पंजाब की आम आदमी पार्टी सरकार को सुप्रीम कोर्ट से तुरंत कोई राहत नहीं मिल सकी है। मुख्यमंत्री भगवंत मान के दफ्तर से जुड़े भ्रष्टाचार के आरोपों के मामले में राज्य सरकार ने शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था। पंजाब सरकार चाहती थी कि इस मसले पर आज ही तत्काल सुनवाई की जाए, लेकिन सीजेआई सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने इस आग्रह को स्वीकार करने से साफ मना कर दिया। प्रधान न्यायाधीश ने स्पष्ट किया कि मामले को तुरंत नहीं सुना जाएगा और इस पर विचार अगले दिनों में किया जा सकता है।
अदालत कक्ष में तत्काल सुनवाई की मांग और जिरह
पंजाब सरकार का पक्ष रख रहे वरिष्ठ अधिवक्ता विकास सिंह ने पीठ के समक्ष याचिका पेश करते हुए मामले पर उसी दिन सुनवाई करने का पुरजोर अनुरोध किया। इस पर सीजेआई सूर्यकांत ने दो टूक जवाब देते हुए कहा कि आज इस याचिका पर सुनवाई संभव नहीं है। पीठ ने संकेत दिया कि वे कल प्रयास करेंगे या फिर परसों मामले को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर सकते हैं।
वरिष्ठ वकील ने अपनी दलील को आगे बढ़ाते हुए सवाल किया कि क्या कल इस पर विचार किया जा सकता है, क्योंकि चुनावी माहौल के बीच इस तरह के मामलों को जानबूझकर तूल दिया जा रहा है। उन्होंने अपनी बात के समर्थन में विजय मदनलाल चौधरी से जुड़े चर्चित कानूनी फैसले का भी हवाला दिया। इसके साथ ही वरिष्ठ अधिवक्ता ने यह दलील भी पेश की कि यह पूरा घटनाक्रम साफ तौर पर देश के संघीय ढांचे के सिद्धांतों का गंभीर उल्लंघन है।
सीजेआई का रुख और हाई कोर्ट का निर्देश
वरिष्ठ वकील की इन दलीलों के जवाब में सीजेआई सूर्यकांत ने स्पष्ट किया कि अदालत पहले यह जांचेगी कि कुल कितने मामले लंबित हैं। उन्होंने साफ शब्दों में दोहराया कि अभी इस मामले में कुछ नहीं होने वाला है। इसके बाद प्रधान न्यायाधीश ने आश्वस्त करते हुए कहा कि वे कल प्रयास करेंगे, नहीं तो परसों निश्चित रूप से इस मामले को देखेंगे।
यह पूरा कानूनी विवाद पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट द्वारा पारित किए गए एक कड़े आदेश से जुड़ा है। हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस अश्वनी कुमार मिश्रा और जस्टिस रोहित कपूर की खंडपीठ ने सोमवार को केंद्रीय जांच ब्यूरो यानी सीबीआई को औपचारिक निर्देश जारी किए थे। अदालत ने जांच एजेंसी को आदेश दिया था कि मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के ओएसडी राजबीर सिंह घुमन पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की निष्पक्ष पड़ताल के लिए नियमित आपराधिक मामला दर्ज किया जाए।
हाई कोर्ट ने अपने निर्देश में पंजाब सरकार और पंजाब पुलिस को यह भी सख्त हिदायत दी थी कि वे मामले की निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करने के लिए केंद्रीय एजेंसी को हर संभव सहयोग उपलब्ध कराएं। इसी आदेश को चुनौती देने के लिए राज्य सरकार तुरंत सुप्रीम कोर्ट पहुंची थी।



















