कर्क राशि में मंगल और चंद्रमा की युति से बना महालक्ष्मी राजयोग, 1 से 3 नवंबर 2026 तक तीन राशियों को धन और करियर में लाभनवंबर के पहले हफ्ते में 40 से अधिक शेयरों पर बड़ा एक्शन, डिविडेंड, बोनस और स्टॉक स्प्लिट की पूरी लिस्टचंडीगढ़ पुलिस को मिला प्रेसिडेंट्स कलर, 4 मिनट के रिस्पॉन्स टाइम पर गृह मंत्री ने दी बधाईराजस्थान के नाडोल से निकलकर मायानगरी में छाए विकल्प मेहता, सुपरस्टार के डुप्लिकेट बनकर बनाई नई पहचानतुर्कमेनिस्तान के कराकुम रेगिस्तान में आधी सदी से धधक रहा दारवाजा गैस क्रेटर, अब धीमी पड़ने लगीं लपटेंतेलंगाना के गांवों में दिवाली पर गाय के गोबर, चावल के आटे और गेरू से सजते हैं घरत्योहारी सीजन में राजनीतिक रैलियों से दिल्ली के बाजार प्रभावित, कृष्ण हेगड़े ने उठाया नुकसान का मुद्दागुलाबी नगरी की सजी चारदीवारी में खरीदारी की सुस्त चाल से दुकानदार परेशानसितंबर 2026 में दोपहिया बाजार में स्कूटर्स की जबरदस्त मांग, होंडा एक्टिवा ने बिक्री में बनाया नया रिकॉर्डकंघी में आते बाल क्या किसी बीमारी का संकेत हैं, जानिए कब डॉक्टर को दिखाना जरूरी हो जाता है
पुष्कर पशु मेले में छोटे अश्वपालकों को ऑन-द-स्पॉट जमीन, खत्म हुआ जियो टैगिंग का झंझटराजस्थान
1 नव॰ 2026, 1:39 pm (1 घंटे पहले)· 0

पुष्कर पशु मेले में छोटे अश्वपालकों को ऑन-द-स्पॉट जमीन, खत्म हुआ जियो टैगिंग का झंझट

अजमेर के अंतरराष्ट्रीय पुष्कर पशु मेले में प्रशासन ने नियमों को आसान बनाते हुए 5 से कम घोड़े लाने वालों को मौके पर ही सीधे प्लॉट देने और जियो टैगिंग की अनिवार्यता हटाने का फैसला किया है.

राजस्थान के अजमेर जिले में स्थित विख्यात पुष्कर क्षेत्र में लगने वाले अंतरराष्ट्रीय पशु मेले के प्रबंधन तंत्र में व्यापक सुधार किए गए हैं. दूरदराज के क्षेत्रों से आने वाले किसानों, पशुपालकों और व्यापारियों के सफर तथा ठहराव को सुगम बनाने के मकसद से प्रशासन ने नियमों को बेहद लचीला और आधुनिक रूप दिया है. इस दफा मेला स्थल पर दाखिल होने वाले अश्वपालकों के पंजीकरण और जमीन आवंटन की प्रणाली को पहले के मुकाबले काफी पारदर्शी रखा गया है. इसके साथ ही डिजिटल माध्यमों से कागजी औपचारिकताओं को घटाने के लिए एक खास ऑनलाइन पोर्टल भी सक्रिय किया गया है, जिससे मेले में आने वाले किसी भी व्यक्ति को सरकारी दफ्तरों या काउंटरों के बेवजह चक्कर न लगाने पड़ें.

