चीन और पाकिस्तान ने शुरू किया सीमा प्रबंधन तंत्र, भारत ने क्षेत्र पर दोहराया अपना संप्रभु दावाअलवर में निर्दलीय पार्षद अनीता के बीजेपी को समर्थन देने पर खूनी संघर्ष, लाठी-सरियों से हमले में दो समर्थक अस्पताल में भर्तीघर पर ऐसे तैयार करें पंचफोरन, साधारण सब्जी का स्वाद भी बन जाएगा खासरिश्ते का नाम तय नहीं फिर भी उठती है जलन की टीस, जानिए इस उलझन की असल वजह और सही समाधानकच्चे तेल में नरमी और बॉन्ड यील्ड गिरने से संभला सोना, पर फेडरल रिजर्व के सख्त रुख ने सीमित की बढ़तकार्डानो के सामने अहम रुकावटें, डेरिवेटिव्स बाजार में सावधानी के बीच बिकवाली का दबाव बरकरारसाल 2027 में शनि की दोहरी चाल से मेष और मीन सहित कई राशियों की बदलेगी दशा, जानें साढ़ेसाती व ढैय्या का पूरा गणितपश्चिमी तट पर मुंबई से कन्याकुमारी तक 1619 किलोमीटर लंबा आर्थिक गलियारा तैयार, सफर में लगेंगे महज 22 घंटेएस जयशंकर और केरलम के मुख्यमंत्री वीडी सतीसन के बीच नई दिल्ली में मुलाकात, प्रवासी भारतीयों के मुद्दों पर हुई चर्चाअसम विधानसभा चुनाव में इस्तेमाल ईवीएम की विश्वसनीयता पर गुवाहाटी उच्च न्यायालय में सुनवाई शुरू
अलवर में निर्दलीय पार्षद अनीता के बीजेपी को समर्थन देने पर खूनी संघर्ष, लाठी-सरियों से हमले में दो समर्थक अस्पताल में भर्तीराजस्थान
19 सित॰ 2026, 12:00 pm (29 मिनट पहले)· 1

अलवर में निर्दलीय पार्षद अनीता के बीजेपी को समर्थन देने पर खूनी संघर्ष, लाठी-सरियों से हमले में दो समर्थक अस्पताल में भर्ती

अलवर के बेलाका गांव में नगर निगम चुनाव के बाद निर्दलीय पार्षद द्वारा बीजेपी को समर्थन देने पर विवाद बढ़ गया। नाराज ग्रामीणों ने समर्थकों पर लाठी और सरियों से हमला कर दिया, जिसमें दो लोग गंभीर रूप से घायल हो गए।

राजस्थान के अलवर जिले में नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद राजनीतिक सरगर्मी हिंसक टकराव में बदल गई। वैशाली नगर थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले बेलाका गांव में एक नवनिर्वाचित निर्दलीय पार्षद द्वारा भारतीय जनता पार्टी को समर्थन देने के फैसले पर दो पक्षों के बीच भारी विवाद खड़ा हो गया। यह मतभेद इतना गहराया कि समर्थकों के साथ लाठी-डंडों और लोहे की सरियों से जमकर मारपीट की गई, जिससे इलाके में सनसनी फैल गई।

बीजेपी का बोर्ड बनाने के समर्थन पर भड़का विवाद

घटनाक्रम के संबंध में सामने आई जानकारी के अनुसार, वार्ड 40 से निर्दलीय उम्मीदवार अनीता ने चुनाव में जीत हासिल की थी। नगर निगम में बोर्ड गठन की प्रक्रिया के दौरान अनीता ने बीजेपी को अपना समर्थन देने का फैसला किया। गांव के कुछ लोग इस सियासी कदम से बेहद खफा थे। आरोप है कि पार्षद के समर्थकों द्वारा बीजेपी के पक्ष में खड़े होने की बात से नाराज होकर उसी गांव के अब्दुल रज्जाक और उसके परिवार के लोगों ने खुला विरोध शुरू कर दिया।

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लाठी-डंडों और लोहे की सरियों से जानलेवा हमला

