मुंबई में नगर निगम के जन प्रतिनिधियों और वरिष्ठ अधिकारियों के लिए खरीदी गई सरकारी गाड़ियों को लेकर बड़ा राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया है. महज कुछ ही महीने पहले खरीदी गई नई गाड़ियों को बदलकर महंगी गाड़ियां लेने की कवायद शुरू हो गई है. बृहन्मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) के अधिकारियों और नेताओं ने हाल में मिली नई स्कॉर्पियो-एन एसयूवी गाड़ियों में पीठ दर्द की शिकायत दर्ज कराई है. उनका कहना है कि लंबे सफर के दौरान इन गाड़ियों की सीटें आरामदायक नहीं हैं, जिससे कमर में तकलीफ हो रही है. इसी वजह से अब टोयोटा इनोवा क्रिस्टा कारें खरीदने का नया प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है, जिस पर लगभग 1.5 करोड़ रुपये का अतिरिक्त खर्च आने का अनुमान है.
लंबी दूरी के सफर और स्वास्थ्य संबंधी शिकायतों का हवाला
बीएमसी में प्रस्तुत किए गए तर्कों के अनुसार, मुंबई के दूर-दराज़ उपनगरों से रोज़ाना दक्षिण मुंबई स्थित मुख्यालय तक आने-जाने वाले अधिकारियों और जन प्रतिनिधियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ रहा है. दहिसर, कांदिवली और बोरीवली जैसे दूर के इलाकों से लंबी दूरी तय करके आने वाले नेताओं और प्रशासनिक अफसरों का कहना है कि स्कॉर्पियो-एन की सीटों की बनावट ऐसी है कि लंबे समय तक बैठने पर झटके लगते हैं और पीठ में दर्द शुरू हो जाता है. इसी समस्या के समाधान के लिए टोयोटा इनोवा क्रिस्टा कारों की मांग की गई है. अफसरों का मानना है कि शहर में लंबे निरीक्षण दौरों और लंबी दूरी की यात्राओं के लिए इनोवा क्रिस्टा अधिक आरामदायक और उपयुक्त विकल्प साबित होगी.
फरवरी 2026 की खरीदारी और नए प्रस्ताव का पूरा हिसाब
इस पूरे मामले में वित्तीय आंकड़ों को लेकर तीखी बहस छिड़ गई है. इसी साल फरवरी 2026 में बीएमसी ने लगभग 2 करोड़ रुपये का बजट खर्च करके 13 नई स्कॉर्पियो-एन गाड़ियां खरीदी थीं. उस समय प्रति गाड़ी की कीमत करीब 20 लाख रुपये थी. ये गाड़ियां मेयर, डिप्टी मेयर, विपक्ष के नेता और अन्य वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के उपयोग के लिए आवंटित की गई थीं. हालांकि, अब महज कुछ महीनों के भीतर ही इनमें से 6 गाड़ियों को बदलने की योजना बनाई गई है.
नए प्रस्ताव के तहत बीएमसी प्रशासन का इरादा 6 नई टोयोटा इनोवा क्रिस्टा गाड़ियां खरीदने का है. इनमें से प्रत्येक इनोवा क्रिस्टा की कीमत लगभग 23 लाख रुपये आंकी गई है, जिससे कुल खर्च करीब 1.5 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगा. यह नई गाड़ियां 6 प्रमुख पदाधिकारियों को दी जाएंगी, जिनमें डिप्टी मेयर, सदन के नेता, विपक्ष के नेता, स्थायी समिति के अध्यक्ष, सुधार समिति के अध्यक्ष और शिक्षा समिति के अध्यक्ष शामिल हैं. इस विवाद पर बीएमसी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि पुरानी स्कॉर्पियो-एन गाड़ियों को बेकार नहीं छोड़ा जाएगा, बल्कि उन्हें निगम के उन निचले अधिकारियों को सौंप दिया जाएगा जो वर्तमान में काफी पुरानी गाड़ियों का इस्तेमाल कर रहे हैं.
सत्ता पक्ष का बचाव और विपक्ष का कड़ा ऐतराज़
सरकारी गाड़ियों को बदलने के इस प्रस्ताव पर बीएमसी में तीखी राजनीति शुरू हो गई है. पूर्व मेयर और विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने इस कदम का पुरजोर विरोध किया है. उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ चुनिंदा नेताओं और अधिकारियों की व्यक्तिगत सुविधा के लिए जनता के टैक्स के पैसे का दुरुपयोग किया जा रहा है. किशोरी पेडणेकर का कहना है कि सरकारी वाहनों का इस्तेमाल उनके पूरे निर्धारित कार्यकाल तक किया जाना चाहिए, न कि महज कुछ महीनों के इस्तेमाल के बाद ही उन्हें बदलने की मांग रखी जाए.
दूसरी ओर, मेयर ऋतु तावड़े और मेयर राजू तावड़े ने इस प्रस्ताव का बचाव करते हुए अपनी बात रखी है. मेयर का कहना है कि नई गाड़ियों की खरीद के लिए कोई नया अलग टेंडर जारी नहीं किया जा रहा है, बल्कि अनुबंध के तहत पहले से मौजूद व्यवस्था के माध्यम से ही मॉडल बदलने की मांग की गई है. प्रशासन के अनुसार, ठेके की शर्तों में यह स्पष्ट प्रावधान मौजूद है कि आवश्यकता पड़ने पर वाहन का मॉडल बदला जा सकता है. मेयर ने तर्क दिया कि नेताओं और अफसरों की ओर से लगातार आ रही कमर दर्द की शिकायतों को ध्यान में रखते हुए ही यह कदम उठाया गया है. इसके साथ ही उन्होंने यह दावा भी किया कि विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर ने भी खुद माना था कि वर्तमान गाड़ियों में सफर के दौरान असुविधा का अनुभव होता है.



















