राजस्थान के भरतपुर जिले में स्थानीय निकाय चुनावों की सरगर्मियां अपने चरम पर हैं और हर तरफ राजनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं। नगर निगम के कुल 65 वार्डों में पार्षद पद के लिए होने वाले चुनावों को लेकर राजनीतिक दल अपनी पूरी ताकत झोंक रहे हैं। इस बार का चुनाव केवल शहर की स्थानीय सरकार चुनने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके राजनीतिक मायने भी बहुत गहरे हैं। ऐसा इसलिए है क्योंकि भरतपुर राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का गृह जिला है, जिसके चलते इस चुनावी जंग को उनकी सियासी पकड़ और साख से भी जोड़कर देखा जा रहा है। सत्ताधारी दल से लेकर विपक्षी खेमे तक हर कोई इस लड़ाई को जीतने के लिए अपनी रणनीति को अमलीजामा पहनाने में जुटा हुआ है।
विगत चुनावों के आंकड़े और इस बार की राजनीतिक तस्वीर
भरतपुर नगर निगम के पिछले चुनावों के नतीजे बताते हैं कि यहां मुकाबला कितना दिलचस्प और कांटे का हो सकता है। वर्ष 2019 में हुए पिछले निगम चुनाव में किसी भी एक दल को स्पष्ट बहुमत हासिल नहीं हुआ था। उस समय कुल 65 वार्डों में से 22 सीटों पर निर्दलीय उम्मीदवारों ने जीत का परचम लहराया था, जबकि भारतीय जनता पार्टी ने भी 22 सीटों पर कब्जा जमाया था। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस पार्टी के खाते में 18 सीटें आई थीं और बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवारों ने 3 सीटों पर जीत दर्ज की थी। इस बार भी स्थिति कमोबेश ऐसी ही नजर आ रही है जहां मुख्य दलों के अलावा बागी और निर्दलीय प्रत्याशी चुनावी समीकरणों को उलझाने का पूरा दम रखते हैं। टिकट बंटवारे से नाखुश होकर मैदान में उतरे निर्दलीय उम्मीदवार कई वार्डों में लड़ाई को त्रिकोणीय बना रहे हैं, जिससे भाजपा और कांग्रेस दोनों की मुश्किलें बढ़ गई हैं।
मुख्यमंत्री के गृह जिले में प्रतिष्ठा की बड़ी लड़ाई
भरतपुर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का अपना गृह जिला होने के कारण इस चुनाव पर पूरे राजस्थान की विशेष नजर है। भारतीय जनता पार्टी के सामने अपने ही घर में पार्टी की पकड़ को और अधिक मजबूत साबित करने की बड़ी चुनौती है। दूसरी तरफ कांग्रेस पार्टी पिछले चुनाव में मिली सीटों के आधार पर अपनी स्थिति को और बेहतर करते हुए निगम की सत्ता में वापसी की पुरजोर कोशिश कर रही है। दोनों ही प्रमुख दल अपनी जीत सुनिश्चित करने के लिए स्थानीय स्तर पर पूरी ताकत लगा रहे हैं। निर्दलीय और बागी प्रत्याशियों की भारी मौजूदगी ने दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व की चिंता को बढ़ा दिया है, क्योंकि कई वार्डों में बागी उम्मीदवार मुख्य दलों के अधिकृत प्रत्याशियों के वोटों में सेंधमारी करने की स्थिति में हैं।
भरतपुर नगर निगम का संक्षिप्त इतिहास और सफर
भरतपुर का स्थानीय निकाय का सफर काफी पुराना और दिलचस्प रहा है। यह क्षेत्र लंबे समय तक नगर परिषद के रूप में संचालित होता रहा है। ऐतिहासिक दस्तावेजों के अनुसार वर्ष 2004 में नगर परिषद में एक निर्वाचित अध्यक्ष और 45 पार्षदों की व्यवस्था हुआ करती थी। इसके बाद, 19 फरवरी 2014 को राजस्थान सरकार ने एक बड़ा प्रशासनिक फैसला लेते हुए भरतपुर नगर परिषद को नगर निगम के रूप में अपग्रेड कर दिया था। नगर निगम बनने के ठीक बाद वर्ष 2014 में हुए चुनाव में भाजपा के शिवसिंह भोंट भरतपुर के पहले महापौर चुने गए थे। उन्होंने साल 2014 से 2019 तक इस पद की जिम्मेदारी संभाली। इसके बाद वर्ष 2019 के निगम चुनावों के परिणाम आने के बाद कांग्रेस के अभिजीत कुमार को नया महापौर चुना गया था, जिनका चुनाव 27 नवंबर 2019 को संपन्न हुआ था। उनका पांच साल का कार्यकाल नवंबर 2024 में पूरा हो चुका है। इस प्रकार नगर निगम के दर्जे के बाद से भरतपुर को अब तक केवल दो ही निर्वाचित महापौर मिले हैं और अब हर कोई यह जानने को उत्सुक है कि इस बार तीसरा महापौर कौन बनेगा।
विकास से जुड़े बुनियादी मुद्दे बने चुनावी केंद्र
इस बार के चुनावी मैदान में राजनीतिक दलों के नेता और उम्मीदवार बड़े-बड़े दावों के साथ जनता के बीच पहुंच रहे हैं, लेकिन जमीन पर जनता के अपने स्थानीय मुद्दे हावी हैं। शहर की बदहाल सड़कें, नियमित सफाई व्यवस्था, जल निकासी की उचित व्यवस्था, पेयजल संकट, यातायात का भारी दबाव, अतिक्रमण की समस्या और चौमुखी शहरी विकास से जुड़े तमाम सवाल इस चुनाव के मुख्य केंद्र बिंदु बने हुए हैं। शहर के अलग-अलग वार्डों में खड़े प्रत्याशी मतदाताओं को अपने पक्ष में करने के लिए इन्हीं मुद्दों को हथियार बना रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ जागरूक मतदाता भी पिछले कार्यकाल के दौरान हुए कामकाज और अपनी रोजमर्रा की स्थानीय समस्याओं का आकलन करके ही अपना वोट डालने का मन बना रहे हैं।
शहर की कुर्सी पर कौन होगा काबिज?
भरतपुर नगर निगम के इस चुनावी रण में हर स्तर पर मुकाबला बेहद रोमांचक हो गया है। एक तरफ भाजपा के सामने मुख्यमंत्री के गृह जिले में अपनी साख बचाए रखने की चुनौती है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस अपनी स्थिति मजबूत करने के लिए पूरा जोर लगा रही है। वहीं निर्दलीय उम्मीदवार एक बार फिर किंगमेकर की भूमिका निभाने के लिए तैयार बैठे हैं। दो चरणों में संपन्न होने वाले निकाय चुनाव के पहले चरण के मतदान पर सबकी निगाहें टिकी हुई हैं। अब यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि भरतपुर की जनता आने वाले समय में शहर की बागडोर किसके हाथों में सौंपती है और कौन सा दल इस चुनावी वैतरणी को पार करने में सफल होता है।



