विरोध देखते ही देखते खूनी झड़प में बदल गया। आरोप के मुताबिक, हमलावरों ने योजनाबद्ध तरीके से लाठी-डंडों और लोहे की सरियों से पार्षद के समर्थकों को निशाना बनाया। इस अचानक हुए हमले में बेलाका गांव के निवासी अब्बास और याकूब लहूलुहान होकर गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के दौरान अब्बास के सिर में गहरी चोटें आईं, जबकि याकूब के शरीर पर डंडों और सरियों के वार से गंभीर घाव हो गए।

घायलों को अलवर के सामान्य चिकित्सालय में कराया गया भर्ती

घटना के तुरंत बाद आसपास के लोगों और परिजनों ने तत्परता दिखाते हुए दोनों घायल व्यक्तियों को इलाज के लिए अलवर के सामान्य चिकित्सालय पहुंचाया। अस्पताल में दोनों घायलों का उपचार चल रहा है और उनकी हालत पर डॉक्टर नजर बनाए हुए हैं। परिजनों ने पूरे मामले की शिकायत दर्ज कराई है, हालांकि मामले में पुलिस प्रशासन की आगामी कानूनी कार्रवाई और औपचारिक बयानों का विवरण आना अभी बाकी है।

सवाल-जवाब

अलवर में किस बात को लेकर विवाद हुआ था?
वार्ड 40 से निर्दलीय पार्षद अनीता द्वारा नगर निगम में बीजेपी का बोर्ड बनाने के लिए समर्थन देने पर विवाद हुआ।
घटना किस इलाके और गांव की है?
यह घटना अलवर जिले के वैशाली नगर थाना क्षेत्र में स्थित बेलाका गांव की है।
हमले में कौन लोग घायल हुए हैं?
हमले में बेलाका गांव के रहने वाले अब्बास और याकूब गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
हमले में किन हथियारों का इस्तेमाल किया गया?
आरोपियों ने पीड़ितों पर लाठी-डंडों और लोहे की सरियों से हमला किया।
घायलों को इलाज के लिए कहां भर्ती कराया गया है?
दोनों घायलों को इलाज के लिए अलवर के सामान्य चिकित्सालय में भर्ती कराया गया है।
हमले का आरोप किस पर लगाया गया है?
घायल याकूब के अनुसार, गांव के ही अब्दुल रज्जाक और उसके परिवार के लोगों पर हमले का आरोप है।
संपादकीय नीति सुधार नीति

टिप्पणियाँ 2

Rohan Verma@rohan-verma·11 मिनट पहले

स्थानीय निकाय चुनावों में संख्या बल जुटाने की ये राजनीति अब गांवों की सामाजिक ताने-बाने को सीधे तौर पर प्रभावित करने लगी है। निर्दलीय पार्षदों की निष्ठा बदलने पर इस तरह का खूनी संघर्ष इस बात का संकेत है कि राजनीतिक ध्रुवीकरण अब जमीनी स्तर पर कितनी हिंसा को बढ़ावा दे रहा है। यदि पुलिस प्रशासन ने समय रहते इस मामले में सख्त कार्रवाई नहीं की और राजनीतिक रंजिश के इस पैटर्न को नहीं रोका, तो यह तनाव अन्य वार्डों और ग्रामीण इलाकों में भी फैल सकता है, जिससे कानून-व्यवस्था की स्थिति और अधिक गंभीर हो सकती है।

Karan Malhotra@karan-malhotra·10 मिनट पहले

रोहन के विश्लेषण को आगे बढ़ाते हुए, यह मामला सिर्फ दो पक्षों का विवाद नहीं बल्कि आपराधिक कानून के तहत गंभीर संज्ञेय अपराध का है। लाठी और लोहे की सरियों से लैस होकर सुनियोजित हमला करने वाले आरोपियों पर हत्या के प्रयास और दंगे की धाराओं के तहत सख्त कानूनी शिकंजा कसना अनिवार्य है। पुलिस को यह सुनिश्चित करना होगा कि राजनीतिक दबाव या पंचायत स्तर के प्रभाव से परे, नामजद हमलावरों की तत्काल गिरफ्तारी हो, अन्यथा इस प्रकार की बेलगाम हिंसा न्याय प्रणाली की कमज़ोरी को दर्शाएगी।

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