राजस्थान के राजसमंद जिले में स्थित एक निजी चिकित्सा संस्थान के बाहर मरीज के दम तोड़ने की घटना के बाद अचानक तनाव की स्थिति निर्मित हो गई। देलवाड़ा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले अनंता अस्पताल में उपचार करा रहे मरीज की जान जाने के बाद आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने चिकित्सालय के मुख्य प्रवेश द्वार और समीपवर्ती सड़क पर जोरदार विरोध दर्ज कराया। देखते ही देखते विरोध प्रदर्शन की लपटें मुख्य सड़क मार्ग तक फैल गईं, जिसकी वजह से इलाके में काफी समय तक वाहनों की आवाजाही ठप रही। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि चिकित्सकों द्वारा समय पर समुचित सावधानी न बरतने के कारण यह अनहोनी हुई है, इसलिए पूरे घटनाक्रम की उच्चस्तरीय पड़ताल होनी चाहिए।
सीने में सामान्य तकलीफ के बाद कराया गया था भर्ती
इस पूरे विवाद के केंद्र में अभय सिंह चौहान नाम के मरीज की आकस्मिक मृत्यु है। परिजनों के अनुसार, अभय सिंह को सीने में हल्के दर्द की शिकायत महसूस हुई थी, जिसके बाद तुरंत चिकित्सीय परामर्श के उद्देश्य से उन्हें देलवाड़ा क्षेत्र के अनंता अस्पताल में दाखिल कराया गया। अस्पताल के चिकित्सकों ने प्राथमिक जांच के बाद मरीज को भर्ती कर लिया और उपचार की प्रक्रिया शुरू कर दी। परिजनों का स्पष्ट कहना है कि शुरुआती अवस्था में स्थिति इतनी गंभीर नजर नहीं आ रही थी कि जान पर बन आए, लेकिन इलाज की प्रक्रिया के तहत जब उन्हें ऑपरेशन थियेटर में ले जाया गया, तो उसी दौरान उनकी मौत होने की सूचना बाहर आई।
चिकित्सकीय लापरवाही के संगीन आरोप
अस्पताल प्रशासन पर लापरवाही का सीधा आरोप लगाते हुए मृतक के रिश्तेदार विक्रम सिंह ने आक्रोश व्यक्त किया। विक्रम सिंह का कहना था कि अभय सिंह को केवल हल्की सीने की तकलीफ के चलते स्वास्थ्य केंद्र लाया गया था, लेकिन सर्जिकल प्रक्रिया के दौरान अचानक उनकी सांसें थम गईं। उन्होंने आरोप लगाया कि चिकित्सकों की कार्यशैली और प्रबंधन की अनदेखी ने मरीज की जान ले ली। इस सूचना के मिलते ही मृतक के अन्य सगे संबंधी और स्थानीय निवासी बड़ी संख्या में अस्पताल परिसर में एकत्र होने लगे। परिजनों ने मांग उठाई कि जब तक जिम्मेदार स्टाफ और डॉक्टरों की जवाबदेही तय नहीं होती और पूरे घटनाक्रम की निष्पक्ष जांच शुरू नहीं की जाती, तब तक वे शांत नहीं बैठेंगे।
उदयपुर-जयपुर मार्ग पर लगा लंबा जाम
परिजनों के समर्थन में जब स्थानीय लोग बड़ी संख्या में सड़क पर उतरे, तो स्थिति काफी संवेदनशील हो गई। प्रदर्शनकारी अस्पताल परिसर से बाहर निकलकर पास से गुजरने वाले उदयपुर-जयपुर राष्ट्रीय राजमार्ग पर आ डटे। सड़क पर लोगों के जमावड़े के कारण दोनों दिशाओं में गाड़ियों के पहिए पूरी तरह थम गए। बसें, निजी चौपहिया वाहन और मालवाहक ट्रक हाईवे पर कतारबद्ध खड़े हो गए, जिससे सामान्य यात्रियों को भारी असुविधा का सामना करना पड़ा। इस प्रमुख मार्ग पर घंटों तक यातायात व्यवस्था चरमराई रही। अस्पताल परिसर और राजमार्ग पर हंगामे की सूचना मिलते ही पुलिस और स्थानीय प्रशासनिक अमले में हलचल तेज हो गई, ताकि स्थिति को नियंत्रित किया जा सके और दोनों पक्षों के बीच संवाद स्थापित हो सके।
प्रबंधन ने आरोपों को नकारा
दूसरी ओर, अनंता अस्पताल प्रबंधन ने मरीज के परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। अस्पताल पक्ष का रुख है कि उपचार के दौरान किसी भी स्तर पर चिकित्सीय चूक नहीं हुई है और इस दुखद स्थिति को जबरन एक बड़ा विवाद बनाया जा रहा है। प्रबंधन का दावा है कि चिकित्सकों ने तय मेडिकल प्रोटोकॉल के मुताबिक ही कदम उठाए थे, इसलिए लापरवाही की बात निराधार है। एक तरफ जहां पीड़ित परिवार निष्पक्ष जांच की मांग पर अड़ा हुआ है, वहीं अस्पताल प्रबंधन अपने बचाव में खड़ा है। प्रशासनिक स्तर पर जांच की अंतिम रिपोर्ट आने के बाद ही साफ हो पाएगा कि ऑपरेशन टेबल पर मरीज की मृत्यु किन चिकित्सीय कारणों से हुई थी।

