छोटे अश्वपालकों को सीधे ऑफलाइन मिलेगा प्लॉट

मेले के समग्र प्रबंध की रूपरेखा साझा करते हुए मेला अधिकारी डॉक्टर नवीन परिहार ने स्पष्ट किया कि छोटे स्तर पर पशुपालन करने वालों को भारी राहत दी गई है. जिन पशुपालकों के पास 5 से कम घोड़े हैं, उन्हें किसी भी तरह की पेचीदा या वक्त लेने वाली प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा. ऐसे सभी छोटे पशुपालक जैसे ही मेला परिसर में अपने मवेशियों के साथ कदम रखेंगे, उन्हें बिना किसी ऑनलाइन पूर्व-पंजीकरण के सीधे ऑफलाइन माध्यम से तुरंत प्लॉट आवंटित कर दिया जाएगा. यह विशेष प्रबंध सीमांत व छोटे पशुपालकों को बेवजह की भागदौड़, तकनीकी उलझन और समय की बर्बादी से सुरक्षित रखने के लिए तय किया गया है, ताकि वे बिना किसी अड़चन के मेला प्रांगण में अपना डेरा जमा सकें.

ये भी पढ़ें

जियो टैगिंग खत्म, बड़े पशुपालकों के लिए हेल्थ सर्टिफिकेट जरूरी

व्यवस्था में दूसरा बड़ा बदलाव पूर्व में लागू अनिवार्य जियो टैगिंग को पूरी तरह समाप्त करके लाया गया है. पहले पशुपालकों को जियो टैगिंग की लंबी औपचारिकताओं में उलझना पड़ता था, जिसे अब प्रशासनिक स्तर पर हटा लिया गया है. डॉक्टर नवीन परिहार के अनुसार, जिन अश्वपालकों के पास 5 या उससे अधिक घोड़े हैं, उनके लिए स्वास्थ्य प्रमाण पत्र यानी हेल्थ सर्टिफिकेट दिखाना अनिवार्य रहेगा. पशुपालक अपने गृह क्षेत्र के किसी भी नजदीकी सरकारी पशु चिकित्सालय से वहां मौजूद अधिकृत चिकित्सकों द्वारा यह प्रमाण पत्र तैयार करवा सकते हैं. इसके बाद वे अपने घोड़ों की संख्या के मुताबिक बने सर्टिफिकेट को सीधे ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड कर अपनी पंजीकरण प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं.

डिजिटल पोर्टल पर सत्यापन और फोन पर सीधी मदद

ऑनलाइन पोर्टल के जरिए पंजीकरण की प्रक्रिया को भी बेहद सरल और सुलभ रखा गया है. पोर्टल पर आवेदन दर्ज करते वक्त पशुपालक को अपने मवेशी की एक साफ तस्वीर अपलोड करनी होती है, जिसका अधिकतम फाइल साइज 1 एमबी तक स्वीकृत किया जा रहा है. फोटो और पशु चिकित्सक से प्राप्त हेल्थ सर्टिफिकेट अपलोड होते ही रजिस्ट्रेशन का चरण पूरा मान लिया जाता है. इसके तत्काल बाद विभाग की एक विशेष तकनीकी टीम फोन के जरिए दर्ज विवरण और दस्तावेजों का सत्यापन करती है. अगर सारी जानकारियां दुरुस्त पाई जाती हैं तो आवेदन को तुरंत हरी झंडी दे दी जाती है. यदि फॉर्म में कोई खामी या दस्तावेज अधूरा दिखता है, तो विभागीय टीम उसी वक्त फोन पर संपर्क कर पशुपालक को सही मार्गदर्शन मुहैया कराती है.

भैंस वंश और अन्य पशुओं के लिए खुला आरक्षित क्षेत्र

अश्व वंश के अलावा भैंस वंश तथा अन्य प्रजातियों के मवेशियों को लाने वाले ग्रामीणों के लिए भी प्रशासन ने अलग से पुख्ता बंदोबस्त किए हैं. इन मवेशियों को लेकर आने वाले पशुपालकों पर किसी भी प्रकार के ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की शर्त नहीं थोपी गई है. उनके सुगम ठहराव के लिए मेला प्रांगण के भीतर ही एक विस्तृत और सुविधाजनक भूखंड को पूरी तरह आरक्षित रखा गया है. इस दूरगामी रणनीति से मेला क्षेत्र में मवेशियों के जमावड़े को नियंत्रित रखने, विभिन्न पशुपालकों को आसानी से जगह दिलाने और अंतरराष्ट्रीय स्तर के इस विशाल समागम को सुचारू ढंग से संचालित करने में काफी मदद मिलेगी.

