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मिशिगन सीनेट चुनाव में सर्विलांस का मुद्दा गरमाया: अब्दुल अल-सईद ने माइक रोजर्स के पुराने रिकॉर्ड को बनाया सियासी हथियारराजनीति
6 अक्तू॰ 2026, 11:48 pm (2 घंटे पहले)· 0

मिशिगन सीनेट चुनाव में सर्विलांस का मुद्दा गरमाया: अब्दुल अल-सईद ने माइक रोजर्स के पुराने रिकॉर्ड को बनाया सियासी हथियार

मिशिगन में सीनेट सीट के करीबी मुकाबले में अब्दुल अल-सईद ने डिजिटल विज्ञापनों और बिलबोर्ड्स के जरिए रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स के सरकारी निगरानी समर्थन वाले ट्रैक रिकॉर्ड पर तीखा हमला बोला है।

मिशिगन में अमेरिकी सीनेट की बेहद करीबी चुनावी जंग अब मतदाताओं की डिजिटल प्राइवेसी और सरकारी सर्विलांस के संवेदनशील मुद्दे पर केंद्रित हो गई है। डेमोक्रेटिक उम्मीदवार अब्दुल अल-सईद के चुनावी अभियान ने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी माइक रोजर्स को घेरने के लिए डिजिटल वीडियो और बड़े बिलबोर्ड्स का एक आक्रामक विज्ञापन अभियान शुरू किया है। इस अभियान का सीधा मकसद दोनों प्रमुख दलों के मतदाताओं में सर्विलांस और डेटा निगरानी को लेकर फैली चिंताओं को सीधे रोजर्स के पुराने विधायी रिकॉर्ड से जोड़ना है। मध्यवर्ती चुनावों के अंतिम चरण में आया यह कदम राज्य के राजनीतिक समीकरणों को नया मोड़ दे रहा है।

माइक रोजर्स के पुराने बयानों और विधायी रिकॉर्ड पर सीधा वार

अल-सईद के नए कैंपेन वीडियो में रोजर्स के पुराने सार्वजनिक बयानों और भाषणों के अंशों को प्रमुखता से दिखाया गया है। इनमें रोजर्स वर्ष 2001 के पैट्रियट एक्ट की सराहना करते नजर आते हैं। 11 सितंबर के आतंकी हमलों के बाद लागू हुए इस कानून ने कानून प्रवर्तन एजेंसियों की शक्तियों का बड़े पैमाने पर विस्तार किया था और बिना किसी अदालती वारंट के अमेरिकी नागरिकों के टेलीफोन डेटा को इकट्ठा करने की छूट दी थी। वीडियो में रोजर्स के उन बयानों को भी शामिल किया गया है जिनमें उन्होंने गूगल जैसी तकनीकी कंपनियों द्वारा की जाने वाली निगरानी की तारीफ की थी।

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वीडियो में वर्ष 2013 की रोजर्स की एक टिप्पणी को बार-बार दोहराया गया है, जब वह हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष पद पर आसीन थे। उस समय रोजर्स ने कहा था कि यदि आपको यह पता ही नहीं है कि आपकी प्राइवेसी का उल्लंघन हुआ है, तो आपकी प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं माना जा सकता। इसके अलावा रोजर्स के लंबे विधायी करियर में सरकारी सर्विलांस के समर्थन के कई उदाहरण मिलते हैं। वर्ष 2011 में उन्होंने एक ऐसा विधेयक पेश किया था, जो निजी कंपनियों को नेशनल सिक्योरिटी एजेंसी के साथ आम नागरिकों के ईमेल साझा करने की कानूनी अनुमति देता। हालांकि बाद में वर्ष 2014 में रोजर्स ने मेटाडेटा के थोक संग्रह को समाप्त करने के लिए भी एक विधेयक पेश किया था, लेकिन उस पर कभी सदन में मतदान नहीं हो सका।

