यूनाइटेड किंगडम की राजधानी लंदन में असमय जान गंवाने वाले भारतीय मूल के दीपक वाधवा के पार्थिव शरीर को स्वदेश लाने की आधिकारिक कवायद शुरू हो गई है। मृतक के परिजन उनके पार्थिव शरीर को भारत लाकर हिंदू रीति-रिवाजों और पारिवारिक परंपराओं के अनुसार अंतिम विदाई देना चाहते हैं। इस मामले में किए गए औपचारिक अनुरोध के बाद त्वरित कदम उठाए गए और 24 घंटे के भीतर आवश्यक प्रशासनिक अनुमतियां जारी करने की दिशा में प्रगति हुई। लंदन में शोकाकुल परिवार को नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट यानी एनओसी सौंपने की प्रक्रिया आगे बढ़ा दी गई है, जिससे शव को विमान के जरिए भारत भेजने की राह आसान हो गई है।
भाजपा नेता विजय जॉली का पत्र और मानवीय पहल
इस पूरे मामले को सुलझाने और कानूनी अड़चनों को दूर करने के लिए भारतीय जनता पार्टी के नेता डॉ. विजय जॉली ने पहल की थी। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को एक पत्र लिखकर शोक संतप्त परिवार की स्थिति से अवगत कराया था और तुरंत राजनयिक मदद पहुंचाने का निवेदन किया था। जॉली ने अपने पत्र में उल्लेख किया था कि भारत के विदेश मंत्रालय और लंदन स्थित भारतीय उच्चायोग को जरूरी निर्देश दिए जाएं, ताकि कागजी औपचारिकताओं में बिना किसी देरी के सभी स्वीकृतियां मिल सकें। प्रधानमंत्री स्तर से दिए गए निर्देशों के बाद दूतावास स्तर पर काम में तेजी आई। इस मानवीय सहयोग के लिए दीपक वाधवा की पत्नी शिल्पी सैनी ने आभार व्यक्त किया है, जबकि जॉली ने इस त्वरित समाधान का श्रेय प्रधानमंत्री कार्यालय की संवेदनशीलता को दिया।
दीपक वाधवा का जीवन और परिवार की पृष्ठभूमि
पारिवारिक विवरण के अनुसार दीपक वाधवा का जन्म 1 अक्टूबर 1982 को पंजाब के जालंधर शहर में हुआ था। वह अक्टूबर 2017 में रोजगार और बेहतर भविष्य की तलाश में यूनाइटेड किंगडम चले गए थे। वहां रहते हुए 21 अक्टूबर 2026 को लंदन में उनका आकस्मिक निधन हो गया। उनके पास 14 नवंबर 2019 को जारी किया गया भारतीय पासपोर्ट था, जिसकी वैधता 13 नवंबर 2029 तक दर्ज थी। इस पासपोर्ट पर पांच वर्ष की अवधि का भारतीय वीज़ा भी लगा हुआ था। आगे चलकर सितंबर 2025 में दीपक को लंदन में ब्रिटिश नागरिकता प्राप्त हुई थी। उनके परिवार में उनकी पत्नी शिल्पी सैनी और पुत्री मेहर वाधवा हैं, जिनके पास भारत सरकार द्वारा जारी ओवरसीज़ सिटीज़न ऑफ़ इंडिया यानी ओसीएल कार्ड मौजूद है।
विदेश में निधन के बाद स्वदेश वापसी की कानूनी औपचारिकताएं
किसी भी व्यक्ति के विदेश में निधन होने पर पार्थिव शरीर को भारत वापस लाना एक संवेदनशील और जटिल कानूनी प्रक्रिया मानी जाती है। इसमें स्थानीय प्रशासन से मृत्यु प्रमाण पत्र हासिल करने, शव परीक्षण रिपोर्ट, स्थानीय पुलिस की अनुमति और भारतीय उच्चायोग से एनओसी लेना अनिवार्य होता है। दीपक वाधवा को ब्रिटिश नागरिकता मिल चुकी थी, जिसके चलते नियमों के तहत अतिरिक्त मंजूरियों की आवश्यकता थी। उच्चायोग द्वारा एनओसी जारी किए जाने के बाद अब अंतरराष्ट्रीय विमानन नियमों के तहत पार्थिव शरीर को नई दिल्ली और वहां से उनके गृह नगर जालंधर ले जाने की तैयारी की जा रही है, ताकि शोकाकुल परिवार अपनी आस्था के अनुरूप उनका दाह संस्कार संपन्न कर सके।



