सवाल-जवाब

पुष्कर मेले में 5 से कम घोड़े लाने वाले पशुपालकों को प्लॉट कैसे मिलेगा?
उन्हें किसी जटिल प्रक्रिया से नहीं गुजरना होगा, मेला क्षेत्र में पहुंचते ही ऑफलाइन माध्यम से सीधे प्लॉट आवंटित कर दिया जाएगा.
किन पशुपालकों के लिए पशु स्वास्थ्य प्रमाण पत्र अनिवार्य किया गया है?
जिन अश्वपालकों के पास 5 या उससे अधिक घोड़े हैं, उन्हें सरकारी पशु चिकित्सालय से बना हेल्थ सर्टिफिकेट प्रस्तुत करना होगा.
क्या इस बार मेले में जियो टैगिंग करवाना जरूरी है?
नहीं, प्रशासन ने कागजी औपचारिकताओं को घटाने के लिए जियो टैगिंग की अनिवार्यता को पूरी तरह समाप्त कर दिया है.
ऑनलाइन पोर्टल पर अपलोड की जाने वाली पशु की फोटो का अधिकतम साइज कितना होना चाहिए?
पोर्टल पर पशु की स्पष्ट फोटो अपलोड करते समय फाइल का अधिकतम साइज 1 एमबी तक स्वीकार किया जाता है.
ऑनलाइन फॉर्म में कोई गलती होने पर पशुपालक की मदद कैसे होगी?
विभाग की विशेष तकनीकी टीम फोन कॉल के माध्यम से डेटा सत्यापन करेगी और किसी भी कमी की स्थिति में सीधे फोन पर मार्गदर्शन देगी.
भैंस वंश और अन्य मवेशियों के ठहराव के लिए क्या नियम तय किए गए हैं?
उनके लिए ऑनलाइन या ऑफलाइन रजिस्ट्रेशन की कोई बाध्यता नहीं है, मेला परिसर में उनके लिए एक विस्तृत क्षेत्र पहले से आरक्षित किया गया है.
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 5

Arshdeep Ahluwalia@arshdeep-ahluwalia·2 मिनट पहले

पाँच से कम घोड़े लाने वालों को बिना किसी कागजी झंझट के सीधे ज़मीन मिलना बहुत राहत की बात है, वरना छोटे पशुपालकों को बेवजह परेशान होना पड़ता था।

Arjun Mehta@arjun-mehta·23 मिनट पहले

छोटे पशुपालकों को ऑन-द-स्पॉट जमीन देना तो बढ़िया है, पर क्या भीड़ बढ़ने पर प्रशासन के पास इनके लिए जगह कम पड़ जाएगी?

Ravikash Gupta@ravikash·22 मिनट पहले

अर्जुन भाई, बात तो सही है आपकी, लेकिन डिजिटल पोर्टल से भीड़ का अंदाज़ा पहले ही लग जाएगा, तो जगह कम पड़ने की दिक्कत नहीं आनी चाहिए।

Karan Malhotra@karan-malhotra·48 मिनट पहले

मेले में छोटे अश्वपालकों के लिए ऑन-द-स्पॉट प्लॉट देना और जियो टैगिंग हटाना बहुत बढ़िया कदम है, इससे फालतू की भागदौड़ बच जाएगी।

Rohan Verma@rohan-verma·48 मिनट पहले

अरे करण भाई, बिल्कुल सही कहा आपने। छोटे पालकों के लिए कागज़ी चक्कर खत्म होना सचमुच बहुत बड़ी राहत है।

नागरिक पत्रकारिता

TrendKia पत्रकार बनें

जनता की आवाज़

अपने आसपास की ख़बरें, तस्वीरें और वीडियो ट्रेंडकिआ के साथ साझा करें और अपनी आवाज़ देश तक पहुँचाएँ। हर नागरिक एक पत्रकार।

अभी जुड़ें
CH 01 लाइव
TrendKia TV ON AIR
Chamar no WhatsApp