सड़कों पर बिलबोर्ड्स और फ्लॉक कैमरों को लेकर बढ़ती जन चिंताएं

डिजिटल वीडियो के साथ-साथ अल-सईद का चुनावी अभियान मिशिगन के कई हिस्सों में बड़े बिलबोर्ड्स भी लगाने जा रहा है। इन विज्ञापनों पर 'माइक रोजर्स इज वाचिंग यू' का नारा प्रमुखता से लिखा गया है। कुक पॉलिटिकल रिपोर्ट ने मिशिगन के इस सीनेट मुकाबले को पूरी तरह बराबरी का यानी टॉस-अप माना है। ऐसे में अल-सईद मतदाताओं के बीच तकनीकी निगरानी और कृत्रिम बुद्धिमत्ता यानी AI से जुड़ी प्राइवेसी चिंताओं को भुनाने की पूरी कोशिश कर रहे हैं।

अमेरिका भर में हाल के दिनों में फ्लॉक कैमरों जैसे कानून प्रवर्तन निगरानी उत्पादों के तेजी से बढ़ते प्रसार ने आम नागरिकों के बीच गहरा संशय पैदा किया है। पुलिस विभाग भले ही यह तर्क देते रहे हैं कि इन कैमरों ने अपराधों को नियंत्रित करने में बड़ी मदद की है, लेकिन कई व्यक्तिगत पुलिस अधिकारियों द्वारा अपनी पूर्व प्रेमिकाओं का पीछा करने और संदिग्धों की गलत पहचान होने जैसी घटनाओं ने जनता के गुस्से को भड़का दिया है। इन घटनाओं से पैदा हुए जन आक्रोश को भुनाते हुए अल-सईद सीधे रोजर्स के ट्रैक रिकॉर्ड पर सवाल उठा रहे हैं।

रोजर्स खेमे का बचाव और दूसरे राज्यों की चुनावी रणनीतियां

इस पूरे मामले पर रोजर्स के अभियान के प्रवक्ता ने अपना रुख स्पष्ट करते हुए पहले कहा था कि रोजर्स कानून का पालन करने वाले नागरिकों पर नजर रखने के लिए फ्लॉक कैमरों के अनियंत्रित इस्तेमाल का कड़ा विरोध करते हैं। प्रवक्ता ने यह भी तर्क दिया कि वर्ष 2017 में इस तकनीक की स्थापना होने से पहले ही रोजर्स कांग्रेस छोड़ चुके थे। इसके बावजूद अल-सईद का अभियान रोजर्स के पुराने विधायी फैसलों और वर्तमान मतदाताओं के अविश्वास के बीच सीधी लकीर खींचने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा है।

तकनीक और डेटा से जुड़े मुद्दों को हथियार बनाने की यह रणनीति अन्य राज्यों में भी देखी जा रही है। उदाहरण के लिए, ओहायो के बेहद करीबी सीनेट मुकाबले में डेमोक्रेट शेरॉड ब्राउन ने एक हालिया रिपब्लिकन मेमो के अनुसार, मौजूदा रिपब्लिकन जॉन हस्टेड को राज्य में डेटा सेंटर्स का चेहरा बताकर आड़े हाथों लिया था। मिशिगन का यह मुकाबला दोनों पार्टियों के लिए बेहद अहम है, क्योंकि सीनेट में बहुमत हासिल करने के डेमोक्रेट्स के ज्यादातर रास्ते मिशिगन की इस सीट को अपने कब्जे में रखने पर निर्भर करते हैं।

डेमोक्रेटिक गठबंधन को एकजुट करने के लिए बड़े नेताओं का सहारा

प्राइमरी चुनावों के दौरान डेमोक्रेटिक गठबंधन में आई दरारों को पाटने के लिए अल-सईद अब पार्टी के कद्दावर नेताओं का साथ ले रहे हैं। प्राइमरी के दौरान गाजा युद्ध को नरसंहार बताने और इजरायल को अमेरिकी सैन्य सहायता रोकने की मांग करने के बाद अल-सईद को यहूदी विरोधी होने के आरोपों और हमलों का सामना करना पड़ा था। इस बिखराव को ठीक करने के लिए उन्होंने सोमवार को घोषणा की कि वह अक्टूबर के अंत में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा के साथ एक बड़ी रैली करेंगे।

