उदयपुर शहर में गणेश महोत्सव की धूम चरम पर है और चारों तरफ उत्सव का उल्लास देखने को मिल रहा है। शहर के अलग-अलग मोहल्लों और मुख्य चौराहों पर गणपति पंडालों को बेहद भव्य और अनोखे ढंग से संवारा गया है। कहीं लंबोदर को भारतीय करंसी नोटों से सजाया गया है, तो कहीं सोने और चांदी के बहुमूल्य आभूषणों से उनका अलौकिक श्रृंगार हुआ है। इस बार विभिन्न पंडालों में तैयार की गई अनूठी और रचनात्मक थीम लोगों को अपनी ओर खींच रही हैं। इसी कड़ी में उदयपुर के किशनपोल इलाके में सजाया गया भव्य गणेश पंडाल इस समय पूरे शहर के श्रद्धालुओं के लिए मुख्य आकर्षण का केंद्र बन चुका है।
किशनपोल के राजा का तिरुपति बालाजी स्वरूप
किशनपोल में स्थापित 'किशनपोल के राजा' को इस बार एक बेहद विशिष्ट और मनमोहक रूप में प्रस्तुत किया गया है। यहां भगवान गणपति का श्रृंगार प्रसिद्ध दक्षिण भारतीय तीर्थ तिरुपति बालाजी के स्वरूप के अनुरूप किया गया है। विनायक की इस अनुपम झांकी की बनावट और अलंकरण इस बारीकी से किया गया है कि पहली नजर में ऐसा प्रतीत होता है जैसे तिरुपति बालाजी स्वयं भक्तों के बीच पधारकर उन्हें आशीर्वाद दे रहे हों। मूर्ति का यह अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं को इतना मंत्रमुग्ध कर रहा है कि जो भी दर्शन करने पहुंच रहा है, वह टकटकी लगाए इस छवि को निहारता ही रह जाता है।
श्रृंगार की बारीकियां और भक्तों का उत्साह
पंडाल में मुख्य गणेश प्रतिमा की वेशभूषा और अलंकरण से लेकर समूचे पंडाल के भीतरी वातावरण तक हर बारीक पहलू का विशेष ध्यान रखा गया है। तिरुपति बालाजी के पारंपरिक स्वरूप की हर खासियत को भगवान गणेश के श्रृंगार में शामिल किया गया है। यही कारण है कि पंडाल में प्रवेश करते ही दर्शनार्थी भावविभोर हो उठते हैं और उनका उत्साह देखते ही बनता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपने मोबाइल फोन से भगवान के इस दिव्य स्वरूप की तस्वीरें ले रहे हैं और यादगार वीडियो तैयार कर रहे हैं। जैसे-जैसे इस विशेष झांकी की चर्चा अन्य इलाकों में फैल रही है, वैसे-वैसे यहां पहुंचने वाले भक्तों की तादाद लगातार बढ़ती जा रही है।
शाम की आरती और सोशल मीडिया पर धूम
विशेष रूप से शाम के वक्त पंडाल परिसर में भारी भीड़ उमड़ रही है, जहां दूर-दराज से लोग अपने पूरे परिवार के साथ भगवान गणेश के इस अनुपम विग्रह के दर्शन करने पहुंच रहे हैं। हर कोई इस पावन पल को अपने कैमरे में संजो लेना चाहता है। उदयपुर में गणेश उत्सव के दौरान हर वर्ष कुछ नया और रचनात्मक करने की एक मजबूत परंपरा रही है। शहर भर में कहीं पारंपरिक सजावट देखने को मिल रही है तो कहीं धार्मिक और पौराणिक आख्यानों पर आधारित सजीव झांकियां सजाई गई हैं। किशनपोल के राजा का यह तिरुपति बालाजी स्वरूप भी इसी रचनात्मक सोच की एक अनूठी मिसाल है। सोशल मीडिया पर भी इस झांकी के वीडियो तेजी से लोकप्रिय हो रहे हैं और शहरवासी इसे इस गणेशोत्सव की सबसे दर्शनीय झांकियों में गिन रहे हैं।



















