राजस्थान की राजधानी जयपुर में साल 2008 में हुए सीरियल बम धमाकों के एक दोषी को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मोहम्मद सरवर आज़मी उर्फ ढिल्ला पप्पू की रिहाई की मांग वाली अर्जी ठुकरा दी है। आज़मी को इस मामले में उम्रकैद की सजा मिली हुई है और अदालत के ताज़ा आदेश के बाद अब उसे जेल में ही रहना होगा।
2008 में जयपुर में क्या हुआ था
13 मई 2008 को जयपुर के अलग-अलग हिस्सों में साइकिलों पर रखे बमों के जरिए सिलसिलेवार धमाके किए गए थे। इन धमाकों में 71 लोगों की जान चली गई थी और 185 से ज्यादा लोग घायल हुए थे। यह राजस्थान के इतिहास के सबसे भयावह आतंकी हमलों में गिना जाता है। मामले की जांच के दौरान पुलिस ने कई लोगों को गिरफ्तार किया था, जिन पर बाद में मुकदमा चलाया गया।
17 साल तक चली कानूनी लड़ाई
जयपुर की जिला अदालत ने साल 2019 में इस मामले की सुनवाई पूरी कर आरोपियों को दोषी ठहराते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। हालांकि मार्च 2023 में राजस्थान हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को पलटते हुए सभी आरोपियों को बरी कर दिया, जिससे धमाकों में जान गंवाने वाले परिवारों को गहरा झटका लगा। मामले की सुनवाई के दौरान करीब 1293 गवाहों के बयान दर्ज किए गए थे। हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा और अप्रैल 2025 में शीर्ष अदालत ने 17 साल बाद पीड़ित परिवारों को इंसाफ दिलाते हुए 4 दोषियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
अब सुप्रीम कोर्ट ने क्या फैसला दिया
मोहम्मद सरवर आज़मी उर्फ ढिल्ला पप्पू उन्हीं दोषियों में से एक है जिन्हें सुप्रीम कोर्ट ने उम्रकैद की सजा दी थी। आज़मी ने रिहाई की मांग को लेकर अदालत का रुख किया था, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने उसकी अर्जी को खारिज करते हुए साफ कर दिया कि उसे उम्रकैद की सजा पूरी करनी होगी। अदालत ने उसे किसी तरह की राहत देने से इनकार कर दिया।
आगे क्या
इससे पहले मई 2026 में भी दोषियों की एक ऐसी ही अर्जी नामंजूर की जा चुकी है, जिसमें अदालत ने साफ कहा था कि दोषियों को जेल में ही उम्रकैद की सजा काटनी होगी। हर साल धमाकों की बरसी पर पीड़ित परिवार इंसाफ की उम्मीद के साथ इस मामले को याद करते हैं, हालांकि मामले में कानूनी प्रक्रिया अब भी पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।



















