राजस्थान के अजमेर शहर के एक बेहद छोटे बच्चे ने अपनी असाधारण प्रतिभा और कड़े अनुशासन के दम पर स्केटिंग की दुनिया में नया इतिहास रच दिया है. महज 2 साल, 10 महीने और 7 दिन की आयु में प्रांश दगदी ने वह करिश्मा कर दिखाया है जो बड़े-बड़े खिलाड़ियों के लिए भी आसान नहीं होता. उन्होंने अतिरिक्त भार के साथ तीव्र गति से स्केटिंग करते हुए एक अनूठा विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है, जिससे उनके परिवार सहित समूचे शहर का मान बढ़ा है.
प्रमाण पत्र के साथ मिली आधिकारिक मान्यता
इस नन्हे स्केटिंग उस्ताद के साहसिक प्रदर्शन को ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ ने विधिवत सत्यापित करते हुए आधिकारिक प्रमाण पत्र जारी किया है. रिकॉर्ड के विवरण के मुताबिक, प्रांश ने अपने नन्हे शरीर पर पूरे 3 किलोग्राम का भार उठाया और स्केटिंग ट्रैक पर उतर गए. उन्होंने 60 मीटर की पूरी दूरी को महज 1 मिनट 12 सेकंड के भीतर नाप लिया. संतुलन, गति और वजन का ऐसा तालमेल इस नन्ही उम्र में देखने वालों को अचरज में डाल देता है.
इस संपूर्ण प्रयास की वीडियो रिकॉर्डिंग और सभी तकनीकी साक्ष्यों को ‘बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ की केंद्रीय वेरिफिकेशन कमेटी के समक्ष प्रस्तुत किया गया था. विशेषज्ञों की समिति द्वारा हर पहलू की बारीकी से जांच और सत्यापन किए जाने के बाद ही इस रिकॉर्ड पर आधिकारिक मुहर लगाई गई. संगठन द्वारा जारी किए गए प्रमाण पत्र पर दर्ज होने की तिथि 14 अक्टूबर 2026 दर्ज है, जबकि इस वैश्विक कीर्तिमान की आधिकारिक रिकॉर्ड संख्या BWR/IND/2026/001604 अंकित की गई है.
प्रतिदिन चार घंटे का कड़ा और अनुशासित अभ्यास
अजमेर स्थित वंडर वर्ल्ड प्ले स्कूल में पढ़ने वाले नन्हे प्रांश के पिता सूरज दगदी और माता निर्मला बागड़ी हैं. परिजनों ने बचपन में ही उनके भीतर स्केटिंग के प्रति गहरा रुझान भांप लिया था. प्रांश ने जब पहली बार स्केटिंग के पहिए अपने पैरों में बांधे थे, तब उनकी उम्र केवल 2 साल और 2 महीने थी. इसके बाद से बीते 10 महीनों के दौरान उनका स्केटिंग प्रशिक्षण लगातार और पूरी लगन से जारी रहा.
उनकी दैनिक दिनचर्या किसी पेशेवर खिलाड़ी की तरह अनुशासित रही है. प्रांश हर दिन सुबह 4 बजे से 6 बजे तक दो घंटे का सत्र पूरा करते हैं और फिर शाम को 5 बजे से 7 बजे तक दोबारा दो घंटे ट्रैक पर पसीना बहाते हैं. इस प्रकार प्रतिदिन कुल 4 घंटे के अनथक अभ्यास ने उनके पैरों को इतनी मजबूती और संतुलन प्रदान किया कि वे अतिरिक्त वजन के साथ भी बिना डगमगाए तेजी से आगे बढ़ सके. माता-पिता और परिजनों के मजबूत संबल ने नन्हे प्रांश के आत्मविश्वास को नई ऊंचाइयों पर पहुंचाया.
सफलता से परिवार और शहर में खुशी की लहर
इतनी छोटी उम्र में ऐसा अविश्वसनीय संकल्प, गजब का आत्मविश्वास और शारीरिक संतुलन किसी भी खेल प्रेमी को विस्मित कर सकता है. विश्व कीर्तिमान के सत्यापन की खबर मिलते ही प्रांश के निवास स्थान और उनके पूरे इलाके में जश्न का माहौल बन गया. परिवार के सदस्य, पड़ोसी और खेल जगत के प्रशंसक नन्हे प्रांश और उनके माता-पिता को इस ऐतिहासिक सफलता पर बधाई देने पहुंच रहे हैं.


















