राजस्थान के झालावाड़ जिले में स्थित मनोहरथाना उपखंड इलाके में वन्यजीवों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता खड़ी हो गई है। दांगीपुरा थाना इलाके के महेशपुरा गांव में कब्रिस्तान के पास स्थानीय निवासियों ने एक मृत मोर देखा, जिसका शिकार किए जाने की आशंका जताई गई है। इस अमानवीय घटना की खबर फैलते ही आसपास के ग्रामीण मौके पर एकत्र हो गए और उन्होंने इस कृत्य के खिलाफ भारी रोष प्रकट किया। राष्ट्रीय पक्षी को निशाना बनाए जाने की इस वारदात ने पूरे इलाके में तनाव और नाराजगी पैदा कर दी है।
कब्रिस्तान के निकट मिले जले हुए अवशेष और मौके की जांच
महेशपुरा में जिस जगह मृत मोर पड़ा मिला था, उसके आसपास ग्रामीणों ने जब सतर्कता से छानबीन की तो चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। मौके से कई अन्य मोरों के जले हुए अवशेष भी बरामद किए गए। इस स्थिति को देखते हुए ग्रामीणों ने बिना किसी देरी के दांगीपुरा थाना पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी। सूचना मिलते ही पुलिस का गश्ती दल तत्काल घटनास्थल पर पहुंचा और पूरे परिसर का सघन मुआयना किया। पुलिस कर्मियों ने साक्ष्य जुटाते हुए मृत मोर और जले हुए सभी अवशेषों को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद कानूनी और चिकित्सकीय औपचारिकताओं के तहत इन अवशेषों को पोस्टमार्टम के लिए मनोहरथाना स्थित राजकीय पशु चिकित्सालय भिजवाया गया।
मांस पकाने और शिकारियों के सक्रिय गिरोह का अंदेशा
स्थानीय बाशिंदों का कहना है कि मनोहरथाना और आसपास के जंगलों में शिकारियों का एक गिरोह बेखौफ तरीके से घूम रहा है। ग्रामीणों के अनुसार, सुनसान टीलों, खेतों और बीहड़ों में राष्ट्रीय पक्षी को निशाना बनाया जा रहा है। कई मामलों में शिकारी मारे गए पक्षियों को सीधे अपने ठिकानों पर ले जाते हैं, जबकि कुछ मौकों पर एकांत झाड़ियों के बीच ही उन्हें आग में भूनकर उनका मांस खा लिया जाता है। इसके बाद वे बचे हुए पंख, हड्डियां और जले अवशेष वहीं जमीन पर लावारिस छोड़कर भाग निकलते हैं। महेशपुरा में मिले ताजा अवशेष भी इसी तरह की करतूत की ओर इशारा कर रहे हैं।
प्रशासनिक सुस्ती पर ग्रामीणों का आक्रोश और सख्त कदम की मांग
इलाके के लोगों ने वन विभाग के क्षेत्रीय अमले और स्थानीय पुलिस प्रशासन की कार्यशैली पर सीधा सवाल उठाया है। ग्रामीणों का आरोप है कि इलाके में संदिग्ध गतिविधियों की सूचनाएं पहले भी सामने आती रही हैं, लेकिन जिम्मेदारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। यदि जंगलों और सीमावर्ती पगडंडियों पर नियमित गश्त सुनिश्चित की जाती, तो राष्ट्रीय पक्षी के शिकार की इस कड़वी सच्चाई को समय रहते रोका जा सकता था। फिलहाल वन विभाग और पुलिस की संयुक्त टीम चिकित्सालय से पोस्टमार्टम रिपोर्ट मिलने का इंतजार कर रही है, ताकि मौत के सटीक कारणों और समय का वैज्ञानिक रूप से पता चल सके। ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि इस अपराध में शामिल अपराधियों की पहचान कर उनके खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई अमल में लाई जाए।



















