झुंझुनूं जिले के चिड़ावा क्षेत्र में धातु की ऊंची कीमतों के चलते बिजली वितरण ढांचे को निशाना बनाने का एक गंभीर मामला सामने आया है। सूरजगढ़ रोड पर सेही वाले जोहड़ के पास लावारिस हालत में बिजली के ट्रांसफॉर्मर यानी डीपी का भारी-भरकम खाली बाहरी खोल पड़ा मिलने से हड़कंप मच गया। आसपास मौजूद स्थानीय नागरिकों की नजर जब जोहड़ में पड़े इस खाली लोहे के बक्से पर पड़ी, तो उन्होंने फौरन मामले की जानकारी विद्युत निगम को दी। माना जा रहा है कि शातिर अपराधियों ने सुनसान ग्रामीण इलाके या किसी फीडर से पहले पूरा उपकरण उखाड़ा, फिर उसे सुरक्षित ठिकाने पर ले जाकर भीतर मौजूद कीमती तांबा निकाल लिया और सबूत मिटाने के इरादे से खाली ढांचे को वीरान जोहड़ में पटककर अंधेरे में भाग निकले।
फीडर रिकॉर्ड की पड़ताल में जुटी तकनीकी टीम
सार्वजनिक जोहड़ में ट्रांसफॉर्मर का खोल मिलने के बाद विद्युत वितरण निगम का अमला सक्रिय हो गया है। तकनीकी अधिकारी अब आसपास के सभी ग्रामीण और शहरी फीडरों के लॉग रिकॉर्ड की बारीक जांच कर रहे हैं। विभाग यह तकनीकी ब्योरा जुटा रहा है कि यह उपकरण किस विशिष्ट क्षेत्र के उपभोक्ताओं की विद्युत आपूर्ति से जुड़ा था। किसी भी ट्रांसफॉर्मर के अचानक हटने से संबंधित इलाके की लाइन ट्रिप होती है या आपूर्ति रुकती है, इसलिए उपकेंद्रों के डेटा की जांच की जा रही है ताकि चोरी की सटीक लोकेशन और फीडर की पहचान की जा सके।
कनिष्ठ अभियंता ने दी जांच की जानकारी
विद्युत वितरण निगम के कनिष्ठ अभियंता अरुण बड़सीवाल ने पूरे घटनाक्रम की पुष्टि करते हुए बताया कि फिलहाल किसी भी ग्रामीण या उपभोक्ता की ओर से अपने इलाके से ट्रांसफॉर्मर गायब होने की कोई लिखित या औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं कराई गई है। बड़सीवाल के अनुसार, औपचारिक रिपोर्ट न आने के बावजूद विभाग ने अपने स्तर पर तकनीकी व विभागीय पड़ताल शुरू कर दी है। टीम यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि यह उपकरण किस क्षेत्र का है और इसके पीछे किस गिरोह की सक्रियता हो सकती है।
किसानों में सिंचाई ठप होने की चिंता और गश्त की मांग
चिड़ावा और आसपास के इलाकों में विद्युत ट्रांसफॉर्मरों से तांबा निकालने की इन हरकतों से ग्रामीण आबादी, खासकर कृषक वर्ग में भारी बेचैनी देखी जा रही है। किसानों का कहना है कि बिजली वितरण ट्रांसफॉर्मर पर ही उनके नलकूपों और खेतों की सिंचाई पूरी तरह टिकी होती है। ऐसे में उपकरण चोरी होने से कई दिनों तक बिजली गुल रहती है, जिससे खड़ी फसलों को पानी नहीं मिल पाता और उन्हें बड़ा आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है। स्थानीय बाशिंदों ने पुलिस और प्रशासन से रात्रि गश्त बढ़ाने, कबाड़ियों की दुकानों की निगरानी करने और सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वाले असामाजिक तत्वों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।



















