पंजाब राज्य के अमृतसर जिले में भारत-पाकिस्तान सीमा के निकट स्थित रमदास थाना क्षेत्र के एक गांव में 21 अगस्त को हुए घातक हैंड ग्रेनेड विस्फोट मामले में कानून प्रवर्तन एजेंसियों को बड़ी सफलता हासिल हुई है। अमृतसर देहाती पुलिस तथा स्टेट इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) द्वारा चलाए गए एक साझा अभियान के दौरान इस आपराधिक वारदात में शामिल तीन मुख्य आरोपियों को दबोच लिया गया है। पकड़े गए व्यक्तियों में प्रतिबंधित संगठन बब्बर खालसा इंटरनेशनल (BKI) से जुड़े कुख्यात आतंकी हैप्पी पशियां की माता सुखविंदर कौर शामिल हैं। इसके अलावा पुलिस ने वारदात स्थल पर विस्फोटक फेंकने वाले दो स्थानीय नवयुवकों को भी गिरफ्तार किया है। इस पूरे मामले में आतंकी हैप्पी पशियां की सगी बहन किरनदीप कौर फिलहाल पुलिस की पकड़ से बाहर बनी हुई है, जिसकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस दल लगातार दबिश दे रहे हैं।
सिंगापुर से रची गई पूरी साजिश और पैसों का प्रलोभन
सीमा सुरक्षा क्षेत्र के उप महानिरीक्षक (DIG Border Range) हरमनबीर सिंह गिल द्वारा साझा की गई आधिकारिक जानकारी के अनुसार, इस पूरे आपराधिक घटनाक्रम का ताना-बाना विदेश में बैठकर बुना गया था। तकनीकी जांच और खुफिया इनपुट से यह तथ्य उजागर हुआ है कि दक्षिण पूर्व एशियाई देश सिंगापुर में रह रहे सैंडी नामक व्यक्ति ने इस विस्फोट की पटकथा लिखी थी। सैंडी को आतंकी हैप्पी पशियां का बेहद करीबी सहयोगी बताया जाता है। जांचकर्ता अधिकारियों के मुताबिक, साजिशकर्ताओं ने वारदात को अमलीजामा पहनाने के लिए स्थानीय युवाओं को भारी धनराशि का प्रलोभन देकर अपनी साजिश का मोहरा बनाया था।
यूट्यूब वीडियो से सीखा ग्रेनेड फेंकने का तरीका और 30 हजार की एडवांस रकम
हिरासत में लिए गए दोनों हमलावर युवकों की पहचान जगरूप सिंह एवं विश्वासप्रीत सिंह के रूप में स्थापित हुई है। पुलिस जांच में यह बात सामने आई है कि दोनों आरोपी आपस में पुराने परिचित हैं और उन्होंने धारोवाली स्थित स्कूल से 12वीं कक्षा तक शिक्षा प्राप्त की थी। वर्तमान समय में दोनों ही युवा बेरोजगार थे, जिसका फायदा साजिशकर्ताओं ने उठाया। हमला करने के बदले इन दोनों नवयुवकों को कुल 1 लाख रुपये देने का करार किया गया था। हालांकि, वारदात को अंजाम देने से पहले उन्हें अग्रिम भुगतान के रूप में केवल 30 हजार रुपये ही प्रदान किए गए थे। पूछताछ के दौरान चौंकाने वाला खुलासा यह भी हुआ है कि इन आरोपियों के पास विस्फोटक चलाने का कोई पूर्व अनुभव नहीं था, इसलिए उन्होंने यू-ट्यूब पर ट्यूटोरियल वीडियो देखकर हैंड ग्रेनेड की सुरक्षा पिन निकालने और उसे लक्षित स्थान पर फेंकने का तरीका सीखा था।
सरपंच चुनाव की पुरानी रंजिश और हवाई फायरिंग की पृष्ठभूमि
सुरक्षा एजेंसियों की तफ्तीश में इस आतंकी घटना के तार स्थानीय स्तर पर चल रही 3-4 साल पुरानी चुनावी और राजनीतिक रंजिश से भी जुड़ते दिखाई दे रहे हैं। पशियां परिवार और जिस गांव में ग्रेनेड फेंका गया, वे आसपास के इलाके में ही स्थित हैं। दोनों पक्षों के मध्य गांव में अपनी सरपंची का वर्चस्व स्थापित करने को लेकर लंबे समय से खींचतान चल रही थी। मुख्य विस्फोट की घटना से करीब 3-4 दिन पूर्व पीड़ित पक्ष और आतंकी हैप्पी पशियां की बहन किरनदीप कौर के बीच उग्र कहासुनी हुई थी, जिसके दौरान क्षेत्र में खुलेआम हवाई फायरिंग भी की गई थी। इस विवाद के तुरंत पश्चात सुखविंदर कौर, उनकी बेटी किरनदीप कौर तथा सिंगापुर में रह रहे सैंडी ने परस्पर समन्वय बनाकर इस हमले को अंजाम देने की योजना तैयार की।
पाकिस्तान से हथियारों की तस्करी और सीमा पार का नेटवर्क
पुलिस पड़ताल में विस्फोटक सामग्री की आपूर्ति को लेकर एक और गंभीर सुरक्षा पहलू सामने आया है। जांच के दौरान यह बात प्रमाणित हुई है कि हमले में उपयोग किया गया हैंड ग्रेनेड सीमा पार पाकिस्तान से अवैध तस्करी के माध्यम से भारतीय सीमा में दाखिल कराया गया था। सुरक्षा एजेंसियां अब उस पूरे लॉजिस्टिक्स और सप्लाई नेटवर्क को बेनकाब करने में जुटी हैं, जिसके जरिए यह सैन्य ग्रेड का विस्फोटक भारतीय क्षेत्र तक पहुंचाया गया था। अदालत ने गिरफ्तार किए गए तीनों आरोपियों जगरूप सिंह, विश्वासप्रीत सिंह और सुखविंदर कौर को 5 दिन की पुलिस रिमांड पर भेजने का आदेश दिया है, ताकि गहन पूछताछ के दौरान अंतर्राष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश किया जा सके।
सैंडी के प्रत्यर्पण की विधिक प्रक्रिया और व्यापक जांच
सिंगापुर में शरण लिए मुख्य साजिशकर्ता सैंडी को कानून के शिकंजे में लाने के लिए पंजाब पुलिस ने भारत सरकार के माध्यम से अंतरराष्ट्रीय प्रत्यर्पण की औपचारिक कानूनी कार्यवाही आरंभ कर दी है। इसके साथ ही फरार चल रही किरनदीप कौर की तलाश में विशेष पुलिस दस्ते संभावित ठिकानों पर छापेमारी कर रहे हैं। जांच अधिकारी इस बिंदु का भी सूक्ष्मता से विश्लेषण कर रहे हैं कि यह वारदात महज व्यक्तिगत चुनावी रंजिश का नतीजा थी या फिर इसके पीछे देश की शांति भंग करने वाला कोई व्यापक आतंकी नेटवर्क काम कर रहा था।





















