पंजाब की सियासत में सत्तारूढ़ आम आदमी पार्टी के भीतर असंतोष गहराता जा रहा है। पटियाला जिले के दो विधायकों के पद छोड़ने के ठीक बाद अब अमृतसर नॉर्थ विधानसभा क्षेत्र से विधायक कुंवर विजय प्रताप सिंह ने भी विधानसभा की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। पिछले काफी समय से वह पार्टी नेतृत्व के कामकाज के तौर-तरीकों से असहज चल रहे थे और आखिरकार उन्होंने सदन से हटने का फैसला ले लिया। जून 2025 में पार्टी पहले ही उन्हें पांच साल की अवधि के लिए निलंबित कर चुकी थी, जिसके बाद से उनके और संगठन के बीच की दूरी लगातार बढ़ती जा रही थी। इस ताजा घटनाक्रम ने राज्य सरकार और पार्टी संगठन के भीतर चल रही अंदरूनी खींचतान को खुलकर सामने ला दिया है।
राज्य की व्यवस्था और कार्यप्रणाली पर उठाए कड़े सवाल
सदन की सदस्यता छोड़ने के बाद कुंवर विजय प्रताप ने जनता से मुखातिब होते हुए शासन के तौर-तरीकों पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने सार्वजनिक रूप से साझा किए गए अपने संदेश में कहा कि आज पंजाब नशा, जबरन वसूली, गुंडागर्दी और भ्रष्टाचार की गंभीर समस्याओं से जूझ रहा है। उनका कहना था कि सूबे को इन जटिल हालातों से बाहर निकालने के लिए एक नए सिरे से प्रगतिशील और खुशहाल राज्य बनाने की दिशा में सामूहिक कदम उठाने होंगे। उन्होंने केवल फीता काटने और मामूली राजनीतिक दिखावे तक सीमित रहने वाली सोच से बाहर निकलने पर जोर दिया। इसके साथ ही उन्होंने अमृतसर की जनता के प्रति आभार जताते हुए कहा कि लोगों से मिले समर्थन और सम्मान के वह सदैव ऋणी रहेंगे।
विधायक के रूप में कार्यों का दिया ब्योरा
अपने कार्यकाल का लेखा-जोखा पेश करते हुए उन्होंने दावा किया कि एक जनप्रतिनिधि के नाते उन्होंने अपने 90 प्रतिशत तय लक्ष्य पूरे किए हैं। उनका मानना है कि एक विधायक के अधिकार और जिम्मेदारियां स्पष्ट होती हैं, जबकि पार्षद, मेयर और सांसद का दायरा बिल्कुल अलग होता है। उन्होंने अपने स्तर पर किए गए तमाम कार्यों का इलाकावार ब्योरा भी जनता के सामने रखा है, जो सार्वजनिक मंचों और अखबारों में दर्ज है। उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी सबसे अहम उपलब्धि सियासत में चली आ रही हुक्म चलाने वाली 'माई-बाप' संस्कृति को खत्म करना रहा है। जनता को अपनी प्रेरणा मानकर उन्होंने जमीनी समस्याओं के समाधान को ही हमेशा प्राथमिकता दी।
सदन में उठाए गए स्थानीय और संवेदनशील मुद्दे
विधानसभा के भीतर अपनी सक्रियता का उल्लेख करते हुए कुंवर विजय प्रताप ने कहा कि उन्होंने कभी भी जनहित के मसलों पर चुप्पी नहीं साधी। अमृतसर शहर में पानी और सीवेज की किल्लत, गंदे नालों की बदहाली, सर्किट हाउस और कंपनी बाग से जुड़े मामलों को उन्होंने लगातार उठाया। इसके अलावा गुरु नानक देव यूनिवर्सिटी, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज और स्वरूप रानी कॉलेज से जुड़े प्रशासनिक व शैक्षणिक सवालों को भी सदन में पुरजोर तरीके से रखा। उन्होंने बरगारी बेअदबी के संवेदनशील मामले को भी सदन में बेबाकी से उठाया था। उनका कहना था कि यह पहला मौका था जब किसी जनप्रतिनिधि ने विधानसभा में सीधे विशेष मोहल्लों और बस्तियों का नाम लेकर स्थानीय बुनियादी समस्याओं को दर्ज कराया। उन्होंने भविष्य की रणनीति बनाते हुए साफ-सुथरी राजनीति और पारदर्शी प्रशासन को आगे बढ़ाने का संकल्प दोहराया और कहा कि उनका एकमात्र लक्ष्य पंजाब को सबसे आगे रखना है।
पटियाला के दो विधायकों ने भी छोड़ा था साथ
अमृतसर नॉर्थ से आए इस इस्तीफे से पहले पटियाला जिले में पार्टी को दोहरे झटके का सामना करना पड़ा था। पटियाला की सनौर सीट से विधायक हरमीत सिंह पठानमाजरा ने अपनी सदस्यता छोड़ दी थी। इसके साथ ही समाना विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले विधायक चेतन सिंह जोड़ामाजरा ने भी आम आदमी पार्टी से अपना इस्तीफा दे दिया था। एक ही दिन के भीतर तीन विधायकों के इस तरह सदन और दल से अलग होने से राज्य के सियासी गलियारों में भारी हलचल मच गई है और विपक्ष को सरकार की घेराबंदी का नया मौका मिल गया है।



















