवाब

अजित डोभाल के चीन दौरे का मुख्य उद्देश्य क्या है?
अजित डोभाल तीन दिन के दौरे पर चीन गए हैं जहाँ वे अगले महीने होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन की जमीन तैयार करने और सीमा विवाद, एलएसी पर शांति तथा पेट्रोलिंग अरेंजमेंट जैसे मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस में किससे मुलाकात की है?
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मुलाकात की और उन्हें भारत में होने वाले ब्रिक्स सम्मेलन का निमंत्रण दिया।
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ जापान गए डेलीगेशन में कितने सदस्य हैं?
वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल के साथ जापान गए बिजनेस डेलीगेशन में 200 सदस्य शामिल हैं जो सेमीकंडक्टर, क्लीन एनर्जी और स्टील जैसे सेक्टरों से जुड़े हैं।
निर्मला सीतारमण का कनाडा और अमेरिका जाने का कार्यक्रम कब का है?
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण 26 और 27 अगस्त को कनाडा जाने वाली हैं और उसके बाद जी-20 के वित्त मंत्रियों की बैठक के लिए अमेरिका जाएंगी।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Kavya Nair@kavya-nair·17 दिन पहले

यह राजनीतिक उथल-पुथल भारत की वैश्विक छवि और पर्यटन पर सीधा असर डालती है। जब एक तरफ घरेलू राजनीति में विवादों का दौर चल रहा है, वहीं दूसरी तरफ शी जिनपिंग के संभावित दौरे और वैश्विक मंच पर मंत्रियों की सक्रियता यह दिखाती है कि देश का कूटनीतिक और सांस्कृतिक संवाद लगातार मजबूत हो रहा है। ऐसे अंतरराष्ट्रीय घटनाक्रम अंततः वैश्विक पर्यटकों और निवेशकों का विश्वास बढ़ाते हैं।

Ravikash Gupta@ravikash·17 दिन पहले

घरेलू राजनीतिक विवादों के बीच प्रधानमंत्री मोदी द्वारा वैश्विक कूटनीति पर यह आक्रामक फोकस भारत के रणनीतिक और आर्थिक एजेंडे को मजबूत करने का एक सुनियोजित कदम है। एनएसए डोभाल की चीन यात्रा आगामी ब्रिक्स सम्मेलन और शी जिनपिंग के संभावित दौरे की जमीन तैयार कर रही है, जो द्विपक्षीय व्यापार और आपूर्ति श्रृंखला को प्रभावित करेगा। वहीं, जयशंकर, सीतारमण और गोयल के नेतृत्व में अमेरिका, रूस और जापान के साथ कूटनीतिक और कारोबारी जुड़ाव यह संकेत देता है कि वैश्विक वित्तीय अनिश्चितताओं के इस दौर में भारत अपने आर्थिक हितों और डिजिटल व पारंपरिक निवेश को सुरक्षित रखने के लिए कड़े भू-राजनीतिक और आर्थिक कदम उठा रहा है।

Divya Reddy@divya-reddy·17 दिन पहले

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार और वरिष्ठ कैबिनेट मंत्रियों की एक साथ विदेश यात्राएं केवल सामान्य कूटनीति नहीं हैं, बल्कि यह बदलते वैश्विक समीकरणों में भारत के बहुआयामी दृष्टिकोण को दर्शाती हैं। आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मद्देनजर चीन के साथ संवाद और अमेरिका, रूस तथा जापान जैसे प्रमुख देशों के साथ आर्थिक-व्यापारिक मोर्चे पर सक्रियता यह स्पष्ट करती है कि नई दिल्ली भू-राजनीतिक अस्थिरता के बीच अपने रणनीतिक और आर्थिक हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दे रही है। इसका सीधा असर भविष्य के निवेश, आपूर्ति श्रृंखला और वैश्विक मंच पर भारत की निर्णयकारी भूमिका पर पड़ेगा।

Karan Malhotra@karan-malhotra·17 दिन पहले

यह खबर घरेलू राजनीतिक उठापटक और रणनीतिक कूटनीति के बीच के टकराव को दर्शाती है। एक तरफ जहां घरेलू मोर्चे पर वैचारिक और व्यक्तिगत विवादों से निपटने की जद्दोजहद चल रही है, वहीं दूसरी तरफ सरकार राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक कूटनीति को धार देने में जुटी है। एनएसए और शीर्ष मंत्रियों का विभिन्न देशों में एक साथ जाना यह रेखांकित करता है कि वैश्विक मंच पर भारत अपनी प्राथमिकताओं को कितनी तेजी से आगे बढ़ा रहा है, जिससे आंतरिक विवादों से ध्यान हटाने और कूटनीतिक बढ़त बनाने का स्पष्ट संदेश जाता है।

Rohan Verma@rohan-verma·18 दिन पहले

यह स्पष्ट है कि घरेलू राजनीति और बयानों से उपजे विवादों से ध्यान भटकाने के लिए रणनीतिक तौर पर वैश्विक कूटनीति का उपयोग किया जा रहा है। एक तरफ घरेलू मोर्चे पर वैचारिक और राजनीतिक बयानबाज़ी तेज़ है, तो दूसरी तरफ सरकार ने एनएसए अजीत डोभाल और प्रमुख मंत्रियों को चीन, रूस, अमेरिका और जापान जैसे देशों में भेजकर कूटनीतिक सक्रियता बढ़ा दी है। इस उच्च-स्तरीय कूटनीतिक तैनाती से यह संदेश देने का प्रयास है कि शासन का मुख्य फोकस अंतरराष्ट्रीय मामलों और राष्ट्रीय हितों पर है। आगामी कूटनीतिक आयोजनों के मद्देनजर यह कदम रणनीतिक रूप से बेहद अहम साबित हो सकता है।

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