राजस्थान के मौसम में इस वर्ष असामान्य बदलाव देखने को मिल रहे हैं, जहां वर्षा ऋतु के विदा होते समय भी प्रचंड गर्मी का प्रकोप बना हुआ है। सामान्य तौर पर राज्य में अप्रैल से जून के महीनों के दौरान अत्यधिक गर्मी पड़ती है और सितंबर का महीना बीतने के साथ ही अक्टूबर में ठंड की आहट महसूस होने लगती है। पिछले वर्ष जहां पूरे राज्य में भारी वर्षा का एक नया कीर्तिमान स्थापित हुआ था, वहीं इस साल स्थिति पूरी तरह उलट गई है। संपूर्ण मानसून सत्र के दौरान राज्य में सामान्य की तुलना में लगभग 21 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है। बादलों की बेरुखी और बारिश के अभाव के चलते सितंबर के अंतिम सप्ताह में भी कई जिलों में तापमान लगातार 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है।
पश्चिमी संभाग में 43 डिग्री पार पहुंचा पारा
रेगिस्तानी इलाकों में शुष्क मौसम के चलते तापमान सामान्य स्तर से 4 से 5 डिग्री सेल्सियस अधिक बना हुआ है। गुरुवार को पश्चिमी संभाग में सबसे अधिक गर्मी बाड़मेर में दर्ज की गई, जहां अधिकतम पारा 43.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया। इसके अलावा जैसलमेर जिले में अधिकतम तापमान 43.2 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जोधपुर में पारा 41.7 डिग्री सेल्सियस, फलौदी में 41.4 डिग्री सेल्सियस, बीकानेर में 41.6 डिग्री सेल्सियस और चूरू में 40.5 डिग्री सेल्सियस रहा। वहीं पूर्वी संभाग के सीकर जिले के फतेहपुर कस्बे में अधिकतम तापमान 39.5 डिग्री सेल्सियस पर पहुंचा। सितंबर के आखिरी दिनों में इस तरह आसमान से आग बरसने जैसी स्थिति ने लोगों को हैरान कर दिया है।
अगले दिनों के लिए मौसम का पूर्वानुमान
मौसम के पूर्वानुमान के अनुसार पूर्वी राजस्थान के जिलों में अगले 2 से 3 दिन तक मौसम पूरी तरह शुष्क बने रहने की संभावना है। वहीं पश्चिमी राजस्थान के जिलों में भी आगामी 3 से 4 दिनों तक शुष्क मौसम का दौर जारी रहेगा। हालांकि कुछ क्षेत्रों में राहत की सीमित संभावना भी बनी हुई है। आगामी 27 से 29 सितंबर के दौरान भरतपुर, जयपुर संभाग और शेखावाटी के कुछ इलाकों में छिटपुट वर्षा देखने को मिल सकती है। इसके अतिरिक्त 28 और 29 सितंबर को एक नए पश्चिमी विक्षोभ के सक्रिय होने के चलते बीकानेर संभाग में भी हल्की बारिश होने का अनुमान लगाया गया है।
फसलें सूखने से किसानों के सामने गहराया आर्थिक संकट
बारिश की भारी कमी ने राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों और कृषि व्यवस्था को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। प्रदेश के अधिकांश जिलों में बारिश का आंकड़ा सामान्य औसत तक भी नहीं पहुंच सका, जबकि केवल भरतपुर और झुंझुनूं जिले ही अच्छी बारिश दर्ज करने के मामले में सबसे आगे रहे। पश्चिमी राजस्थान के कई इलाकों में किसानों को बादलों का लंबा इंतजार करना पड़ा, लेकिन पर्याप्त वर्षा नहीं हुई। मानसून के शुरुआती चरण में हुई हल्की बारिश के बाद खेतों में बीजों का अंकुरण तो हो गया था, लेकिन उसके बाद लगातार सूखे और भीषण धूप के कारण खड़ी फसलें सूखकर दम तोड़ चुकी हैं। खेतों में हरियाली नष्ट होने से किसानों के सामने अब बड़ा आर्थिक संकट खड़ा हो गया है।

















