उत्तर प्रदेश के मऊ जिले में एक ऐसी खास मिठाई बनाई जाती है जिसके स्वाद के आगे मंहगे मेवे से बनी मिठाइयां भी फीकी पड़ जाती हैं। स्थानीय स्तर पर मशहूर त्रिवेणी स्वीट हाउस में लौकी और कद्दू के इस्तेमाल से एक अनोखी बर्फी तैयार की जाती है। इसका स्वाद बाजार में मिलने वाली सामान्य बर्फी से काफी अलग होता है। दुकान के संचालक धर्मचंद के अनुसार, इस पारंपरिक मिठाई को बनाने का सिलसिला कई दशकों से लगातार चला आ रहा है।
कैसे तैयार की जाती है यह अनोखी बर्फी
इस खास बर्फी को बनाने की प्रक्रिया में मुख्य रूप से लौकी या कद्दू के साथ खोया, चीनी और शुद्ध देसी घी का उपयोग किया जाता है। इन सभी सामग्रियों के सही मिश्रण से इस मिठाई का स्वाद और इसकी बनावट आम बर्फी से बिल्कुल अलग और अनूठी बनती है। दुकान संचालक धर्मचंद के मुताबिक, इसकी शुरुआत सबसे पहले लौकी या कद्दू को छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों में काटने से होती है। इसके बाद इन टुकड़ों को पानी में अच्छी तरह उबाला जाता है ताकि आगे की मिठाई बनाने की प्रक्रिया बेहद आसान हो जाए।
पकाने की पूरी प्रक्रिया और समय
उबालने की प्रक्रिया पूरी होने के बाद लौकी या कद्दू में शक्कर मिलाकर इसे अच्छी तरह पकाया जाता है। इसके पश्चात इसमें खोया मिलाया जाता है और पूरे मिश्रण को गाढ़ा होने तक पकाया जाता है। मिश्रण तैयार होने के बाद इसे सही आकार में काट कर बर्फी का रूप दिया जाता है। संचालक धर्मचंद के अनुसार, करीब 15 से 20 किलो बर्फी के एक बैच को तैयार करने में लगभग 2 से ढाई घंटे का समय लगता है। अंत में इस मिश्रण में देसी घी मिलाया जाता है जो इसके स्वाद को और अधिक बढ़ाता है। यह बर्फी खाने में बहुत ज्यादा मीठी नहीं होती बल्कि इसका स्वाद हल्का मीठा होता है।
कीमत और ग्राहकों का जबरदस्त उत्साह
त्रिवेणी स्वीट हाउस पर यह खास बर्फी 400 रुपये प्रति किलो के भाव से बेची जाती है। दुकान संचालक के मुताबिक, इस मिठाई को हर रोज बिल्कुल ताजा तैयार किया जाता है और इसकी लोकप्रियता का आलम यह है कि कई बार शाम ढलने तक पूरा स्टॉक खत्म हो जाता है। मऊ स्थानीय इलाके के अलावा आसपास के अन्य जिलों से भी खाने के शौकीन लोग इस अनोखी बर्फी को खरीदने के लिए खासतौर पर पहुंचते हैं।



