इसके साथ ही मामले से जुड़े एक सूत्र के अनुसार, मध्यवर्ती चुनावों से ठीक पहले के अंतिम हफ्तों में अल-सईद मिशिगन भर में एक व्यापक प्रचार अभियान शुरू करेंगे। इस चुनावी दौरे में प्रोग्रेसिव खेमे के प्रमुख नेता, जिनमें सीनेटर बर्नी सैंडर्स और प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ शामिल हैं, अल-सईद के साथ मंच साझा करते दिखाई देंगे।

सवाल-जवाब

अब्दुल अल-सईद ने माइक रोजर्स के खिलाफ किस मुद्दे पर विज्ञापन अभियान शुरू किया है?
अल-सईद ने माइक रोजर्स के सरकारी निगरानी और सर्विलांस के पुराने विधायी समर्थन को मुद्दा बनाकर डिजिटल वीडियो और बिलबोर्ड विज्ञापन जारी किए हैं।
माइक रोजर्स ने 2013 में प्राइवेसी को लेकर क्या बयान दिया था?
हाउस इंटेलिजेंस कमेटी के अध्यक्ष रहते हुए रोजर्स ने कहा था कि यदि आपको अपनी प्राइवेसी के उल्लंघन का पता ही नहीं है, तो आपकी प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं हुआ है।
फ्लॉक कैमरों को लेकर जनता में नाराजगी क्यों बढ़ रही है?
पुलिस अधिकारियों द्वारा निजी स्तर पर पूर्व परिचितों का पीछा करने और संदिग्धों की गलत पहचान होने की घटनाओं के कारण जनता में इन कैमरों के प्रति विरोध बढ़ रहा है।
रोजर्स के अभियान ने इन आरोपों पर क्या सफाई दी है?
रोजर्स के प्रवक्ता ने कहा कि वह आम नागरिकों पर नजर रखने के लिए फ्लॉक कैमरों के अनियंत्रित इस्तेमाल का कड़ा विरोध करते हैं और वह इस तकनीक के 2017 में बनने से पहले ही कांग्रेस छोड़ चुके थे।
अल-सईद के समर्थन में कौन से बड़े नेता मिशिगन में प्रचार करेंगे?
अल-सईद के समर्थन में पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा अक्टूबर के अंत में रैली करेंगे, जबकि सीनेटर बर्नी सैंडर्स और प्रतिनिधि अलेक्जेंड्रिया ओकासियो-कोर्टेज़ भी प्रचार में शामिल होंगे।
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टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·1 घंटे पहले

प्राइवेसी का मुद्दा इस चुनाव में बड़ा गेम चेंजर लग रहा है। क्या इस विज्ञापन का असर सच में ग्रामीण इलाकों के वोटर्स पर भी पड़ेगा?

Rohan Verma@rohan-verma·1 घंटे पहले

अमेरिका में भी नेता ऐसी बातें करते हैं कि जानकर हैरानी होती है। कुछ साल पहले जब मैं लखनऊ में एक आरटीआई वर्कशॉप कवर कर रहा था, तब अधिकारियों ने भी यही कहा था कि जब तक जनता को पता न चले, प्राइवेसी का उल्लंघन नहीं होता।

Vikram Yadav@vikram-yadav·1 घंटे पहले

रोहन जी, लखनऊ वाले अधिकारियों वाली बात सुनकर तो हंसी भी आई और गुस्सा भी। नेताओं की सोच दुनिया भर में एक जैसी ही होती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·2 घंटे पहले

प्राइवेसी और सर्विलांस का मुद्दा चुनावों में बहुत असर डालेगा, जनता डेटा सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गई है।

Ravikash Gupta@ravikash·2 घंटे पहले

करन जी, बिल्कुल सही कहा। आजकल हर कोई अपने डेटा को लेकर फिक्रमंद है, इसलिए माइक रोजर्स का पुराना रिकॉर्ड इस चुनाव में बड़ा मुद्दा बन गया है।

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