कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता और लोकसभा सांसद राहुल गांधी ने एक बार फिर केंद्र सरकार को आड़े हाथों लिया है। नई दिल्ली में दिए अपने ताजा बयान में राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि सरकार देश के युवाओं यानी जेन ज़ी की आवाज को दबाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि प्रशासन डरा-धमकाकर देश की युवा पीढ़ी को खामोश नहीं कर सकता। अपने इस हमले में उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह का नाम लेते हुए केंद्र सरकार की नीतियों पर तीखे सवाल उठाए। पिछले कुछ समय से वह सीजेपी विरोध प्रदर्शन के मुद्दे पर सरकार को लगातार घेरते आ रहे हैं।
सोशल मीडिया कार्रवाई और युवाओं को चेतावनी पर राहुल गांधी का रुख
राहुल गांधी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट साझा करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृह मंत्री अमित शाह पर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने लिखा कि सरकार युवाओं पर दबाव बनाने का प्रयास बंद करे। अपने संदेश में उन्होंने आरोप लगाया कि प्रदर्शनकारियों पर शारीरिक बल प्रयोग किया गया, उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा रही हैं और उनके सोशल मीडिया खातों को बंद कराया जा रहा है। सरकार को सचेत करते हुए उन्होंने एक सीधा संदेश दिया। राहुल गांधी ने लिखा, "आप भारत का अतीत हैं, भारत के भविष्य के साथ कैसा व्यवहार करना चाहिए, इसे लेकर सावधान रहें।" उनका कहना था कि युवाओं के भविष्य के साथ इस तरह का बर्ताव देश के हित में नहीं है।
संसद में बोलने से रोकने और माफी की मांग का पूरा घटनाक्रम
संसद की कार्यवाही को लेकर भी राहुल गांधी ने सरकार पर प्रक्रियात्मक पक्षपात का आरोप लगाया। बुधवार को आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने खुलासा किया था कि उन्हें लोकसभा में अपनी बात रखने का अवसर प्रदान नहीं किया गया। उन्होंने दावा किया कि पीठ की तरफ से यह शर्त रखी गई थी कि यदि वह गृह मंत्री अमित शाह के संदर्भ में दिए गए अपने बयान पर माफी मांगते हैं, तभी उन्हें बोलने की अनुमति मिलेगी। हालांकि, कांग्रेस नेता ने किसी भी सूरत में माफी मांगने से साफ इनकार कर दिया।
उन्होंने बताया कि उन्होंने लोकसभा अध्यक्ष से बार-बार अनुरोध किया कि वे सदन में व्यवस्था बनाए रखें और उन्हें अपनी बात रखने का समय दें। लेकिन उनकी अपीलों को अनसुना कर दिया गया। राहुल गांधी के अनुसार, संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह समेत कई अन्य केंद्रीय मंत्रियों को बार-बार बोलने का मौका दिया गया, जबकि एक विपक्षी सांसद के तौर पर उन्हें लगातार बोलने से रोका गया।
प्रदर्शनकारी छात्रों पर पैलेट गन के इस्तेमाल का दावा
विरोध प्रदर्शनों पर हुई पुलिस कार्रवाई का ब्योरा देते हुए राहुल गांधी ने दावा किया कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर बेहद सख्त कदम उठाए गए हैं। उन्होंने कहा कि प्रदर्शनकारियों पर पैलेट गन का इस्तेमाल किया गया, जिसके चलते एक छात्र की आंख में गंभीर चोट आई है और उसकी दृष्टि जाने का खतरा पैदा हो गया है। राहुल गांधी ने यह भी दावा किया कि उन्होंने खुद एम्स का एक मेडिकल सर्टिफिकेट देखा है, जिसमें छात्र को पैलेट गन की गोली लगने की पुष्टि हुई है।
गृह मंत्रालय की जानकारी और फोन कॉल पर उठाए सवाल
पैलेट गन के इस्तेमाल को लेकर राहुल गांधी ने सीधे गृह मंत्री अमित शाह की भूमिका पर सवाल खड़े किए। उनका तर्क था कि इस प्रकार के घातक हथियारों का इस्तेमाल गृह मंत्री की जानकारी के बिना संभव ही नहीं है। राहुल गांधी ने संसद परिसर का एक वाकया साझा करते हुए कहा कि उन्होंने स्वयं संसद भवन के भीतर अमित शाह को पुलिस अधिकारियों से फोन पर बातचीत करते देखा था। इसके अलावा केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह को भी लगातार फोन आ रहे थे। राहुल गांधी के मुताबिक, इन गतिविधियों से साफ जाहिर होता है कि सड़कों पर छात्रों के साथ जो कुछ भी हो रहा था, उसकी पूरी जानकारी सरकार और उसके मंत्रियों को थी।



















