डिजिटल दुनिया में आसान कमाई का लालच देकर लोगों को कंगाल करने वाले साइबर जालसाजों ने राजस्थान के चूरू इलाके में एक युवक को अपना निशाना बनाया है। सोशल नेटवर्क पर तेजी से अमीर बनने का सपना दिखाकर छापर क्षेत्र के निवासी 24 वर्षीय सीताराम जाट की गाढ़ी कमाई लूट ली गई। जालसाजों ने इसके लिए 'ड्रेगन टाइगर' नाम के डिजिटल गेमिंग ऐप का सहारा लिया। शुरुआत में पीड़ित को अपने चंगुल में फंसाने के लिए छोटी-छोटी जीतों का स्वाद चखाया गया, जिससे उसे लगने लगा कि यह मुनाफा सचमुच संभव है। जैसे ही युवक का शक पूरी तरह खत्म हुआ, शातिरों ने दांव का दायरा बढ़ाकर उससे भारी रकम ऐंठने की रणनीति अपनाई।
मुनाफे के फेर में कई बार में भेजी गई पूंजी
शुरुआती बढ़त से उत्साहित होकर सीताराम अतिरिक्त रिटर्न की चाहत में बार-बार डिजिटल माध्यम से पैसे भेजने लगा। 18 सितंबर से लेकर 6 अक्टूबर के दौरान उसने कई किस्तों में भारी पूंजी का भुगतान किया। रकम भेजने के लिए उसने अपने दो निजी बैंक खातों का उपयोग किया, जिनमें पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक (AU Bank) शामिल थे। भिन्न-भिन्न ट्रांजेक्शन के जरिए उसने कुल 4 लाख 67 हजार 400 रुपये जालसाजों द्वारा बताए गए खातों में ऑनलाइन स्थानांतरित कर दिए। युवक इस उम्मीद में लगातार पैसा डालता रहा कि उसका जमा कोष तेजी से बढ़ रहा है और वह बाद में समूची राशि को एक साथ अपने खाते में वापस ले लेगा।
निकासी का बटन दबाते ही बंद हुआ खाता
जब खाते में बड़ी पूंजी जमा हो गई और पीड़ित ने अपने कुल 4 लाख 67 हजार 400 रुपये तथा कथित तौर पर जीते गए पैसों को निकालने की कोशिश की, तो स्क्रीन पर तकनीकी रुकावट आ गई। शातिर धोखेबाजों ने तुरंत उसकी यूजर आईडी निष्क्रिय कर दी। आईडी के फ्रीज होते ही बातचीत और संपर्क के सभी साधन अचानक टूट गए। इस अप्रत्याशित झटके के बाद युवक को समझ आया कि वह किसी सुनियोजित डिजिटल धोखाधड़ी का शिकार हो गया है। उसने समय गंवाए बिना नेशनल साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल पर संपर्क साधा और ऑनलाइन शिकायत प्रविष्ट कराई।
कानूनी धाराओं में मुकदमा दर्ज, जांच तेज
घटना की लिखित शिकायत लेकर पीड़ित ने चूरू के साइबर थाने में न्याय की गुहार लगाई। पुलिस प्रशासन ने औपचारिक शिकायत के आधार पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और सूचना प्रौद्योगिकी (IT) कानून की उपयुक्त धाराओं में केस कायम कर लिया है। पूरे प्रकरण की तहकीकात साइबर थानाधिकारी (आरपीएस) विजय कुमार को सौंपी गई है। विभाग की तकनीकी शाखा उन सभी बैंक खातों और यूपीआई आईडी के लेन-देन का विश्लेषण कर रही है, जहां यह ठगी गई रकम जमा करवाई गई थी।



















