खाद्य तेल उत्पादन के क्षेत्र में स्थानीय स्तर पर आत्मनिर्भरता बढ़ाने और काश्तकारों को सीधे प्रसंस्करण उद्योग से जोड़ने के मकसद से भरतपुर जिले में तेल मिल स्थापित करने की विशेष पहल शुरू की गई है। इस सरकारी योजना के तहत खेती से जुड़े लोग तथा नए उद्यमी अपनी खुद की ऑयल मिल चालू कर सकते हैं, जिस पर तय नियमों के तहत अनुदान सहायता उपलब्ध कराई जाएगी। ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में कृषि उपज के प्रसंस्करण को विस्तार देने की दिशा में यह एक अहम कदम माना जा रहा है, जिससे कच्चा माल बेचने के बजाय तैयार उत्पाद बाजार में उतारने का रास्ता तैयार होगा।
प्रशासनिक स्तर पर तय हुआ शुरुआती लक्ष्य
जिले में इस कार्यक्रम के क्रियान्वयन के लिए एक निर्धारित लक्ष्य तय किया गया है। कृषि विभाग अधिकारी राधेश्याम मीणा के अनुसार, योजना के अंतर्गत आने वाले आवेदनों को सबसे पहले जिला स्तर पर परखा जाएगा। इसके बाद सभी प्रस्ताव औपचारिक अनुमोदन के लिए जिला कलेक्टर के समक्ष पेश किए जाएंगे। जिला स्तरीय समिति और कलेक्टर महोदय की संस्तुति मिलने के उपरांत ही इन फाइलों को अंतिम मंजूरी के लिए कृषि निदेशालय भेजा जाएगा। निदेशालय से हरी झंडी मिलने के बाद ही आवेदक अपनी तेल मिल लगाने की जमीनी प्रक्रिया को आगे बढ़ा सकेंगे।
10 मीट्रिक टन क्षमता और आधुनिक मशीनों का विकल्प
इस योजना के तहत स्थापित की जाने वाली ऑयल मिल की प्रसंस्करण क्षमता 10 मीट्रिक टन रखी जा सकती है। तेल निष्कर्षण के काम में उपयोग होने वाले कई तरह के यंत्र लगाने की सुविधा इसमें शामिल की गई है।
- बिजली चालित उपकरण: मिल परिसर में कार्य संचालन के लिए आधुनिक इलेक्ट्रिक मशीनें लगाई जा सकेंगी।
- स्पेलर यूनिट: तिलहन की पेराई और तेल निष्कर्षण के लिए जरूरी स्पेलर मशीनें स्थापित करने का प्रावधान है।
- सहायक मशीनरी: तेल शोधन, छनाई और पैकेजिंग से जुड़े विभागीय मानकों के अनुरूप अन्य आवश्यक यंत्र भी जोड़े जा सकते हैं।
यूनिट के तकनीकी स्वरूप और विभाग द्वारा जारी दिशा-निर्देशों के आधार पर ही मशीनों का चयन मान्य होगा। अधिकारियों ने यह भी स्पष्ट किया है कि यदि जिले से निर्धारित लक्ष्य से ज्यादा आवेदन आते हैं, तो निदेशालय स्तर पर अतिरिक्त लक्ष्य आवंटित करने पर भी विचार किया जा सकता है।
किसानों को मिलेगा उपज का बेहतर मूल्य और रोजगार
स्थानीय स्तर पर पेराई यूनिट लगने से काश्तकारों को अपनी तिलहन फसल का सीधा मूल्य संवर्धन करने में मदद मिलेगी। इससे बिचौलियों पर निर्भरता घटेगी और उत्पादकों को अपनी ही फसल से तैयार तेल को स्थानीय बाजार में बेचकर बेहतर मुनाफा कमाने का अवसर मिलेगा। इसके साथ ही मिलों के संचालन से ग्रामीण क्षेत्र में नए रोजगार के अवसर भी सृजित होंगे। इच्छुक व्यक्तियों को सलाह दी गई है कि वे अनुदान की सटीक राशि, पात्रता की शर्तें, आवश्यक दस्तावेजों की सूची और आवेदन की समय-सीमा की पुष्टि के लिए कृषि विभाग के स्थानीय कार्यालय से संपर्क करें, क्योंकि अंतिम चयन विभागीय नियमों और भौतिक लक्ष्यों के आधार पर ही तय होगा।




















