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टीएमसी में बड़ा फेरबदल: सायोनी घोष की छुट्टी, कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता की कमान — बगावत के बीच ममता का सख्त संदेशराजनीति
14 जून 2026, 10:24 am (46 दिन पहले)· 0

टीएमसी में बड़ा फेरबदल: सायोनी घोष की छुट्टी, कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता की कमान — बगावत के बीच ममता का सख्त संदेश

विधानसभा चुनाव में हार और भीतरी बगावत से जूझ रही तृणमूल कांग्रेस ने संगठन में बड़े बदलाव किए हैं; सायोनी घोष को युवा इकाई की अध्यक्षता से हटाया गया, जबकि कुणाल घोष और सौगत रॉय को नई जिम्मेदारियां मिलीं।

हाल के विधानसभा चुनाव में मिली बड़ी शिकस्त के बाद तृणमूल कांग्रेस (TMC) इन दिनों अपने सबसे कठिन दौर से गुजर रही है। पार्टी के भीतर असंतोष की चिंगारी अब खुली बगावत में बदल चुकी है और नेतृत्व पर लगातार सवाल उठ रहे हैं। इसी दबाव से निपटने के लिए पार्टी ने संगठन में कई अहम फेरबदल का ऐलान किया है। ये फैसले शनिवार को पार्टी सुप्रीमो ममता बनर्जी के आवास पर हुई वरिष्ठ नेताओं की बैठक के बाद सामने आए, और इन्हें डगमगाते संगठन को दोबारा कसने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है।

किसे क्या मिला, किसकी विदाई हुई

बदलावों में सबसे ज्यादा चर्चा युवा तृणमूल कांग्रेस की अध्यक्ष सायोनी घोष को पद से हटाए जाने की है। दूसरी ओर, अपने बेबाक अंदाज के लिए पहचाने जाने वाले नेता कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता जिला इकाई का अध्यक्ष बनाया गया है। साथ ही, अनुभवी सांसद सौगत रॉय को लोकसभा में पार्टी का सलाहकार नियुक्त किया गया है। यह पूरा फेरबदल ऐसे मोड़ पर हुआ है जब पार्टी अपने इतिहास के सबसे गहरे आंतरिक संकट से जूझ रही है — असहमति अब दबी-छिपी नहीं रही, बल्कि बागी नेताओं का एक बड़ा धड़ा खुलकर नेतृत्व के सामने खड़ा हो गया है।

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उत्तर कोलकाता की कमान कुणाल घोष को क्यों अहम

कुणाल घोष को उत्तर कोलकाता की जिम्मेदारी सौंपे जाने को राजनीतिक रूप से बेहद सोचा-समझा कदम माना जा रहा है। अब तक यह इकाई एक कोर कमेटी के जरिए चल रही थी, जिसकी अगुवाई वरिष्ठ सांसद सुदीप बंद्योपाध्याय कर रहे थे। पेच यहीं है — सुदीप बंद्योपाध्याय ने शनिवार को ही उस पत्र पर दस्तखत किए थे, जिसके जरिए बागी गुट खुद को टीएमसी के भीतर एक अलग समूह के रूप में मान्यता दिलाने की मांग कर रहा है। ऐसे में इस इकाई की कमान कुणाल घोष को थमाना ममता बनर्जी की ओर से एक साफ राजनीतिक संदेश के तौर पर पढ़ा जा रहा है।

संसदीय रणनीति पर सौगत रॉय का दांव

सौगत रॉय को लोकसभा में सलाहकार की भूमिका देकर पार्टी ने संकेत दिया है कि वह संसद के मोर्चे पर अपनी रणनीति को धार देना चाहती है। माना जा रहा है कि सदन के भीतर और बाहर खड़ी चुनौतियों से निपटने में उनका लंबा अनुभव पार्टी के काम आएगा। शनिवार की इस बैठक में अभिषेक बनर्जी और कल्याण बनर्जी समेत कई वरिष्ठ चेहरे मौजूद रहे। नेतृत्व ने मौजूदा हालात पर लंबी चर्चा की और संगठन को फिर से मजबूत करने के रास्तों पर मंथन किया।

लोकसभा में बागी गुट की चुनौती

इस बीच पार्टी की मुश्किलें घटने के बजाय बढ़ती ही जा रही हैं। काकोली घोष दस्तिदार की अगुवाई वाला बागी खेमा दावा कर रहा है कि पार्टी के 28 में से 19 लोकसभा सांसद उसके साथ हैं। इस गुट ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मिलकर खुद को 'असली' टीएमसी के रूप में मान्यता दिलाने की मांग रखने का मन बनाया है। बागियों का आरोप है कि मौजूदा नेतृत्व आम जनता और जमीनी कार्यकर्ताओं से दूर हो चुका है। वहीं पार्टी नेतृत्व इन दावों को सिरे से खारिज करते हुए संगठन पर अपनी पकड़ बनाए रखने में जुटा है।

विधानसभा से लेकर इस्तीफों तक — हर तरफ दरार

यह संकट सिर्फ लोकसभा तक सीमित नहीं है। पश्चिम बंगाल विधानसभा में भी पार्टी को तगड़ा झटका लगा है। यहां 80 में से 64 विधायक अलग हो चुके हैं और उन्हें विधानसभा अध्यक्ष की ओर से मान्यता भी मिल चुकी है। बागी खेमे के नेता ऋतब्रत बनर्जी को विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के रूप में मान्यता दे दी गई है, हालांकि इस फैसले पर कानूनी जंग जारी है और मामला कलकत्ता हाईकोर्ट में चुनौती के घेरे में है। इसी बीच पूर्व मंत्री मानस भुइयां के पार्टी छोड़ने से हालात और बिगड़ गए हैं। एक के बाद एक हो रहे इस्तीफों और टूट ने ममता बनर्जी के सामने पार्टी को बिखरने से बचाने की सबसे बड़ी परीक्षा खड़ी कर दी है।

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